24 अगस्त 2017

बाढ़ राहत की है पर्याप्त व्यवस्था, राज्य सरकार है तत्पर: डीएम

मधेपुरा जिलाधिकारी मु सोहैल ने गुरुवार कॊ प्रेस कॊ संबोधित करते हुए यह दावा किया है कि  मधेपुरा जिले में अन्य जिलों की अपेक्षा कम बाढ़ आई जबकि यहाँ अन्य जिलों की अपेक्षा अधिक राहत सामग्री वितरित की गयी है ।


उन्होने इस आरोप कॊ सिरे से खारिज कर दिया कि बाढ़ राहत शिविरो कॊ समय से पहले बंद कर दिया और राज्य सरकार किसी प्रकार कि कोताही बरत रही है । उन्होने एफ़ एम आई एस के नेट से प्राप्त नक्शा उपलब्ध कराते हुए बताया कि मधेपुरा जिले के आलम नगर और चौसा में कोशी नदी पर बाँध नही होने के कारण लगभग हर वर्ष बाढ़ आती है । इस बार भी इन दोनो प्रखंडों में ही पहले बाढ़ आई । अन्य प्रखंडों में 17 अगस्त से बाढ़ आना प्रारम्भ हुआ जबकि इस जिले में 15 अगस्त से ही सूखा राशन वितरण और राहत शिविर शुरू हो चुका था । बाढ़ जब थी तो प्रभावित दस प्रखंडों में चौंतीस राहत शिविर लगातार चालू रहे, लेकिन बाढ़ समाप्त होने के बाद जब लोग अपने घर लौट गये तो राहत शिविरों कॊ धीरे धीरे बंद किया गया और अभी भी ग्वालपाड़ा, चौसा और आलमनगर में दस राहत शिविर चालू हैं । सोनामुखी में तो 22 अगस्त से सार्वजनिक रसोई प्रारम्भ कर 650 ज़रूरतमंदों कॊ भोजन दिया जा रहा है । 24 अगस्त से बाढ़ समाप्त होने पर अन्य प्रखंडों में राहत शिविर बंद किया गया है । इन शिविरों में तीन बार नाश्ता, भोजन के अतिरिक्त हर आवश्यक सुविधायें उपलब्ध करायी गयी थी । 112 नाव हर प्रखंड में नि:शुल्क चलाये जा रहे हैं  । जहाँ भी जरूरत पड़ी एन डी आर एफ़ और एस डी आर एफ़ कि टीम प्रतिनियुक्त कि गयी । 52 स्वास्थ्य केन्द्र में समुचित इलाज की  व्यवस्था की गयी और पशुओं के लिये भी 20 उपचार केन्द्र कार्यरत रहे ।  

जिलाधिकारी ने बताया कि बाढ़ पीडितों के बीच अब तक 68600 पैकेट सूखा राशन वितरण किया गया है और फ़िर 8327 फ़ूड पेकेट भी वितरित किये गये हैं । बाढ़ के कारण टूटी सभी सड़क जो लगभग अस्सी की संख्या में है, की मरम्मती हो चुकी है और नौ स्थानों पर टूटी एन एच में आठ ठीक कर नौवां भी कल तक ठीक हो जायेगा । 

उन्होने कहा की राजनीतिक कारणों से कोई आरोप लगा सकते हैं लेकिन सच यही है कि राज्य सरकार पूरी तत्पर होकर बाढ़ राहत कार्य करवा रही है और मुख्यमंत्री स्वयं तत्पर होकर मॉनीटरिंग कर रहे हैं ।

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