26 नवंबर 2017

धरती पर के नहीं, ऊपर के भगवान भरोसे मधेपुरा में चिकित्सा व्यवस्था

मधेपुरा जिले के शंकरपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सहित पूरे प्रखंड क्षेत्र के प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र में डॉक्टर की भारी कमी प्रखंड क्षेत्र की बीमार चिकित्सा व्यवस्था का कारण बन गई है. 

प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र की चिकित्सा व्यवस्था मात्र आधे दर्जन चिकित्सकों के भरोसे चल रही है. डॉक्टर की भारी कमी के कारण चिकित्सा व्यवस्था को संचालित करने में जब प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर बड़ी ही मुश्किल हो रही है तो प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र कैसे चलेगा? प्रखंड क्षेत्र में चिकित्सा व्यवस्था सुधारने के लिए प्राथमिक स्वास्थ केन्द्र के अलावा चार उप स्वास्थ्य केन्द्र, मौरा कवियाही पंचायत के मौरा रामनगर, मौरा झरकाहा पंचायत के चौराहा, परसा पंचायत के परसा, जिरवा मधेली पंचायत के जिरवा में स्थित है. अकेले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में नियमित डॉक्टरो के 9 पद स्वीकृत हैं ताकि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों का इलाज बेहतर हो सके. लेकिन नियमित डॉक्टरों के स्वीकृत 9 पद के जगह मात्र 5 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं. प्रखंड क्षेत्र के चिकित्सा व्यवस्था को सुरक्षित बनाये रखने के लिए डॉक्टरों के अलावे एएनएम के 42 पद स्वीकृत है जिसमें मात्र 10 पदों पर ही ये पदस्थापित हैं जबकि 32 पद ऐसे ही रिक्त पड़ा हुआ है. वहीं आशा के 118 पद के जगह 112 पर ही काम हो रहा है. बाकी 6 पद रिक्त है. एलएचभी के 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. बीएचडब्लू के 7 पद के जगह पूरे सातोंं पद रिक्त पड़ा हुआ है. ड्रेसर के 1 पद के जगह 1, फार्मासिस्ट 1 के जगह, ममता 7 पद के जगह 4 पद पर तैनात हैं. बीएचएम के 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. अकाउंटेंट 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. बीसीएम 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. डीईओ 1 पद के जगह 1पद पर तैनात है. एफडब्ल्यूए 2 पद के जगह दोेनों पद रिक्त पड़ा हुआ है. एमडब्ल्यूए 2 पद के जगह दोने ही पद खाली है. एचडब्ल्यू 1 पद स्वीकृत है वो भी रिक्त पड़ा हुआ है. ग्रेड 'A' 04 पद के जगह चारों रिक्त है. एग्जीक्यूटिव असिस्टेंट 2 पद के जगह दोनों पदस्थापित है. एलटी 1 पद के जगह 01 पद पर तैनात है. पीएमडब्लयू 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. हैल्थ एडुकेटर 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. स्वीपर 1 पद के जगह 1 पद पर तैनात है. डॉक्टरों के स्वीकृति पदों में से करीब करीब आधे डॉक्टर ही रहने के कारण प्राथमिक स्वास्थ केन्द्रों में चिकित्सा व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में अभी बड़ी चुनौतियों बनी हुई है. 

डॉक्टरों की भारी कमी रहने के कारण अधिकांश मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र और प्राथमिक उप स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों को समुचित इलाज की सुविधा नही मिल रही है. डॉक्टरों की भारी कमी के कारण लाखों की लागत से बना चारों प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र में ताला लटका हुआ है. हालत यह है कि एक एएनएम को दो दो उपस्थास्थ्य केन्द्र का प्रभार रहता है साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में भी ड्यूटी रहती है. ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपस्वास्थ्य केन्द्र में इनके दर्शन भी सौभाग्य से हो जाते है. ऐसी स्थिति में बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था को सरजमीन पर लाना बड़ी चुनौती बनी हुई है.

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