03 दिसंबर 2017

‘ऊपर से फिट-फाट’: प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय में बदहाल छात्रावास

वर्ष 1949 में मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर प्रखंड के मनहरा सुखासन में स्थापित प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय भले ही बिहार सरकार की महती इच्छाशक्ति के परिणाम स्वरूप हो, पर इसके छात्रावास के आलीशान भवन विभागीय उदासीनता के शिकार हो रहे हैं.


बिहार शैक्षणिक आधारभूत संरचना विकास निगम के सौजन्य से करोड़ों का आलीशान प्रशासनिक भवन कार्यालय एवं प्रशिक्षण कक्ष सहित 108 कमरे का पुरूष तथा महिला छात्रावास बन तो गया है, लेकिन अभी भी विभागीय उदासीनता के परिणाम स्वरूप महाविद्यालय के प्रशिक्षु मूलभूत सुविधाओं एवं आवश्यकताओं की पूर्ति से वंचित है, जो बहुत ही चिंताजनक है । विडंबना यह है कि छात्रावास बन जाने के बावजूद इसी सुखासन में आस पास महिला प्रशिक्षु निवास रखने के लिए विवश हैं। लेकिन महाविद्यालय प्रशासन इस बात से पूर्णतः अनभिज्ञ बना हुआ है । प्रशासनिक भवन में ना तो पेयजल की व्यवस्था है, ना ही प्रशिक्षुओं के बैठने के लिए उपस्कर की ही व्यवस्था है ।

मालूम हो कि महाविद्यालय में किशनगंज, अररिया, पूर्णियां, खगड़िया, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, भागलपुर आदि के प्रशिक्षु नामांकित है । महिला प्रशिक्षु छात्रावास में चहारदीवारी नहीं रहने के कारण छात्रावास में निवास रखने में असुरक्षित महसूस करती हैं । आखिर इसकी वजह क्या है जो प्राचार्य महोदय उपस्कर और बिजली का बहाना बनाते हैं । महाविद्यालय का छात्रावास परिसर चारागाह में तब्दील हो रहा है । अधिकारी कब समझेंगे स्वहित से जनहित उपर है ।

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