15 दिसंबर 2017

Exclusive: बीएनएमयू के पूर्व वीसी डॉ. बिनोद कुमार समेत पांच अधिकारियों पर FIR दर्ज

स्थापना काल से ही विवादों से चोली-दामन का रिश्ता रखे भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय एक बार फिर से पुराने घटनाक्रम को लेकर सुर्ख़ियों में है.

मधेपुरा के पूर्व कुलपति डॉ. बिनोद कुमार समेत विश्वविद्यालय के पांच अधिकारियों पर मधेपुरा थाने में धोखाधड़ी तथा चोरी (420 तथा 379 IPC) समेत अन्य धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज किया गया है.

मामला वर्ष 2000 से  वर्ष  2015 से जुड़ा है और पूर्व 1. कुलपति विनोद कुमार के अलावे जिन तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है उनके नाम हैं, 2. कुमारेश प्रसाद सिंह, रजिस्ट्रार, भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा 3. हरेन्द्र प्रसाद सिंह, फिनान्स ऑफिसर, भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा 4. विजय कुमार, विश्वविद्यालय अभियंता, भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा तथा 5. कमल प्रसाद यादव, कनीय अभियंता, भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा.

मधेपुरा थाना में इन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर संवेदक आलोक कुमार के द्वारा मधेपुरा कोर्ट में दर्ज परिवाद संख्यां 903/2015 के आधार पर न्यायालय के आदेश से भारतीय दंड संहिता की धारा 119, 166, 379, 403, 409, 420, 477, 504 तथा 506 के तहत दर्ज किया गया है. मामले में संवेदक आलोक कुमार का कहना है कि वे एक सरकारी संवेदक हैं और भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय, मधेपुरा में ठेका पर मकान निर्माण कार्य, मरम्मति आदि का कार्य विश्वविद्यालय के आदेशानुसार करते रहे हैं. वर्ष 1999-2000 में उन्होंने कई कार्य उक्त अधिकारियों के निर्देश पर समय से किया था, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर स्थित वनस्पति विज्ञान तथा जंतु विज्ञान के प्रयोगशाळा भवन तथा महिला छात्रावास के आगंतुकों के लिए शेड निर्माण कार्य शामिल थे. विश्वविद्यालय के द्वारा प्रयोगशाला भवन के लिए प्राक्कलित राशि ₹ 3,60,000/- में से शेष राशि ₹ 1,95,000/-तथा महिला छात्रावास के शेड के लिए प्राक्कलित राशि ₹ 36,360/ में से ₹ 12,360/- का भुगतान उन्हें बार-बार अनुरोध के बाद भी नहीं किया गया और जांच के नाम पर विश्वविद्यालय भुगतान टालते रहा. आरोप यह भी लगाया गया कि इसके अलावे उक्त कार्य कराने के दौरान परिवादी का स्थल पर ₹ 44,500/-का सामान भी रह गया जिसे अधिकारियों ने जांच के नाम पर उठाने नहीं दिया और बाद में उनलोगों ने ही उठवा लिया तथा परिवादी के विरोध करने पर उन्हें धमकी देने के साथ उनके साथ असंसदीय व्यवहार किया.

संवेदक अलोक कुमार ने न्यायालय से न्याय की गुहार लगाते हुए कहा था कि सभी अभियुक्तगण एक दूसरे के मेल तथा साजिस में उनके देय राशि का अमानत में खयानत किया है तथा सूचना के अधिकार के तहत उन्हें सूचना नहीं दी गई और साथ ही उनका सामन भी उठवा लिया जो कानूनन अपराध है और वे दंड के भागी हैं.

मधेपुरा न्यायालय के आदेश पर मामले में एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान आरम्भ कर दिया गया है. मामले में दूसरे पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है.
(वि. सं.)

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