23 जनवरी 2018

BNMU : विद्वत परिषद् की बैठक सम्पन्न, लिए गए कई महत्वपूर्ण निर्णय

बी. एन. मंडल विश्वविद्यालय की विद्वत परिषद् की बैठक मंगलवार को कुलपति डॉ. अवध किशोर राय की अध्यक्षता में संपन्न हुई। 

बैठक में पी-एच. डी. अधिनियम 2016 अनुमोदित किया गया। आगे इसके आलोक में पी-एच. डी. का कार्य होगा।

इसके अलावा पी-एच. डी. धारक आवेदकों द्वारा प्राप्त आवेदन (पांच बिंदुओं पर आधारित प्रमाण -पत्र) ओएसडी (यूनिवर्सिटी) राजभवन, बिहार द्वारा प्रेषित पत्रांक-बीएसयू (स्टेच्यूट)-20/2014-83/जीएस (आई) दिनांक-16 जनवरी 2017 पर विचार किया गया। इस पत्र में निर्देशित मापदंडों को पूरा करने वाले विद्यार्थियों को पी-एच. डी. संशोधित अधिनियम 2016 का प्रमाण-पत्र जारी करने पर विचार किया गया। इसके लिए विद्यार्थियों को सभी आवश्यक कागजातों के साथ संबंधित विभागाध्यक्षों के पास आवेदन करना होगा। 

विद्वत परिषद् ने दो वर्षीय बी. पी. एड. के कॉमन ऑर्डिनेंस एवं रेगुलेशन को अनुमोदित किया। आगे दो वर्षीय बी. पी. एड. पाठ्यक्रम की शुरुआत करने का प्रयास किया जाएगा।

विद्वत परिषद् में कई नए विभाग शुरू करने की दिशा में आवश्यक निर्णय लिए गये। स्नातकोत्तर स्तर पर  गणित, संगीत एवं संस्कृत विभाग  खोलने का प्रयास किया जाएगा। एमसीए, एमबीए एवं एम. एड. की पढ़ाई शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। एमसीए एवं एमबीए का पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है। एम. लिस् के पाठ्यक्रम को स्वीकृति हेतु राजभवन भेजा गया है।
बैठक में यह निर्णय भी लिया गया कि आगे जिन स्नातकोत्तर विभागों में विद्यार्थियों की संख्या कम रहेगी, उनमें स्नातक ( प्रतिष्ठा) के अलावा सब सिडियरी के विषयों के आधार पर भी नामांकन हो सकेगा। साथ ही एलायड विषयों के विद्यार्थियों को भी नामांकन का मौका मिलेगा। एलायड विषयों के संबंध में आवश्यक निर्णय संकायाध्यक्ष की कमिटी करेगी। कमिटी में विज्ञान, सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी के संकायाध्यक्ष के नाम शामिल किए गए हैं।

राजभवन के निर्देशों के आलोक में अगले सत्र से स्नातक स्तर पर सीबीसीएस कोर्स लागू करना है। इसके लिए अलग-अलग विश्वविद्यालय को अलग-अलग विषयों का पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी दी गयी है। बीएनएमयू को सीबीसीएस कोर्स के अंतर्गत बायोटेक्नोलॉजी एवं इंडस्ट्रीयल माइक्रोबायोलोजी का पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी मिली है। इसे ससमय पूरा किया जाएगा।

 विद्वत परिषद् ने सभी प्रधानाचार्यों एवं स्नातकोत्तर विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि  परीक्षा फार्म जमा करते समय पंजीयन की जांच कर लें। परीक्षा फार्म भरने के पूर्व सी. आई. ए. की परीक्षा ले लें और उसका अंक सूचना पट पर डिस्प्ले करें। इच्छुक विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं भी डिस्प्ले की जाएं। कोई भी विद्यार्थी अपनी परीक्षा का प्रवेश-पत्र सीधे विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग से नहीं ले सकेंगे। प्रवेश-पत्र संबंधित कालेजों एवं विभागों से ही मिलेगा।
विद्वत परिषद् ने कदाचार मुक्त परीक्षा संचालन पर जोर दिया। सभी केंद्राधीक्षकों को यह निर्देश दिया गया कि वे परीक्षा में अनुपस्थित अथवा कदाचार में पकड़े गए विद्यार्थियों की सूचना अविलंब विश्वविद्यालय को दें।

 बैठक में सामाजिक विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ. शिवमुनी प्रसाद यादव, विज्ञान संकायाध्यक्ष डॉ. रंजीत, वाणिज्य संकायाध्यक्ष डॉ. एस. एन. विश्वास, मानविकी संकायाध्यक्ष डॉ. ज्ञानंजय द्विवेदी, शिक्षा संकायाध्यक्ष राणा जयराम सिंह, कुलसचिव डॉ. नरेन्द्र श्रीवास्तव, उप कुलसचिव (शैक्षणिक) डाॅ. एम. आई. रहमान,परीक्षा नियंत्रक डॉ. नवीन कुमार, डॉ. के. एस. ओझा, डाॅ. अरूण कुमार मिश्र, डॉ. राजीव सिन्हा, डॉ. आर. के. पी. रमण, डॉ. एच. एल. एस. जौहरी, डाॅ. सी. के. यादव, डाॅ. मीरा कुमारी, डॉ. प्रज्ञा प्रसाद, डाॅ. रीता आदि उपस्थित थे।

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