30 जनवरी 2017

उपेक्षा का दंश झेल रहा सहरसा का कन्या विद्यालय, बेटियों की शिक्षा से बेपरवाह अधिकारी

कभी सहरसा का गौरव रहा जिला मुख्यालय स्थित राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय इन दिनों उद्धारक के बाट जोह रहा है और हालात ये हैं कि जहाँ बेटियों की पढ़ाई मुश्किल में है वहीँ अधिकारी बेपरवाह दिख रहे हैं.

     राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में भवन से लेकर यहां की शिक्षा व्यवस्था खंडहर का रूप धारण कर रहा है जो सहरसा के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के खोखले दावों का गवाह बनकर कर रह गया है. विद्यालय का भवन जहां पूरी तरह जर्जर हो गया है वहीं चहारदीवारी नहीं रहने से या अन्य व्यवस्था भी बिगड़ जाने से कहते हैं विद्यालय परिसर यह असामाजिक तत्वों का चारागाह भी बनता जा रहा है और यहां छात्राओं की सुरक्षा दांव पर है. 
     ऐसा नहीं है कि विद्यालय प्रशासन ने विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए प्रयास नहीं किया है, पर सारे प्रयास व्यर्थ साबित हुए. राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय सहरसा की प्राचार्या उषा कुमारी जानकारी देती है कि 21 जुलाई 2016 को भी उन्होंने विद्यालय की जर्जर स्थिति जिला शिक्षा पदाधिकारी और यहां तक कि माननीय शिक्षा मंत्री बिहार को अपने कार्यालय के पत्रांक 137 के द्वारा दी पर सब कुछ शून्य साबित हुआ.
   प्राचार्या ने अपने पत्र में स्कूल के भवन, खिड़की, दरवाजे आदि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त होने की  बात कही थी और प्रत्येक क्लास का फिर से विद्युतीकरण की आवश्यकता भी जताई थी. उन्होंने सरकार को लिखा था कि विद्यालय के चारों तरफ की चहारदीवारी जो विद्यालय निर्माण के समय में ही बनी थी उसकी ऊंचाई काफी कम थी और क्षतिग्रस्त हो चुका है. इस वजह से विद्यालय में असामाजिक तत्वों का आना जाना लगा रहता है. ऊँची चहारदीवारी का अविलम्ब बनना छात्राओं की सुरक्षा की दृष्टि से अति आवश्यक है. विद्यालय में शौचालय पूर्व से निर्मित है जो पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है. यहां तक कि शुद्ध पेयजल की व्यवस्था की भी कमी है जिसके कारण सहरसा की बेटियों को काफ़ी कठिनाइयों के दौर से गुजरना पड़ता है.
     पर समस्या इतने पर भी ख़त्म नहीं होती. कुछ वर्ष पूर्व कल्याण विभाग के विशेष अनुरोध पर कुछ समय के लिए विद्यालय का कुछ भाग पिछड़ा वर्ग आवासीय विद्यालय के लिए दिया गया था जो अब तक खाली नहीं होने से विद्यालय की समस्या और भी बढ़ गई है. क्योंकि वर्तमान में छात्राओं की संख्या के अनुसार अतिरिक्त वर्ग कक्ष की आवश्यकता है. विद्यालय में नामांकित छात्राओं के अनुसार बेंच-डेस्क की भी काफी कमी है और यहां कम से कम 300 जोड़ी बेंच-डेस्क की आवश्यकता है. प्रयोगशाला और उससे संबंधित सामग्री भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त है.
     जाहिर है, इतनी समस्याओं के रहते विद्यालय का पठन-पाठन भगवान भरोसे ही दीखता है. अधिकारियों की नींद अब तक इस विद्यालय के जीर्णोद्धार के लिए नहीं खुल रही है और जनप्रतिनिधियों को निजी कार्यक्रमों में फीता काटने और भाषणबाजी से शायद फुर्सत नहीं है. जाहिर है विकास के मामले में और खासकर में बेटियों की पढ़ाई के मामले में सहरसा इन कारणों से भी पीछे जा रहा है.

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