मधेपुरा में सामाजिक न्याय की धरती और पिछड़ों के मसीहा स्व० बी. पी. मंडल के पैतृक गांव मुरहो में महादलित समुदाय के पूर्व सांसद किराय मुसहर के परिजन आज दाने-दाने को मुहताज हैं. परिवार के बचे सदस्य किसी तरह मजदूरी कर गुजर बसर करने मजबूर हैं और मधेपुरा में समाजवाद का ठेका ले रखे तथाकथित समाजवाद के उत्तराधिकारी सहित राजनेता भी अपनी-अपनी रोटी सेंकने में मशगूल हैं. पर इनकी सुधि लेने की जहमत उठाने वाला आज कोई नहीं बचा है. सबसे दुखद तो यह है कि इस परिवार को सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है.
1952-53 में सांसद बने स्वर्गीय किराय मुसहर के घर को दशकों से आज तक सरकारी शौचालय भी नसीब नहीं हो सका है. परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे शौच करने को मजबूर हैं. यहाँ तक कि इनके घर तक भी आने-जाने का नहीं है कोई रास्ता.
गरीबों के मसीहा माने जाने वाले किराय मुसहर की चर्चा पूरे इलाके में उनकी ईमानदारी और सादगी को लेकर आज भी होती है. सभी जाति के लोगों को हमेशा साथ लेकर चलने वाले महादलित समुदाय के सांसद किराय मुसहर का घर आज भी झोपडीनुमा है और पहले भी झोपडी ही थी. एक अहम बात तो ये है कि आज तक इनके घर जाने का रास्ता तक नहीं है और ना ही घर में सरकारी शौचालय है. जबकि बी.पी.मंडल साहब के पैतृक गाँव मुरहो में कई बड़े-बड़े राजनेता पहुंचकर मंडल मसीहा के स्मृति पर पुष्प अर्पित किया करते हैं और सामाजिक न्याय की बड़ी-बड़ी बातें भी किया करते हैं. पर ये आज तक बगल में मौजूद किराय मुसहर के घर की कोई सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठा पाये हैं. चुनाव जितने के बाद मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव स्वर्गीय किराय मुसहर के घर जाकर परिजनों से मुलाक़ात जरुर की पर इनके परिजनों को अबतक कोई लाभ प्राप्त नहीं हो सका.
दूसरी तरफ स्वर्गीय किराय मुसहर के पुत्र और पुत्रवधू की व्यथा सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगें. पुत्र छठू ऋषिदेव और पुत्रवधू राजलक्ष्मी देवी की आँखों में बदहाली के आंसू दीखते है. घर में भले दो-वक्त की रोटी कासही से इंतजाम न हो, पर एक ईमानदार सांसद के परिवार में संस्कार भी कायम है जो जनता के पैसे से धनवान बन चुके राजनेताओं में भी कम ही देखने को मिलता है. किराय मुसहर की पुत्रवधू मधेपुरा टाइम्स के सदस्यों के लिए चावल भूनने लगती है और पुत्र छठू ऋषिदेव अपने पिता की ईमानदारी और सबके लिए सदन में आवाज उठाने की कहानी बयां करते हैं.
जब भी हम स्थानीय नेताओं और कथित बुद्धिजीवियों से पूर्व सांसद किराय मुसहर के परिजनों की बदहाली पर सवाल खड़ा करते हैं तो सिर्फ और सिर्फ उनकी ओर से खानापूरी करते इनकी बदहाली दूर करने का भरोसा मिलता है. एक तरफ जहाँ सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महादलितों के उत्थान की बात करते हैं वहीँ महादलित समुदाय के सांसद रह चुके किराय मुसहर के परिजन आज भी उपेक्षित हैं.
इस वीडिओ में देखें क्या है पूर्व सांसद के परिजनों की स्थिति, यहाँ क्लिक करें.
1952-53 में सांसद बने स्वर्गीय किराय मुसहर के घर को दशकों से आज तक सरकारी शौचालय भी नसीब नहीं हो सका है. परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे शौच करने को मजबूर हैं. यहाँ तक कि इनके घर तक भी आने-जाने का नहीं है कोई रास्ता.
गरीबों के मसीहा माने जाने वाले किराय मुसहर की चर्चा पूरे इलाके में उनकी ईमानदारी और सादगी को लेकर आज भी होती है. सभी जाति के लोगों को हमेशा साथ लेकर चलने वाले महादलित समुदाय के सांसद किराय मुसहर का घर आज भी झोपडीनुमा है और पहले भी झोपडी ही थी. एक अहम बात तो ये है कि आज तक इनके घर जाने का रास्ता तक नहीं है और ना ही घर में सरकारी शौचालय है. जबकि बी.पी.मंडल साहब के पैतृक गाँव मुरहो में कई बड़े-बड़े राजनेता पहुंचकर मंडल मसीहा के स्मृति पर पुष्प अर्पित किया करते हैं और सामाजिक न्याय की बड़ी-बड़ी बातें भी किया करते हैं. पर ये आज तक बगल में मौजूद किराय मुसहर के घर की कोई सुधि लेने की जहमत तक नहीं उठा पाये हैं. चुनाव जितने के बाद मधेपुरा के सांसद पप्पू यादव स्वर्गीय किराय मुसहर के घर जाकर परिजनों से मुलाक़ात जरुर की पर इनके परिजनों को अबतक कोई लाभ प्राप्त नहीं हो सका.
दूसरी तरफ स्वर्गीय किराय मुसहर के पुत्र और पुत्रवधू की व्यथा सुनकर आप भी हैरान हो जाएंगें. पुत्र छठू ऋषिदेव और पुत्रवधू राजलक्ष्मी देवी की आँखों में बदहाली के आंसू दीखते है. घर में भले दो-वक्त की रोटी कासही से इंतजाम न हो, पर एक ईमानदार सांसद के परिवार में संस्कार भी कायम है जो जनता के पैसे से धनवान बन चुके राजनेताओं में भी कम ही देखने को मिलता है. किराय मुसहर की पुत्रवधू मधेपुरा टाइम्स के सदस्यों के लिए चावल भूनने लगती है और पुत्र छठू ऋषिदेव अपने पिता की ईमानदारी और सबके लिए सदन में आवाज उठाने की कहानी बयां करते हैं.
जब भी हम स्थानीय नेताओं और कथित बुद्धिजीवियों से पूर्व सांसद किराय मुसहर के परिजनों की बदहाली पर सवाल खड़ा करते हैं तो सिर्फ और सिर्फ उनकी ओर से खानापूरी करते इनकी बदहाली दूर करने का भरोसा मिलता है. एक तरफ जहाँ सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महादलितों के उत्थान की बात करते हैं वहीँ महादलित समुदाय के सांसद रह चुके किराय मुसहर के परिजन आज भी उपेक्षित हैं.
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मधेपुरा के पूर्व सांसद के परिजन हैं दाने-दाने को मुंहताज
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
August 08, 2015
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शायद इसलिए हमारे आज के राजनेताओं ने अपने और अपने आने वाले वंशजो के लिए पूरी व्यवस्था कर रखी है।
ReplyDeleteऔर धन्य हैं हमारे वैसे राजनेता जो सबकुछ जानते हुए भी उन राजनेताओ के परिवार को कोई मदद नही करते। शायद वो ये बताना चाहते हैं की उनकी ईमानदारी का यही फल है।।