28 अक्तूबर 2017

बॉलीवुड में फिर लहराया राजशेखर का परचम, एक दिन में 30 लाख जुबान पर गूंजे गीत




वो जो था ख्वाब सा

क्या कहें जाने दे

ये जो है कम से कम       

ये रहे के जाने दें...’

कहते हैं मेहनत या संघर्ष यदि इमानदारी बिना रुके करते रहें तो सफलता आपके कदमों को बार-बार चूमती है.

राष्ट्रीय फलक पर मधेपुरा का नाम रोशन करने वाले गीतकार राजशेखर अपनी काबिलियत के दम पर अक्सर चर्चा में रहते हैं, पर ताजा चर्चा शायद पिछली सभी उपलब्धियों को पीछे छोड़ रही है.


महज एक दिन मे ही लगभग 30 लाख लोगों के जुबान पर चढ़ जाने वाले आतिफ़ असलम की आवाज मे गाये हुए एक गीत के गीतकार फिर से भेलवा, मधेपुरा के निवासी राजशेखर ही हैं. गाने के बोल ऐसे कि आप पूरा सुने बिना रह भी नहीं सकते और शायद शब्दों का यही जादू महज एक ही दिन में 30 लाख लोगों के दिल को छूने में कारगर रहा.

देश भर में एक बार फिर चर्चा में आने के बाद आखिर उनके पैतृक जिले में जश्न का माहौल क्यों न हो? आज उनके पैतृक जिले मधेपुरा के समिधा ग्रुप के हॉल मे गीतकार राजशेखर के सफलता का जश्न मनाया गया. हिंदुस्तान के जाने माने गीतकार में शामिल हो चुके मधेपुरा निवासी राजशेखर के नए फ़िल्म करीब करीब सिंगल के पहले गीत 'जाने दे' के रिलीज होने के मात्र एक दिन में लगभग 30 लाख लोगों के द्वारा सुने जाने पर उनके सहपाठियों व परिवारजनों ने इस सफलता पर केक काटकर जश्न मनाया. गीत यूट्यूब के अलावे गाना.कॉम, आई-ट्यून आदि पर भी तेजी से छा रहे हैं. उनकी इस शानदार सफलता पर सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया गया. 

इस मौके पर गीतकार राजशेखर भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस जश्न में शामिल हुए. इसके बाद करीब एक घंटे तक राजशेखर ने पत्रकारों के सवालों का बड़े ही बेबाक़ी से जबाब दिया. साथ ही उन्होंने छात्रों को भी बेहतर जीवन जीने के कला पर राय दी. उन्होंने कहा कि किसी भी आदमी को अपनी विरासत नहीं भूलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हम गाँव से हैं, उसी से हम चीजें लेते हैं. 

नए गाने के सफलता पर उन्होंने कहा कि गीत को अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. अच्छा लगना स्वाभाविक है, शुरुआत में धुकधुकी रहती है कि गाना को लोग किस तरह लेंगे, लेकिन रिलीज होने के बाद लोगों ने जिस प्यार से गाने को स्वीकार किया उससे काफी खुशी मिलती है. उन्होंने कहा कि हर गाना मेरे लिए संघर्ष है. कहीं पहुंचना मुश्किल है, लेकिन उस मुकाम पर बने रहना इससे भी बड़ी चुनौती है. भावुक होते उन्होंने कहा कि अपने मातृभूमि इस प्रकार का आयोजन बहुत उर्जा का संचार कर रहा है. साथ ही जो भी मधेपुरा से जुड़े कोई खिलाडी, लेखक, ऑफिसर आदि कुछ अलग करते हैं उनकी इसी प्रकार से अपने लोगों के बीच मे चर्चा होने पर उत्साह का संचार होता है. उन्होंने इस आयोजन के लिए सभी का धन्यवाद किया. 

इस अवसर पर उनके अभिभावक तुल्य और कोसी के जाने माने लेखक अरविन्द श्रीवास्तव भी रुबरु हुए. साथ ही राजशेखर के पिता चन्द्रशेखर आजाद, विनय कुमार झा, उनके मित्र आशीष कुमार सोना, अमित कुमार मोनी, समिधा ग्रुप के सचिव संदीप शाण्डिल्य, इप्टा के सुभाष, शहंशाह, तुरबशु, राहुल यादव, धर्मेंद्र सिंह, मनीष, रविशंकर सहित समिधा ग्रुप के दर्जनों छात्र उपस्थित थे. एक छात्रा के विशेष आग्रह पर उन्होंने एक गाना भी गा कर सुनाया.

इस चर्चित गाने को यूट्यूब पर आप भी सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें.

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