आपके जूते बाहर,मेरे रहेंगे अंदर: सामंतवादी सोच के अधिकारी

 रूद्र ना० यादव/19 अगस्त 2012
जिला समाहरणालय के एक कार्यालय में यदि आप घुसते हैं तो आपको मध्ययुगीन सामंतवाद की बू नजर आ जायेगी.आपको एक बार ये लग सकता है कि आप निरीह जनता हैं और इसमें बैठे अधिकारी राजा. जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अवस्थित जिला उद्योग केन्द्र के कार्यालय में आपके घुसने के अजीब नियम बनाये गए हैं.इस सरकारी कार्यालय में आम लोगों को चप्पल-जूते पहन कर घुसने नहीं दिया जाता है,जबकि इस कार्यालय के अधिकारी और कर्मचारी धड़ल्ले से जूता-चप्पल पहन कर इसमें घुसते हैं और काम करते हैं.यहाँ आम लोगों से जूते-चप्पल बाहर ही खुलवा लिए जाते हैं.
   मीडिया ने जब इस मुद्दे पर इसके अधिकारी को घेरा तो इनका तर्क भी इनके आदेश की माफिक अजीबोगरीब थे.जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक संजय कुमार वर्मा का कहना था कि लोग इस कार्यालय में फिसल कर गिर सकते हैं इसलिए इनसे जूता चप्पल बाहर ही खुलवा लिया जाता है.
  पर अधिकारी के इस आदेश से लोगों में खासी नाराजगी देखी जा रही है.शिक्षित बेरोजगार अशोक कामती कहते हैं कि यहाँ की व्यवस्था से लगता है कि हम अभी भी राजतंत्र में ही जी रहे हैं.वैसे भी जिले के अधिकाँश पदाधिकारी अपने को सरकारी सेवक नहीं किंग समझते हैं.वहीं वहाँ मौजूद बेरोजगार मुसफीक आलम पूछते हैं कि ये पदाधिकारी-कर्मचारी खुद फिसल कर नहीं गिरते हैं और आम लोग यहाँ गिर जायेंगे? क्या इनके कहने का मतलब ये है कि ये टाइल्स वाले घरों में रहते हैं, और तुमलोग टाट वाले घर में. ये आमलोगों को नीचा दिखाने जैसा है जो सुशासन में पदाधिकारियों को शोभा नहीं देता है.

2 टिप्पणी:

SUBRAT GAUTAM ने कहा…

सरकारी नौकरी=बाप का राज

बेनामी ने कहा…

ye officer sanki lagta hai...safai ko leke ek tarah se maniac hai...

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