20 अगस्त 2017

‘परिवार को सेटल करने की चिंता में शरद यादव भी लालूरोग से पीड़ित’: निखिल मंडल

‘आदरणीय शरद यादव जी की उम्र अब इतनी हो है कि उन्हें स्वास्थ्य लाभ करना चाहिए और ज्यादा मानसिक तनाव नहीं लेना चाहिए। मैं उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करता हूँ।‘


 जनता दल (यूनाइटेड) के प्रदेश प्रवक्ता निखिल मंडल ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि एक सम्मानित बुज़ुर्ग होने के नाते शरद जी से गुजारिश है कि अब बिहार को अपने राजनीति स्वार्थ के लिए कृपया इस्तेमाल न करें और मधेपुरा की जनता का तो कम से कम भावनात्मक शोषण करना बंद कर दें। बिहार ने हर उस नेता का सम्मान किया है जो विचार की राजनीति के नायक रहे हैं लेकिन ऐसे जिन लोगों ने बिहार की धरती पर मिले अवसर की बुनियाद पर ठेकेदारी करनी शुरू की है उनकी राजनीतिक दुकान यहीं की जनता ने बंद कराने में देर भी नहीं की है। बिहार ने उनके बुरे दिन में सहारा देकर उन्हें नेता बनाये रखा लेकिन उन्होंने जिनको नेता बनाया वो कौन लोग हैं और कहाँ हैं? अब शरद यादव को समझ लेना चाहिए की कि बिहार और मधेपुरा की जनता ने उनपर बहुत एहसान किया है तो अब बख्स दें। अगर शरद जी यह समझते हैं कि मधेपुरा में घर बना लेने से वो बिहार की राजनीति कि ठेकेदारी भी कर लेंगे तो यह असंभव है।

जदयू प्रवक्ता निखिल मंडल ने आगे कहा कि मेरी शरद जी से एक बुजुर्ग होने के नाते सहानुभूति है कि इस उम्र में अक्सर लोगों को अपने बेटे और परिवार को सेटल करने की चिंता सताने लगती है। ये वही डेसपरेशन या ऑबसेशन या सिंड्रोमहैं जिससे लालू यादव ग्रसित हैं। इस आधार पर कह सकते है कि शरद यादव भी लालूरोगसे पीड़ित हो चुके है। शरद जी को यह रोग कितना भयानक लग चुका है कि वे लालू यादव के हाथों अपनी उपेक्षा, बेईज्ज़ती और अपमान सब भूलकर सिर्फ नाम के लिए समाजवाद का नाम जप रहे हैं. लेकिन हकीकत में भ्रष्टाचार के आगे नतमस्तक हो गए हैं। शरद जी आजतक अपनी राजनीति उत्तरप्रदेश और बिहार में घूमकर यहाँ की राजनीतिक प्रतिभाओं के कीमत और उनके खून- पसीने की कमाई पर की है। अगर उन्हें इतना ही अपनी राजनीति हैसियत पर गुमान है तो फिर मध्यप्रदेश की जमीन पर जाकर राजनीति क्यों नहीं करते? जबलपुर से जाकर आगामी लोकसभा का चुनाव लड़कर दिखा दें! जेडीयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते हुए बिहार के बाहर उन्होंने पार्टी को एक- डेढ़ दशकों में कितना विस्तार दिया, बताएं? बिहार के बाहर अपने अध्यक्षीय कार्यकाल में कितने विधायक- सांसद जितवा कर लाये, इसका हिसाब दें?

श्री मंडल ने कहा कि शरद जी को दूसरों की जमीन पर और दूसरों के कंधे पर कूद कर राजनीति करने की आदत हो गयी है जिसके चौतरफा उन्होंने सिर्फ एक वैचारिक आभामंडल और आडम्बर बनाकर जनता को बरगलाने का काम किया है। लोहिया, जेपी और बी.पी.मंडल की विरासत क्लेम करने के लिए शरदजी को दो बातें स्पष्ट करनी होंगी पहली कि वो परिवारवादी नहीं है और दूसरी कि वो भ्रष्टाचारियों के साथ नहीं है। लेकिन इन दोनों मामले में शरद जी का मुखौटा धीरे- धीरे जनता के सामने उतरने लगा है। 
 (नि. सं.)

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