07 अक्तूबर 2017

मधेपुरा: बाढ़ लाभुकों की सूची में गड़बड़ी करने का आरोप



बाढ़ में अपना सब कुछ बर्बाद कर चुके लोगों का कहना है कि सरकार के द्वारा मुआवजे की राशि देने का ऐलान जो किया गया है, वो संसाधनों की क्षति से काफी कम है. और उसे लेने के लिए भी काफी संघर्ष का सामना करना पड़ता है. 

ऐसे में तब तक हम लोग क्या करेंगे? जब तक सरकार की सहायता राशि नहीं मिलती. ऐसे में ना तो कोई मदद करने वाला है और ना ही कोई दर्द बांटने वाला. भरोसा है तो एक सिर्फ सरकार पर लेकिन उसने भी जो सहायता राशि और मुआवजा देने का ऐलान किया है वो कब मिलेगा ये पता नहीं?
यह मामला मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत जोरगामा पंचायत का है. मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत जोरगामा पंचायत में जो सुरसर नदी के किनारे पर बसा हुआ गांव है. पिछले 5 अगस्त को आई बाढ़ के कारण गांव पूरी तरह जलमग्न हो चुका था. आज सुबह के 8:00 बजे ग्रामीणों ने एनएच 91 के किनारे किनारे बने राजीव गांधी सेवा केंद्र में एकत्रित होकर ग्रामीणों द्वारा एक बैठक की जिसमें लाभुकों की सूची तैयार करने में गड़बड़ी करने का आरोप लगाया गया. जबकि वार्ड नंबर 6, 8 ,1, 2 ,3 के बहुत से क्षतिग्रस्त घरों का मुआवजा नहीं दिया गया है और न ही फसल क्षति की राशि दी गई है. और न ही कोई सहायता राशि प्रदान की गई है. दोषपूर्ण सूची बनवाकर भी मात्र 1150 व्यक्तियों को अबतक सहायता राशि प्रदान की गई है, जबकि करीब 32 सौ परिवार इस पंचायत के बाढ़ से प्रभावित हुए थे. इसको लेकर लोगों में काफी आक्रोश दिख रहा था. इस बैठक में निवर्तमान मुखिया मिथिलेश कुमार आर्य एवं श्री राजेंद्र चौधरी मौजूद थे. उन्होंने ग्रामीणों से इस बारे में चर्चा की और इस अनियमितता के लिए स्थानीय प्रशासन एवं ग्राम पंचायत को दोषी ठहराया. और मामले की जांच करने के लिए जोरदार आंदोलन चलाने की बात कही. वार्ड नंबर 6 की पंपस लीला देवी ने बताया कि मुखिया अभय कुमार उर्फ़ गुड्डू द्वारा मनमाने तरीके से सूची का निर्माण कर ऐसे-ऐसे लाभुकों को राहत सहायता वितरण किया है जो अविवाहित हैं जिसका गलत तरीके से परिवारिक सूची में नाम डाल कर उनको मुआवजा वितरण किया गया है. यही नहीं मामले में और भी ढेर सारी अनियमितता बरती गई है. वहीं पूर्व मुखिया मिथिलेश कुमार आर्य ने बताया कि जिन परिवारों के घर बाढ़ में ध्वस्त नहीं हुए थे उन्हें भी क्षतिपूर्ति मिली है. और जिनके घरों में पानी था उनको क्षतिपूर्ति नहीं मिला है. इस तरह के बहुत सारे मामले में अनियमितता बरती गई है. प्रशासनिक सर्वेक्षण कर्ता ने मनमाने ढंग से काम किया है. उन्होंने वर्तमान मुखिया पर पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर सर्वेक्षण करवाने का आरोप लगाया, जिसके कारण लोग आक्रोशित हुए है. अगर इसमें सुधार नही हुआ तो आमजन आंदोलन के लिए बाध्य होंगे. 

इतना ही नहीं कई पक्के मकान वाले का नाम बाढ़ पीड़ितों की सूची में शामिल हैं, जिन्हें सहायता राशि भी बैंक खाते में भेज दी गई है. कुछ ऐसे परिवारों को गृहक्षति की राशि दी गई है, जिनके गृह क्षति हुए ही नहीं है. बहुत सारे अविवाहितों को पीड़ितों की सूची में नाम देकर सहायता राशि दी गई है. अगर पूरे प्रखंड के बाढ़ सहायता पाने वाले की सूची की जांच की जाय तो सैकड़ों ऐसे लोग मिल सकते हैं, जिन्हें बाढ़ से नुकसान नही हुआ है और उन लोगों ने लाभ पाया है. 

इस मामले में अंचलाधिकारी शशिभूषण कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है कि जोरगामा पंचायत में क्षति पूर्ती बांटने को लेकर अनियमितता की गई है. और सूची में लाभुकों के नाम नहीं है, जो लोग सही में बाढ़ प्रभावित है. अत: मामले की जांच करवा कर कार्रवाई की जाएगी, एवं कुछ ऐसे भी मामले सामने आए हैं जिसमें गलत तरीके से अविवाहित लोगों को भी लाभ मिला है. उन्होंने बताया कि जो भी गलत ढंग से परिवारिक सहायता राशि प्राप्त की है उन पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

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