23 अगस्त 2017

फेंकी नवजात बच्ची को बनाया अपनी बेटी, पर चल गया ममता पर कानून का हथौड़ा

'जाको राखे साइयां, मार सके न कोई, बाल न बांका कर सके सब जग बैरी होए!!' जहाँ एक तरफ सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देकर बालिकाओं के लिए नित्य नई-नई योजनाएं ला रही है, वहीं इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना मधेपुरा के सिंहेश्वर में प्रकाश में आई.

मिली जानकारी के अनुसार जब त्रिशूल चौक निवासी प्रमोद अग्रवाल सुबह लगभग साढ़े 4 बजे टहलने के लिए घर से निकलने के क्रम में देखा कि गेट के पास कपड़े में लिपटा हुआ कोई समान फेंका हुआ था. देखने पर पता चला कि उसमें एक नवजात बच्ची सांस ले रही थी. उसने यह बात घरवालों को बताया. प्रमोद अग्रवाल की पत्नी ने तुरंत आकर बच्चे को उठाया और देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई. रोगी कल्याण समिति के सदस्य मांडवी देवी के सलाह पर बच्चे को सीएचसी में भर्ती कराया गया. तब तक यह खबर गौरीपुर वार्ड नंबर-12 के निवासी प्रमोद चौरसिया को मिली, जो संतान नहीं रहने का दुख झेल रहे थे. इस खबर के बाद दोनों अस्पताल पहुंचे और बच्चे को गोद लेने की बात कही. दोनों प्राणी बड़े ही लाड़-प्यार से बच्चे को गोद में लिया. उसकी पत्नी अनिता देवी ने बच्ची को तेल लगाने के बाद दूध पिलाया.

लेकिन उनके ममता पर हथौड़ा उस समय चल गया, जब मधेपुरा से आला अधिकारी ने उस बच्ची के लिए बच्चों के देखरेख करने वाले एक एनजीओ विशिष्ट दत्तक ग्रहण संस्थान के सदस्य सुधा कुमारी को भेजा. सुधा कुमारी ने गोद लेने वाले दंपति को बताया कि अभी हम लोग इसे सदर अस्पताल मधेपुरा ले जा रहे हैं. वहां इसका मेडिकल जांच के बाद इसका पंजीकरण बाल कल्याण संरक्षण समिति मे होगा. जहां किसी तरह के दावा के लिये 60 दिनों तक के समय का इस्तेहार निकाला जायेगा. उसके बाद गोद लेने की प्रक्रिया पूरा कर बच्ची को आपके पास सुपुर्द किया जा सकता है.

सीएचसी प्रभारी डा० आनंद भगत ने बताया कि सुबह ही स्थानीय लोगों के द्वारा इस बच्ची को लाया गया. जिसकी सूचना स्थानीय थाना और उपर के अधिकारियों को दे दी गई है. जहां से एक एनजीओ सदस्य आई है, जो बच्ची को लेकर मधेपुरा जा रही है. मौके पर बीएचएम पियूष बर्धन, टेक्निशियन संजय कुमार, सुभाष कुमार, मांडवी देवी, प्रमोद अग्रवाल, प्रमोद चौरसिया, श्रवण चौरसिया आदि मौजूद थे.

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