नि० सं०/16/11/2012
प्रखंड कार्यालय सिंघेश्वर से सटे पश्चिम सरकारी
पोखर पर अतिक्रमण कर अवैध रूप से घर बनाने के विरोध का मामला तूल पकड़ता जा रहा है.
तथाकथित वेश्याओं द्वारा अतिक्रमण के विरोध की अगुआई कर रहे छात्रनेता ब्रजेश सिंह
पर अतिक्रमण की एक आरोपी सहाबुन देवी द्वारा दर्ज कराये सिंघेश्वर थाना कांड
संख्यां 133/12 में डीएसपी मुख्यालय द्वारिका पाल द्वारा की गयी पर्यवेक्षण
टिप्पणी पर ब्रजेश सिंह समेत इस कांड के अन्य अभियुक्तों ने भी कड़ी आपत्ति प्रकट
करते हुए मामले में पुन: अनुसंधान की मांग की है.
बता
दें कि इस वाद में वादिनी सहाबुन देवी ने प्राथमिकी में दर्ज चारों अभियुक्त
ब्रजेश सिंह, बबुआ मुखिया, लक्ष्मण मुखिया तथा पप्पू मुखिया पर आरोप लगाया है कि ब्रजेश
सिंह अंचल कार्यालय के दलाल के रूप में प्रति मकान 15 हजार रूपये की मांग की थी.
उनलोगों ने दस हजार रूपये की दर से ब्रजेश सिंह को दिए भी पर ब्रजेश सिंह ने अंचल
कार्यालय से मिलकर सरकारी जमीन पर कब्ज़ा हटाने से सम्बंधित नोटिश निर्गत करा दिया
तथा अन्य अभियुक्तों के साथ मिलकर उनलोगों को तंग तबाह करने लगे.
अनुसंधान
के क्रम में डीएसपी ने इस कांड में चारों प्राथमिकी के अभियुक्तों के अलावे चार
अन्य अप्राथमिकी अभियुक्त दशरथ मुखिया, अर्जुन मुखिया, आलोक मुखिया तथा मनोज
मुखिया के भी विरूद्ध 341/448/323/379/384/504/506/34 भादवि एवं 3(1)(X) अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के
तहत मामले को सत्य करार दिया. साथ ही डीएसपी ने अपने अनुसंधान में अंचलाधिकारी
सिंघेश्वर की ओर अंगुली उठाते हुए लिखा कि सम्बंधित जमीन से अवैध कब्ज़ा हटाने के
लिए निर्गत लिए गए नोटिश ईर्ष्या, द्वेष एवं बदले की भावना से ग्रसित होकर अवैध
पैसों की वसूली के लिए निर्गत किये गए प्रतीत होते हैं.उन्होंने अनुसंधान में इस
बात पर सवाल उठाये हैं कि पोखरा पर जब 70-80 घर बनाये गए हैं तो फिर तीन को ही
नोटिश किस परिस्थिति में किये गए और नोटिश के क्रियान्वयन का भार ब्रजेश सिंह व अन्य
पर क्यों डाला गया है? अपने पर्यवेक्षण में डीएसपी ने अनुसंधानकर्ता को सभी
अभियुक्तों को अविलम्ब गिरफ्तार करने का भी निर्देश दिया है.
डीएसपी
के अनुसंधान पर आपत्ति प्रकट करते हुए छात्रनेता ब्रजेश सिंह कहते हैं कि अनुसंधान
की सारी बातें गलत हैं और उनके विरूद्ध लगाये आरोप साजिस का हिस्सा हैं. ब्रजेश
सिंह कहते हैं कि मामले को सिंघेश्वर के पोखरा पर चल रहे वेश्यावृत्ति को रोकने के
उनलोगों के अभियान को दबाने के लिए गलत रंग दिया जा रहा है. उन्होंने यह भी आरोप
लगाया कि डीएसपी ने उन्हें अतिक्रमण हटाने के आंदोलन को छोड़ने का प्रलोभन देते हुए
कहा था कि तब इस केस को फॉल्स कर देंगे. उनलोगों ने एसपी को आवेदन देकर कांड का
फिर से सही ढंग से अनुसंधान करवाने की मांग की है.
कथित वेश्यावृत्ति के खिलाफ आंदोलन महंगा पड़ा
Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
November 16, 2012
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