मधेपुरा के डीएम की ओर से डॉ. विजय कुमार के विरुद्ध विभाग की ओर से भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग से संबंधित साक्ष्य उपलब्ध कराए गए थे। निजी नर्सिंग होम की जांच और लाइसेंस के नाम पर अवैध राशि के लेन-देन से संबंधित वायरल वीडियो की भी जांच कराई गई। इसके बाद मामले में कार्रवाई की गई।डीएम ने जांच के लिए जिला भू-अर्जन पदाधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच टीम बनाई थी। रिपोर्ट में डॉ. विजय कुमार का आचरण भ्रष्ट आचरण की श्रेणी में पाए जाने की बात कही गई है। विभाग ने इसे बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के प्रावधानों का उल्लंघन माना है। अधिसूचना में कहा गया है कि सत्यम इमरजेंसी हॉस्पिटल को पूर्व में सील करने का निर्देश दिया गया था। आरोप है कि निर्धारित निर्देश से अलग जाकर गलत मंशा से अस्पताल की सील खोलने का आदेश दिया गया। अस्पताल को दोबारा खुलवाने के लिए राशि लेने का आरोप भी जांच के दौरान सामने आया। दरअसल सत्यम इमरजेंसी हॉस्पिटल में एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद रुपए के लिए परिजनों को बंधक बना लिया गया था। मामला डीएम के संज्ञान में आने के बाद अस्पताल को सील करने का निर्देश दिया गया था।
स्वास्थ्य विभाग ने उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर डॉ. विजय कुमार को निलंबित किया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, बिहार, पटना निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। करीब एक महीने पहले सिविल सर्जन डॉ. विजय कुमार का कथित तौर पर नगद रुपये लेते हुए वीडियो वायरल हुआ था। इसके बाद मधेपुरा डीएम ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी, जिसके बाद रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को भेजी गई। करीब एक महीने तक कार्रवाई नहीं होने पर युवाओं ने चार दिन पहले अस्पताल परिसर में प्रदर्शन भी किया था। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि डॉ. विजय कुमार के विरुद्ध आरोपों की विस्तृत जांच के लिए अलग से विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी।
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Reviewed by मधेपुरा टाइम्स
on
September 18, 2026
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