08 जुलाई 2017

Interview: वर्ल्ड में टॉप होकर बिहारी प्रतिभा विपुल ने दिखाया अमेरिका में अपना जलवा

एक बात तो तय है कि दुनियां के हर क्षेत्र में भारतीय अपना जलवा दिखा रहे हैं और इन भारतीय प्रतिभाओं में बिहारी प्रतिभाओं की कामयाबी भी कहीं से कम नहीं. यहाँ भी 'एक बिहारी सब पर भारी' की बात चरितार्थ हो रही है.

एयरोस्पेस से सम्बंधित नासा से जुड़ी इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भारत की टीम को दुनियां भर में पहला स्थान मिला तो देश भर की मीडिया में University of Petroleum and Energy Studies (UPES), देहरादून की टीम एस्ट्रलसुर्ख़ियों में आ गई.

पर बहुत कम लोग इस बात को जानते होंगे कि अमेरिका में भारत की जीत के पीछे जो सबसे अहम शख्स है वो इसी कोसी की धरती का है. NASA (National Aeronautics and Space Administration) से सम्बंधित इस प्रतियोगिता में देश को पहला स्थान दिलाने वाले टीम एस्ट्रल के टीम लीडर और देहरादून से Aerospace में B.Tech के थर्ड ईयर के छात्र विपुल मणि मधेपुरा नगर परिषद् क्षेत्र के वार्ड नं. 18 के रहने वाले हैं.  पटना के सेन्ट्रल स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत पिता ब्रजेश सिंह के बड़े पुत्र और बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा के मालिक विपुल मणि University of Petroleum and Energy Studies (UPES), देहरादून से बी. टेक कर रहे हैं और दोस्तों के साथ शिक्षकों के बीच भी इनकी छवि रीयल हीरो की तरह है.

मधेपुरा टाइम्स स्टूडियो में देश का नाम दुनियां भर में रोशन करने वाले विपुल मणि से हमने इस प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से जानना चाहा. विपुल ने बताया कि इस सफलता का सबसे पहला श्रेय पूरी टीम को ही जाता है क्योंकि डिटर्मिनेशन और हार्ड लेबर के साथ एक दूसरे का पूरी तरह सहयोग करने से ही किसी भी बड़ी प्रतियोगिता में सफलता अर्जित की जा सकती है. नासा से जुड़ी एरोस्पेस से सम्बंधित Cansat की इस प्रतियोगिता के पांच फेजों के बारे में भी विपुल विस्तार से बताते कहते हैं कि दुनियां भर की सैंकड़ों टीमें इसमें हिस्सा लेती है पर अगले स्टेज में दुनियां की सिर्फ 40 टीमें ही चुनी जाती है और अंतिम तीन स्टेज में कठिन प्रतियोगिता अमेरिका में ही होती है.

कोसी के छात्र-छात्रा कैसे किसी भी क्षेत्र में सफलता अर्जित करें, इस प्रश्न पर विपुल मणि कहते हैं कि कोई भी काम करें, उसे एक्सट्रीम तक ले जाने का प्रयास करें. पहले छात्र अपना लक्ष्य निर्धारित करे. अपनी रुचि के अनुसार ही लक्ष्य का निर्धारण करें फिर उसपर अपनी क्षमता का शत प्रतिशत उस पर देना होगा. कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं है. सफलता आपके कदम चूमेगी.

विपुल मणि का पूरा इंटरव्यू सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें.
(वि. सं.)

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