28 नवंबर 2017

मेहनत रंग लाई: मधेपुरा के पार्वती साइंस कॉलेज कॊ मिली नैक से मान्यता

भूपेन्द्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय के तहत अँगीभूत पार्वती साइंस कॉलेज कॊ नैक टीम ने निरीक्षण के बाद बी ग्रेड में मान्यता प्रदान की है । 


यह जानकारी देते हुए प्रधानाचार्य डॉ राजीव कुमार ने बताया कि इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिये कुलपति डॉ ए के राय और प्रति कुलपति डॉ फारूख अली बधाई के पात्र हैं जिनके सहयोग और प्रेरणा से हमने महाविद्यालय परिवार के साथ मिलकर इस लक्ष्य कॊ प्राप्त किया ।

नैक की  पीयर टीम ने इस कालेज का निरीक्षण गत 13 एवम 14 अक्टूबर कॊ किया था । गत 27 अक्टूबर कॊ नैक की स्टीयरिन्ग कमिटी की बंगलोर में हुई बैठक में पार्वती साइंस कॉलेज कॊ बी ग्रेड की सूची में रख कर मान्यता दी गयी ।

क्या होता है नैक से मूल्यांकन ?: 2013 में स्थापित राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान द्वारा ही अब उच्चतर शिक्षा की विभिन्न विकास परक परियोजनाओं की समीक्षा कर उसे उपयुक्त घोषित करने के बाद ही वित्त आवंटन करती है । कॉलेज के विकास के लिये जो राशि विमुक्त की जाती है उसमें 65% केन्द्र सरकार और 35% राज्य सरकार का अंश होता है । अब नैक से मान्यता मिलने के बाद ही कॉलेजों कॊ विकास राशि देने योग्य माना जाता है । नैक की टीम निरीक्षण कर अनुशंसा करती है कि इस कालेज में अमुक कमी है जिसे दूर किया जाना आवश्यक है । निरीक्षण के बाद नैक की टीम की अनुशंसा पर कालेज कॊ सात श्रेणियों में से किसी भी श्रेणी की मान्यता दी जा सकती है । जिस कालेज का सारा कुछ बेहतरीन पाया जाता है उसे क्रमवार ए डबल प्लस, ए सिंगल प्लस और ए ग्रेड दिया जाता है । लेकिन जब कॉलेज बेहतरीन ही है तो उसे आर्थिक मदद में प्राथमिकता नही मिल पाती । लेकिन फ़िर बी डबल प्लस, बी सिंगल प्लस और बी तथा अंतत: ए ग्रेड मिलने से वित्त पोषण का मार्ग प्रशस्त होता है ।
नैक टीम के मूल्यांकन के क्या हैं आधार: नैक टीम अपने निरीक्षण के दौरान पाठ्यक्रम केरीकुलम के लिये डेढ़ सौ, शिक्षण, अभिगम और मूल्यांकन के लिये तीन सौ, शोध के लिये डेढ़ सौ, आधार भूत संरचना के लिये डेढ़ सौ, शिक्षण प्रविधि के लिये एक सौ, स्पोर्ट्स के लिये एक सौ, नेतृत्व क्षमता और बेहतर व्यवस्था के लिये एक सौ और नव सृजन के लिये एक सौ अंको की तराजू पर तौलती है ।

बहरहाल इस मान्यता के बाद कालेज कॊ पाँच करोड़ रू तक की योजनाओं के लिये वित्तीय मदद रूसा (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान ) द्वारा मिल सकती है । लिहाजा कालेज के चपरासी से लेकर प्रधानाचार्य तक प्रसन्न हैं कि मेहनत रंग लाई ।

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