11 अक्तूबर 2017

तिलकामांझी विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों ने किया श्रीनगर गाँव का दौरा

मधेपुरा जिले के घैलाढ़ प्रखंड क्षेत्र के श्रीनगर गांव में 3000 वर्ष पुराने धरोहर और अवशेष स्थल पर तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर से आए प्रोफेसर डॉ रमन सिंह एवं बिहारी लाल चौधरी प्राचीन भारतीय इतिहास संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर अवशेष स्थल का जायजा लिया.

  
उन्होंने कहा कि 3000 वर्ष पुराने प्राचीन कालीन अवशेष मौजूद हैं तो खुदाई के बाद कई अन्य अवशेष भी मिल सकते हैं । वहीँ अंचलाधिकारी सतीश कुमार ने घैलाढ प्रखंड स्थित श्रीनगर गांव में 3000 वर्ष पुराना धरोहर पर शोध कर उनके महत्व को बताया । श्रीनगर में स्थापित कला का जीता जागता दस्तावेज जहां काले बेसाल्ट की देवी देवताओं का प्रतिमा निखुत नक्काशी और शिलापट्ट आज भी दर्शनीय ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के अनुसार मधेपुरा में बिहार का प्रसिद्ध देवाधिदेव महादेव का शिव मंदिर सिंगेश्वर-स्थान प्रसिद्ध हैं. परंतु 3000 साल पुराना धरोहर घैलाढ़ के श्रीनगर में है ।
अंचलाधिकारी और इतिहासकार सतीश कुमार ने बातचीत के दौरान बताया कि यहां श्रृंगी ऋषि का वर्णन धार्मिक ग्रंथ में भी हैं । किदवंती एवं पौराणिक कथा के अनुसार विभांडक ऋषि के आयुर्वेदाचार्य महर्षि श्रृंगी ऋषि का आश्रम था इससे हजारों छात्र विद्याध्ययन क्या करते थे।

उनका मानना है कि हर्षवर्धन कालीन को गौर वंश के राजा शशांक गौर ने मंदिर बनवाया था. शशांक गौर ने अपने शासनकाल के दौरान अंग प्रदेश में 108 शिवलिंग बनवाया था ।  काला मृदभांड मिलने से  वैदिक कालीन सभ्यता का विस्तार मधेपुरा तक मिलने का अनुमान है जिसका खोज जारी है जिसका नमूना गुप्तकालीन वैशाल्ट पत्थर का बने मंदिर के भग्नावशेष को आज भी शोधार्थी और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है।

 तिलकामांझी विश्वविद्यालय भागलपुर से आए शोधकर्ता के साथ अंचलाधिकारी सतीश कुमार, प्रोफेसर युगल पटेल जदयू नेता मधेपुरा तथा कई ग्रामीण मौजूद थे ।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...