10 नवंबर 2017

सरकारी दस्तावेज के साथ गीता के परिजन होने का दावा किया है गरीब दंपति ने

26 अक्‍टूबर 2015 को पूरे उत्‍साह के साथ माता-पिता और परिवार से मिलने की आस में पाकिस्‍तान से हिंदुस्‍तान आई मूक बधिर 'गीता' आज भी  का चर्चा का केंद्र बनी हुई   है।

दरअसल, आज से  दो वषँ पन्द्रह दिन पहले पाकिस्‍तान से अपने माता-पिता और परिवार से मिलने भारत आई गीता के माता-पिता का अब तक पता नहीं लग पाया है। 26 अक्टूबर 2015 को विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज की पहल पर धूमधाम के साथ भारत आई गीता को मध्‍य प्रदेश के इंदौर में मूक बधिर संगठन ले जाया गया। इसके बाद शुरुआत में उसक माता-पिता को खोजने की तैयारियां तेजी से चलती रहीं.
इस बीच गीता के लिए तकरीबन 13 दंपत्‍ती आएं हैं, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी है। वे कहती हैं कि गीता को दंपत्‍ती के फोटो दिखाए जाते हैं, उसके बाद यदि वह हां कहती है, तो डीएनए टेस्‍ट की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय देखता है। जहां डी एन ए मैच नहीं होने के कारण गीता को नहीं सौंपा जा सका है। ऐसे में गीता को भारत लाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाली विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अब गीता के मां-बाप की तलाश के लिए कोशिशें और तेज कर दी हैं।

इसी कड़ी के तहत विभिन्न राज्य सरकारों ने विभिन्न अखबारों में गीता में गीता के संबंध में सूचनाएं प्रकाशित करवाई और उन्हीं सूचनाओं के आधार पर मधेपुरा जिले के एक दंपत्ति जिनका नाम  मो युसुफ उम्र 80 वर्ष गीता का पिता होने का दवा महिला  जुलैखा खातून जो गीता के माता होने का दावा कर रही है अन्य परिजन जिसका नाम मोहम्मद जब्बार। मधेपुरा जिले के कुमारखंड थाना क्षेत्र अंतर्गत सुपौल और अररिया सीमा पर स्थित पुरैनी महरमपुर निवासी हैं जबकि दम्पत्ति मूल रूप से सारण जिले के मढोरा प्रखंड का मिर्जापुर गाँव के रहने वाले बताए जा रहे हैं. गीता के उक्त कथित परिजन केन्द्रीय मंत्री सुषमा स्वराज से भी दूरभाष पर बात कर चुके हैं और मधेपुरा से दिल्ली जाने की तैयारी ही नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने दावे के साथ उनसे मिलने भी जा रहे हैं. 

परिजनों ने बिहार सरकार के द्वारा विज्ञापन में 10 पहचान चिन्ह जो गीता से संबंधित थे उन सभी पहचान चिन्ह के विषय में जिला पदाधिकारी सारण छपरा द्वारा अंचल अधिकारी मढ़ौरा सारण से जांच करवा कर सभी 10 बिंदुओं की जानकारी के साथ सत्यापित प्रमाण पत्र भी दिया जो विज्ञापन की 10 बिंदुओं मैं सभी पूर्णतया मिलते हैं. 

इस परिवार के दावे से ऐसा प्रतीत होता है गीता इनकी ही बेटी है. यही नहीं परिजन खुद डीएनए जांच की मांग भी कर रहे हैं. गीता की मां का दावा करने वाली बुजुर्ग महिला ने कहा कि हम वह सभी पहचान चिह्न बताएंगे जो खुद गीता को भी नहीं पता सिर्फ एक मां को पता है । किन्हीं कारणों से या परिजन पिछले कई वर्षों से यहां रह रहा है और गरीबी में एवं आर्थिक तंगी की हालत में गुजरते हुए जिला पदाधिकारी सारण छपरा एवं अंचलाधिकारी के यहां से वह सारे सबूत इकट्ठा कर लिया है जो गीता के माता पिता होने यह प्रमाण पत्र बताए जा रहे हैं.

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