18 मार्च 2018

ऐसे त्यागी पुरूष के जीवन से लें प्रेरणा: मनाई गई मधेपुरा में कृति नारायण मंडल की जयंती

एक विद्यालय खुलता है, तो कई जेलखाना एवं पागलखाना बंद होता है। अतः समाज एवं राष्ट्र के लिए शिक्षण संस्थानों की महती भूमिका है। जाहिर है कि कई शिक्षण संस्थानों के संस्थापक कृति नारायण मंडल के योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।


उक्त बातें बीएनएमभी महाविद्यालय के पूर्व प्रधानाचार्य डॉ. श्यामल किशोर यादव ने कही। वे रविवार को ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय के राजकीय अंबेडकर कल्याण छात्रावास में आयोजित कृति नारायण मंडल जयंती समारोह के उद्घाटनकर्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम का आयोजन शिव राजेश्वरी युवा सृजन क्लब और नेताजी सुभाषचंद्र बोस विचार मंच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।

डॉ. श्यामल ने कहा कि कृति बाबू ने ठाकुर प्रसाद महाविद्यालय, मधेपुरा और पार्वती साइंस कालेज, मधेपुरा जैसे कई महत्वपूर्ण शिक्षण संस्थानों की स्थापना की। इससे कोसी क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए बीएनएमयू के सीनेट एवं सिंडीकेट सदस्य सह छात्रावास अधिकक्षक डाॅ. जवाहर पासवान ने कहा कि कृति बाबू ने समाज एवं राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व दान कर दिया। आज उनके बेटे को रहने का अपना घर भी नहीं है। ऐसे त्यागी पुरूष के जीवन से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। यदि हम कृति बाबू के गुणों का अंशमात्र भी अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन सार्थक हो जाएगा।

वरिष्ठ साहित्यकार एवं स्नातकोत्तर हिन्दी विभाग के शिक्षक डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप ने कहा कि आज शिक्षा का व्यापारीकरण हो रहा है। इससे कृति बाबू जैसे मनीषियों की आत्मा आहत हो रही है। अतः कृति बाबू के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही है कि हम उनके द्वारा स्थापित संस्थानों की गरिमा को बनाये रखें। उनकी कृतियों को आगे बढ़ाएं। क्योंकि मनुष्य अपनी कृतियों के जरिए ही जीवित रहता है।

विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. सुधांशु शेखर ने कहा कि हमारा यह परम कर्तव्य है कि हम अपने स्थानीय पूर्वजों को याद करें। वैश्विक एवं राष्ट्रीय नेताओं को याद करने से पहले अपने परिवार एवं समाज के पुरखों को याद करना आवश्यक है।

संचालन करते हुए शिव राजेश्वरी युवा सृजन क्लब के प्रमंडलीय महासचिव हर्ष वर्द्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि कृति बाबू शिक्षा जगत के विश्वकर्मा थे। उन्होंने समाज को जो दिया, वह सदैव अंधेरों के बीच रौशनी का काम करता रहेगा। उनका कृतित्व सदैव समाज के आइने में अमर रहेगा।

इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत कृति बाबू की प्रतिमा पर पुष्पाजलि अर्पित कर की गयी। साथ ही वक्ताओं ने टाटा आयरण हाॅस्टल के नाम के आगे कृति नारायण मंडल का नाम जोड़ने एवं उस हाॅस्टल के परिसर में कृति बाबू की प्रतिमा लगाने की माँग की। साथ ही कृति बाबू के व्यक्तित्व एवं कृतित्व से संबंधित एक पुस्तक प्रकाशित करने का निर्णय लिया गया।
इस अवसर पर प्रभात कुमार मिस्टर, सारंग तनय, निशांत यादव, संजीव कुमार, मोहन पासवान, सिनोद, अर्जुन पासवान, सन्नी, सोरेन, विकास, दीपक, संतोष, सत्यम, ललटू, मनोज, विनोद, गौतम, विपीन, चंदन, सुनील, विवेक, पारस, मुकेश, अनिल, मिथुन, सनोज, दिनेश आदि उपस्थित थे।
(ए. सं.)

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