06 नवंबर 2017

‘संसाधनों की कमी को कोसने के बजाय एक दीप जलाना अच्छा’: राष्ट्रीय सेमिनार में वीसी

मधेपुरा जिले के आलमनगर में यूभीके कॉलेज कड़ामा में दो दिवसीय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सम्पोषित दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन आज किया गया. 

समारोह का उद्घाटन कुलपति प्रो० डॉ० अवध किशोर राय, रजिस्टार प्रो० डा० कुमारेश प्रसाद सिंह, राष्ट्रीय उच्चत्तर शिक्षा अभियान बिहार पटना के चेयरमेन डॉ० कामेश्वर झा, प्रधानचार्य एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष डॉ० माधेवेन्द्र झा एवं अन्य व्यक्तियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया. 

इस दौरान सेमिनार के अध्यक्षता करते हुए उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ० मधवेन्द्र झा ने आए हुए अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए माननीय कुलपति के कार्यों का जिक्र करते हुए सेमिनार के दौरान होने वाले बातों पर विस्तृत चर्चा किया. डॉ० झा ने भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय मधेपुरा के रजिस्टार डॉ० कुमार अमरेश प्रसाद सिंह को उनके कार्यों के लिए धन्यवाद दिया. डॉ० झा ने रूसा के वाइस चैयरमैन डॉ० कामेश्वर झा, प्रो० भारती झा एवं ल० ना० मि० विश्वविद्यालय के प्रो० अशोक कुमार सिंह, प्रो० संजय मिश्र, डिप्टी रजिस्टार, परीक्षा विभाग तथा प्रो० अशोक कुमार, प्राचार्य मधेपुरा महाविद्यालय मधेपुरा के प्रति इस कार्यक्रम में आने के लिए आभार व्यक्त किया. 

अपने अध्यक्षीय संभाषण में डॉ० माधवेन्द्र झा ने कहा कि यूभीके काॅलेज, मधेपुरा के अति पिछड़े एवं ग्रामीण इलाके में अवस्थित है तथा इस इलाके के लिए एक मात्र यूभीके कॉलेज ही है जिसके चलते कई छात्र-छात्राएँ नामांकन से वांचित रह जाते है. उन्होंने कुलपति महोदय से आग्रह किया कि कृपया इस समस्या का समाधन करने की दिशा में प्रयास करने की कृपा करें. चूंकि आवश्यकता होने की स्थिति में विश्वविद्यालय एक ऑटोनोमस बॉडी है इसलिए कुलपति महोदय अपने स्तर से भी आदेश दे सकते हैं. उच्च शिक्षा में शिक्षण से भी ज्यादा प्रशिक्षण की जरूरत है. प्रशिक्षण से ही छात्र चुनौतियों का सामना कर सकते हैं. डॉ० झा ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि वे बच्चों को समय से महाविद्यालय भेजें. सेमिनार में उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि आज की संगोष्ठी की व्यवहार्यता पर बल देते हुए इसकी आवश्यकता पर चर्चा किया. 

वहीं सेमिनार में अपने संबोधन में माननीय कुलपति डॉ० अवध किशोर राय ने पूरे विस्तार से चर्चा करते हुए बिहार में उच्च शिक्षा एवं दूसरे राज्यों में उच्च शिक्षा की स्थिति पर तुलनात्मक वर्णन किया. उन्होंने विभिन्न महाविद्यालयों में शिक्षकों की कमी पर भी चिन्ता जताई. उन्होंने कहा कि सकल नामांकन अनुपात को पूरा करने की वे भरपूर कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने लड़के-लड़कियों के शिक्षा के अनुपात में सामनता लाने पर भी चर्चा की. उन्होंने कोसी के इलाके में प्राकृतिक आपदाओं का वर्णन करते हुए इसे भी शिक्षा के सुधार में एक अवरोध माना है. 

उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय के चार स्तंभ होते हैं; शिक्षक, छात्र, विश्वविद्यालय कर्मी एवं छात्रों के अभिभावक. ये चार अगर मिलकर काम नहीं करेंगे तो शिक्षा में अपेक्षित सुधार नहीं हो सकता हैं. डॉ० राय ने कहा कि संसाधनों की कमी को कोसने के बजाय अगर एक दीप जलाया जाय तो भू० ना० मंडल विश्वविद्यालय इतिहास की रचना करेगा. 

वहीं सेमिनार को संबोधित करते हुए छात्र नेता राहुल कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षक एवं छात्रों के विकास के साथ कोई राजनीति न करें. उन्होंने कहा कि इस सुदूर महाविद्यालय में व्यवसायिक शिक्षा, बी.सी.ए एवं बी.बी.ए की पढ़ाई सही से शुरू किया जाय. साथ ही उपस्थित कुलपति से छात्र संघ का चुनाव कराने के साथ-साथ सरकारी महाविद्यालय में भी इस तरह के सेमिनार का आयोजन करने का मांग की.
सेमिनार को संबोधित करते हुए रूसा का उपाध्यक्ष डॉ० कामेश्वर झा ने अपने संबोधन में कहा कि छात्र-छात्राओं के नामंकन के मामले में कहा कि अंगीभूत महाविद्यालय सम्बद्ध महा विद्यालय से बेहतर है. उन्होंने कहा कि अभिजात्य वर्ग के बच्चों एवं अभिवंचित वर्ग के बच्चों के साथ जब तक समान दृष्टिकोण नहीं अपनाया जायेगा तब तक शिक्षा का स्तर में सुधार होना संभव नहीं है.
(रिपोर्ट: प्रेरणा किरण)

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