12 सितंबर 2017

अच्छी ख़बर: समय से पहले विद्युत रेल इंजन कारखाना बनकर होगा तैयार

बीस हजार करोड़ रू. की लागत से बन रही मधेपुरा की महत्वाकांक्षी विद्युत रेल इंजन कारखाना निर्धारित समय से पूर्व ही बनकर उत्पादन शुरू करने जा रही है । 

जिलाधिकारी मु सोहैल ने इस परियोजना के अधिकारियों से बात कर बताया है कि यहाँ ठीक एक माह बाद यानि 11अक्टूबर कॊ पहला रेल इंजन बनना शुरू किया जायेगा ।

एक सौ एकड़ क्षेत्र में स्थित इस विद्युत रेल इंजन कारखाने कॊ 18 मार्च 2018 तक बनकर तैयार होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था । यहाँ कारखाने का निर्माण टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड  द्वारा कराया जा रहा है जबकि विद्युत रेल इंजन निर्माण का काम फ्रांस की  विश्व प्रसिद्ध अलस्टॉम मेन्यूफेक्चरिंग इंडिया लिमिटेड करेगी ।

ज्ञातव्य है कि इस परियोजना के साथ ही बिहार के ही मढौरा में डीजल रेल इंजन कारखाने का निर्माण शुरू हुआ था लेकिन अभी वहाँ चहारदीवारी निर्माण का काम भी भूमि विवाद के कारण रुका पड़ा है । माना यह जा रहा है कि यहाँ भूमि अधिग्रहण से लेकर अन्य विवाद कॊ निपटाने का काम जिलाधिकारी मु सोहैल ने स्वँय रुचि लेकर किया । इस बावत जिलाधिकारी कहते हैं कि यहाँ के भू स्वामियों ने भी सहयोग दिया और यह उपलब्धि सबके सहयोग का ही नतीजा है । इसके लिये मैं मधेपुरा वासियों का कृतज्ञ हूँ ।

यहाँ यह याद दिलाना आवश्यक है कि केन्द्र सरकार की  मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत यह  पहली बड़ी एफ़ डी आई परियोजना है । यहाँ निर्मित 800 विद्युत रेल इंजन कॊ पहले भारत का रेल मंत्रालय खरीदेगा । सबसे पहले अलस्टॉम कम्पनी फ्रांस से पाँच विद्युत रेल इंजन के पुर्जे लाकर यहाँ इस कारखाने में उसे जोड़ कर इंजन बनाकर उसे भारतीय रेल कॊ टेस्ट ड्राइव के लिये सौपेगी । जाँच में सही पाये जाने पर पहले वर्ष 2020 में 35, 2021 में 60 और 2022 से 2029 तक प्रतिवर्ष एक सौ विद्युत रेल इंजन भारतीय रेल कॊ आपूर्ति करेगी । यहाँ निर्मित विद्युत रेल इंजन बारह हजार अश्व शक्ति की होगी जो छह हजार टन वजनी मालगाड़ी कॊ एक सौ किलोमीटर की रफ्तार से खींचने में सक्षम होगी । अभी उपलब्ध विद्युत इंजन मात्र 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से ही चल पाती है । यहाँ उत्पादित एक विद्युत रेल इंजन कॊ रेलवे 24.88 करोड़ रू में खरीदेगी और कुल आठ सौ इंजन के लिये रेलवे 19 हजार करोड़ रू खर्च करेगी ।

यहाँ इस विद्युत रेल इंजन कारखाने में उत्पादन कार्य शुरू होने के कारण कई सहायक निर्माण उद्योग स्वयं स्थापित होने लगेंगे और बंगाल व झारखंड के भी कई उद्योग यहाँ पूर्जे आपूर्ति कर सकेंगे ।

बहरहाल इतने बडी परियोजना मधेपुरा जैसी छोटी जगह कॊ एक बहुत बड़ी जगह बनायेगी, यह अब तय हो चुका है ।

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