05 दिसंबर 2017

जिले में 56 % महिलाओं का होता है बाल विवाह, नियंत्रण के लिये चाहिये समवेत प्रयास


मधेपुरा जिले के ये आंकड़ें चौंकाने वाले हैं कि जिले में 56 प्रतिशत महिलाओं  का निर्धारित समय से पूर्व यानि बाल विवाह होता है । जिले की 15 से 21आयु वर्ग की 78 % महिलायें माँ बन चुकी होती है ।

जिले की 78% महिलायें घरेलू काम के अलावे कोई आय अर्जक कार्य नही करती है । यहाँ की 14% बच्चियां ही दसवीं तक पढ़ पाती है शेष 86% घर बैठ जा रही है ।

उपरोक्त कई तथ्यों का खुलासा यहाँ आई यूनाइटेड नेशन की जनसंख्यां  प्रकोष्ठ के बिहार चीफ नदीम नूर ने बाल विवाह नियंत्रण के सरकारी अभियान समिति के अधिकारियों कॊ सम्बोधित करते हुए किया । 

जिलाधिकारी मु सोहैल के आग्रह पर बाल विवाह और दहेज प्रथा मुक्ति अभियान की शुरुआत करने आई युनाइटेड नेशन की इस टीम ने आंकड़ों के माध्यम से यह बताया कि बाल विवाह नियंत्रण के लिये महिलाओं में शिक्षा और जागरूकता के साथ उन्हें रोजगार परक शिक्षा और प्रशिक्षण देने की  भी ज़रूरत है । उन्होंने बताया कि  बाल विवाह समस्या नही समस्या का परिणाम है और इसके लिये जागरूक समाज कॊ साथ लेकर समाज कॊ भी महिलाओं के प्रति अपना नज़रिया बदलने की ज़रूरत है । महिलाओं शैक्षिक रुप से सबल करने की  ज़रूरत है । महिलाओं कॊ कार्यशील बनाने के लिये उन्हें कौशल युक्त शिक्षा और प्रशिक्षण की अधिक ज़रूरत है ।

प्रखंडों की है बुरी स्थिति: उन्होने बताया कि  मधेपुरा प्रखंड के कुछ प्रखंडों की इस मामले में बड़ी ही बदतर स्थिति है । आलम नगर प्रखंड की सिर्फ आठ और सिंहेश्वर में 9 % प्रतिशत महिलायें कोई रोजगार कर रही है जबकि जिले की 22% महिलायें रोज़गारित हैं । लेकिन ग्वालपाड़ा की 16%महिलायें रोजगार प्राप्त कर चुकी हैं । बाल विवाह का प्रचलन गरीब और अशिक्षित समाज में अधिक है और जो प्रखंड जितना पिछ्डा है वहाँ बाल विवाह का प्रचलन अधिक है ।

कई समस्याओं का है मकड़जाल: डॉ नदीम नूर ने कहा कि अभी भी महिलायें कई मकड़जाल में फँसी हुई है । उच्च विद्यालय दूर होने के कारण चाहकर भी उनका जाना मुश्किल होता है । सामाजिक कुरीतियों के कारण उनका समय पूर्व विवाह कर दिया जाता है । फ़िर बच्चे हो जाते हैं । गरीबी के कारण ये अन्य कई समस्यायों में उलझती ही चली जाती हैं । इससे निवृत होने के लिये बाल विवाह से मुक्ति पाना आवश्यक है । उन्हे शिक्षित कर रोजगार मुखी प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराने का प्रयास आवश्यक है । इस जिले में महिलाओं कॊ कम्प्यूटर, नर्सिंग आदि प्रशिक्षण की असीमित सम्भावनाएँ हैं ।

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