17 सितंबर 2017

'हिंदी दिवस समारोह' में भाग लेने अंबेडकर छात्रावास पहुंचे बीएनएमयू के कुलपति

वैसे तो सभी भाषाओँ का अपना-अपना महत्व है, लेकिन हिंदी गंगा माता की तरह है. जैसे प्रायः सभी नदियाँ गंगा में मिलकर उसे समृद्ध करती हैं, वैसे ही भारत की सभी भाषाएं हिंदी की समृद्धि में सहायक हैं.


यह बात कुलपति प्रोफेसर डॉ० अवध किशोर राय ने शनिवार को टी.पी. कॉलेज परिसर स्थित राजकीय अंबेडकर छात्रावास में आयोजित 'हिंदी दिवस समारोह' में कही. कार्यक्रम का आयोजन शिव राजेश्वरी युवा सृजन क्लब की ओर से किया गया था. 

कुलपति ने कहा कि हिंदी हमारी सभ्यता-संस्कृति हमारी भावनाएं एवं संवेदनाएं से जुड़ी हुई है. यह हमारी जन अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं की भाषा है. हिंदी के विकास में हिंदुस्तान का विकास अंतर्निहित है. कुलपति ने कहा कि हिंदी हमारे हृदय की भाषा है, इससे हम सब को आत्मीयता है. हिंदी दिवस के बहाने हम अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करते हैं. हमें हिंदी दिवस को विस्तृत कर हिंदी सप्ताह, हिंदी पखबाड़ा एवं हिंदी माह मनाना चाहिए. हम हर दिन को हिंदी दिवस के रूप मनाएं तभी हिन्दी की गरिमा बनी रहेगी. कुलपति ने कहा कि हिंदी एक समृद्ध भाषा है. यह चीन की मंदारिन भाषा के बाद दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है. आज भारत एवं पड़ोसी देशों के अलावा माॅरीसस, फिजी, इंडोनेशिया, ब्रिटेन एवं अमेरिका तक में हिंदी की धूम मची हुई है. पूरी दुनिया में हिंदीभाषियों का मान-सम्मान बढ़ा है. हिंदी हमारी आन, बान एवं शान है. हमें हिंदी का अभिमान है. हिंदी में लिखना-पढ़ना या बोलना शर्म की नहीं, बल्कि गर्व की बात है. हमें गर्व है कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है. कुलपति ने कहा कि दूसरी भाषाओं को सीखने में कोई बुराई नहीं है. बस हमें भाषाओं को संकीर्ण दायरे में नहीं बांधना चाहिए. हिंदी संकीर्णताओं से परे है. यह समावेशी भाषा है. यह प्रेम एवं समन्वय की भाषा है. 

बीएनएमयू के संस्थापक कुलपति प्रोफेसर डॉ. रवीन्द्र कुमार यादव रवि ने कहा कि हिंदी दिवस मातृदिवस है. जिस तरह हमें अपनी माता पूजनीय हैं वैसे ही मातृभाषा भी पूज्य है. हिंदी राष्ट्रीयता का प्रतीक है. हिंदी के बिना हिंदुस्तान वैसे ही है, जैसे आत्मा के बिना शरीर. उन्होंने कहा कि हिंदी को सबसे पहले बिहारवासियों ने सम्मान दिया. यहाँ 1881 में ही हिंदी को राज्यभाषा का अधिकारिक दर्जा दिया गया था. और आगे चलकर लंबे समय बाद 1949 में हिंदी को राष्ट्रीय स्तर पर यह सम्मान मिला. 

कार्यक्रम की अध्यक्षता छात्रावास अधीक्षक डॉ० जवाहर पासवान ने किया. स्वागत डॉ० सिद्धेश्वर कश्यप ने की. संचालन हर्षवर्धन सिंह राठौर ने किया. एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ. रतनदीप ने की. इसके पूर्व कार्यक्रम की शुरुआत में अतिथियों का अंगवस्त्रम से स्वागत किया गया और रवि बाबू को कोसी साहित्य सृजन रत्न 2017 प्रदान किया गया. इस अवसर पर स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ० इन्द्रदेव नारायण यादव, पीआरओ डॉ० सुधांशु शेखर ने भी अपने विचार व्यक्त किये. इस अवसर पर छात्रनायक राजकुमार रजक, उप-छात्रनायक हंस राज हंस, संजीव कुमार, गौरव कुमार, मलचंद, विकास आदि उपस्थित थे. 

पहली बार इस दलित हॉस्टल में आए कोई वीसी: समाज के सबसे वंचित वर्ग (दलित) के विद्यार्थियों हेतु संचालित इस छात्रावास में पहली बार शिक्षा के उच्च शिखर पर बैठे किसी कुलपति के कदम पड़ने पर छात्रावास अधीक्षक सह सिनेट-सिंडीकेट के सदस्य डॉ० जवाहर पासवान ने कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने बताया कि इस हाॅस्टल का निर्माण 1960 ई. में हुआ. इन 57 वर्षों में यहाँ कुलपति पद पर आसीन कोई भी व्यक्ति नहीं आए थे. अतः यहाँ के विद्यार्थियों की बड़ी लालसा थी कि वर्तमान कुलपति यहाँ आयें. कुलपति ने उदारतापूर्वक विद्यार्थियों का आमंत्रण स्वीकार कर उनकी हौसला अफजाई की. छात्रनायक राजकुमार रजक, उप-छात्रनायक हंस राज हंस, संजीव कुमार, अर्जुन, गौरव कुमार, मलचंद, विकास सहित सभी छात्रावासियों ने भी कुलपति के प्रति आभार व्यक्त किया है. आभार व्यक्त करने वालों में टाटा आइरन एंड स्टील हाॅस्टल के सौरभ, संजीव, मिथून, रोहित, प्रभु, अंकेश, राजीव आदि के नाम भी शामिल हैं. 

टी. पी. कॉलेज, मधेपुरा परिसर स्थित राजकीय अंबेडकर छात्रावास में आयोजित 'हिंदी पखवाड़ा सह सम्मान समारोह' में वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ० सिद्धेश्वर कष्यप के अनुगीत संग्रह 'अजनबी बन गयी जिन्दगी' का लोकार्पण किया गया. इस संग्रह में सामाजिक ,राजनीतिक धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों के क्षरण पर चोट किया गया है. इसकी कुछ प्रमुख रचनाएँ हैं- 'आदमी बिकने लगा', 'बेचता आज जमीर धरम है' एवं 'ये कत्ल का मौसम है' आदि. इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर डॉ० अवध किशोर राय, संस्थापक कुलपति प्रोफेसर डॉ० रवीन्द्र कुमार यादव रवि, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ० इंद्र नारायण यादव, छात्रावास अधीक्षक डॉ. जवाहर पासवान, पीआरओ डॉ. सुधांशु शेखर आदि उपस्थित थे.
(नि. सं.)

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