18 अक्तूबर 2017

मुरलीगंज: कचरे के ढेर पर कैसे मने दिवाली, नहीं सुधर रही सूरत शहर की

इन दिनों मुरलीगंज नगर पंचायत क्षेत्र कचरे के ढेर पर है. आलम यह है शहर की अधिकतर मुख्य सड़कें डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती जा रही हैं. मुरलीगंज नगर पंचायत के वर्तमान बोर्ड की लाख कोशिशों के बावजूद शहर की सूरत सुधरने का नाम नहीं ले रही है.


यूं कहें तो निगम का स्वच्छ और सुंदर मुरलीगंजमुहिम भी अब टांय-टांय फिस्स साबित हो चुकी है. निगम ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत मुरलीगंज को स्वच्छ और सुंदरबनाने के लिए हाल के दिनों में ही इस मुहिम का आगाज किया था. इसके लिए निगम के शहरवासियों के बीच जन जागरूकता फैलाने के लिए किया गया प्रयास एवं स्वच्छता की मुहिम भी दिनों दिन लकवाग्रस्त होती नजर आ रही है. नगर पंचायत की लापरवाही कहें या फिर मजबूरी, हाल के दिनों में मुरलीगंज में साफ-सफाई नियमित नहीं हो रही है जिसके कारण बीते कुछ रोज से कचरे का ढेर शहर में कई जगहों पर दिन भर पड़ा रहता है. कचरे के अंबार को उठानेवाला कोई नहीं है. शहर के 9 नंबर वार्ड के मुख्य सड़क पर कचरे के साथ-साथ नाली का गंदा पानी भी सड़कों पर ही 24 घंटे बहता रहता है. NH 107 के किनारे हाट रोड के पास के पास पुराने पोस्ट ऑफिस की गली की सड़क पर रखे कचरे के डस्टबिन से इतनी बदबू आती है कि उस होकर गुजरने वाले लोग नाक पर रुमाल रख कर वहां से निकलते हैं. फिर भी नगर पंचायत अपनी कुंभकर्णी निद्रा से नहीं जगती है.

मिली जानकारी के अनुसार मुरलीगंज नगर पंचायत की सफाई में 2 एनजीओ लगे हुए हैं. दोनों एनजीओ के सफाई कर्मियों ने नाम नहीं बताते हुए कहा कि जहां प्रत्येक वार्ड में 4/5 सफाई कर्मी की आवश्यकता है, वहां एक 2 सफाई कर्मी से कैसे काम चलेगा? कहा कि यहां कचरे की धुलाई के लिए प्रत्येक वार्ड में एक कचरा रिक्शा उपलब्ध करवाया गया है, जबकि प्रत्येक वार्ड में कम से कम 3 से 4 रिक्शे की आवश्यकता होती है. जाहिर सी बात है कि अनुपलब्धता के कारण सफाई प्रभावित होती है. गौरतलब है कि पिछले ही साल लगभग करोड़ों के सफाई संसाधन मुरलीगंज नगर पंचायत द्वारा क्रय किया गया. नगर पंचायत क्षेत्र के कई वार्ड, बस्ती बहुल इलाके हैं. इन वार्डों की हालत तो और भी खराब है. इन वार्डों के बस्तीवासियों का तो इस कचरा के कारण जीना ही दूभर हो गया है.

वार्ड नंबर 7 के निवासी मुरलीगंज शहर के वरिष्ठ नागरिक ब्रह्मानंद जायसवाल का कहना है कि उनके घर के बगल में नदी को प्रदूषित किया जा रहा है. उसमें कचरे का डंपिंग किया जाता है, जिससे हमलोगों का जीना दुर्लभ हो गया है. बार-बार कहने पर भी कार्यपालक द्वारा इस दिशा में में कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है. ऐसे में मुझे मुरलीगंज नगर पंचायत के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा. 

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि न तो सड़क और न ही ड्रेन-नालों की नियमित सफाई होती है और न ही नियमित रूप से ब्लीचिंग पाउडर व तेल का छिड़काव और फॉगिंग होती है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फागिंग मशीन नगर पंचायत द्वारा तो खरीदा गया है पर आज तक पिछले 2 वर्षों से एक बार भी उसे शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए उपयोग में नहीं लाया गया है. इस वजह से मच्छर दिन में ही डंक मारने से बाज नहीं आते. इन दिनों शहर में कचरे के बदबू के साथ-साथ मच्छरों का उत्पात भी काफी बढ़ गया है.

भाजपा जिला उपाध्यक्ष मुकेश कुमार सिंह जो स्थानीय नगर पंचायत निवासी हैं, ने कहा कि मुरलीगंज में दीपावली के मौके पर स्वच्छता अभियान की हवा निकली हुई है. उन्होंने बताया कि इस दिशा में मुरलीगंज कार्यपालक पदाधिकारी नगर पंचायत को इसकी सूचना बार-बार दी जाती है. पर वे लोग इसे अनदेखी करते हैं. सड़क के किनारे कचरे का ढेर खुद सारी पोल पोल खोल रहा है. भाजपा के नगर अध्यक्ष मनोज कुमार भगत ने बताया कि मुरलीगंज जयरामपुर चौक वार्ड नंबर 6 के नाली का पानी एवं वार्ड नंबर 5 के नाली का पानी NH 107 पर पर पोखर बना चुका है, लेकिन पानी का बहाना अनवरत जारी है. इससे बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है. वार्ड नंबर 7 के पार्षद दिनेश मिश्रा उर्फ बाबा का कहना है कि जिन लोगों को राजनीति करने से ही फुरसत नहीं है वह क्या नगर पंचायत की जनता का ख्याल रखेंगे. उन्होंने हाट रोड में स्थित कंटेनर में कचरे को दिखाते कहा कि यह यहाँ महीनों से इसी तरह पड़ा हुआ है. और इस से बदबू आ रही है. शहर में नागरिक परिसेवा पूरी तरह लचर स्थिति में है. न तो साफ-सफाई नियमित रुप से हो रही है और न ही लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल रहा है. कुछ पार्षदों द्वारा नगर पंचायत में लगातार आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है.

मुरलीगंज नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी रमण कुमार चौपाल द्वारा सफाई के विषय में जानकारी मांगी गई तो उन्होंने अपनी सफाई देते हुए कहा कि जहां भी कचरा है, हम अभी साफ करवाते हैं. मुरलीगंज कार्यपालक पदाधिकारी जो यह कहते हैं कि आप हमें बताएं कि कहां-कहां पर कचरा है तब हम साफ करवायेंगे. ऐसी गैर जिम्मेदाराना हरकत को देखकर अफसोस होता है कि ये लोग किस काम के लिए वेतन वेतन पाते हैं जब इन्हें अपने विभाग के कामकाज के विषय वस्तु की भी सही से जानकारी नहीं है.
 

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