15 अगस्त 2017

डॉ. बिनय कारक: न्यूरोफिजिशियन मिथिला के सपूत ने रचा चिकित्सा जगत में इतिहास

मिथिला की धरती न सिर्फ बिहार और देश बल्कि कई मामलों में पूरी दुनियाँ में अपनी प्रतिभा से डंका बजा चुकी है. कई प्रतिभाएं ऐसी कि दुनियाँ ने देखकर दांतों तले ऊँगली दबा ली. मिथिला की धरती ने एक बार फिर ऐसे सपूत को दुनियाँ के सामने लाया जिसने चिकित्सा के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया.

डीएम (न्यूरोलॉजी), पीएचडी, डी. एस-सी. के साथ-साथ रॉयल कॉलेज ऑफ फिजीशियन्स (लन्दन, एडिनबर्ग, ग्लासगो, आयरलैंड), रॉयल सोसायटी ऑफ ट्रॉपिकल मेडिसिन एन्ड हाइजिन (लन्दन), अमेरिकन कॉलेज ऑफ फिजिशियंश (अमेरिका) तथा अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी (अमेरिका) द्वारा फेलोशिप से सम्मानित डॉक्टर बिनय कारक को भारत का संभवत: ऐसा पहला न्यूरोफिजिशियन माना जाता है जिन्हें ये सम्मान हासिल हैं.

मिथिला की धरती मधुबनी जिले में जन्मे डॉक्टर बिनय कारक को छात्र जीवन से ही अति मेधावी माना जाता था और कहा जाता है कि यह न सिर्फ अपने सहपाठियों बल्कि अपने सीनियर छात्रों को भी पढ़ाया करते थे. वर्तमान में पटना में राजेंद्र नगर में अपने अस्पताल के जरिए बिहार तथा देश के अन्य क्षेत्रों के लोगों की सेवा कर रहे डॉक्टर बिनय कारक की चर्चा सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि USA से प्रकाशित ‘हू इज हू साइंस एंड इंजीनियरिंग’ नामक पुस्तक में भी की गई है. उनकी उपलब्धियां इतनी कि उत्तर भारत के प्रसिद्ध फिल्म निर्माण कंपनी दिनेश आनंद प्रोडक्शन द्वारा उनके जीवन पर एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की गई है और जब इतने बड़े चिकित्सक एक ख्याति देश और दुनिया में फैली तो जाहिर था इन्हें चिकित्सा जगत में सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मान ‘डॉ. बी सी रॉय राष्ट्रीय अवार्ड’ से भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी ने भी सम्मानित किया.

एक नजर डॉक्टर बिनय कारक के जीवनवृत्त पर:  डॉ. बिनय कारक बिहार के मधुबनी के रहने वाले हैं. स्वर्गीय रामप्रताप कारक और कमला देवी के पुत्र बिनय कारक को पढ़ाई का जुनून बचपन से ही था. मधुबनी शहर के गोकुल मथुरा सूरी समाज विद्यालय से मैट्रिक परीक्षा इन्होंने पास की. स्कूल में भी इन्हें विद्या रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया था. बताते हैं कि इंटर की पढ़ाई के दौरान मधुबनी के रामकृष्ण कॉलेज द्वारा कॉलेज मेरिट स्कॉलरशिप के लिए भी इन्हें चयनित किया गया. एक चिकित्सक बनकर समाज की सेवा करने की इच्छा बिनय को बचपन से थी और जाहिर था कि कठिन मेहनत करने वाले छात्र विनय ने पहले ही प्रयास में PMDT की परीक्षा पास कर प्रसिद्ध दरभंगा मेडिकल कॉलेज में अपना एडमिशन करवाया. वर्ष 1986 में MBBS की डिग्री हासिल कर वर्ष 1989 में डीएनबी (प्रारंभिक) की डिग्री और वर्ष 1990 में डीएमसीएच से ही डॉक्टर बिनय कारक ने DTM&H की उपाधि हासिल की. वर्ष 1991 में इन्होने एमडी (मेडिसिन) में दाखिला लिया और वर्ष 1994 में डॉक्टर डीएमसी से ही पीएचडी (मेडिसिन) की डिग्री हासिल की. पर डॉक्टर बिनय कारक के कदम यहीं नहीं रुके. वर्ष 1997 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से न्यूरोलॉजी में DM की डिग्री हासिल करने के बाद कोलकाता के प्रसिद्ध वुडलैंड हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर तथा मुंबई स्थित मेडिकल रिसर्च सेंटर से इन्होंने प्रशिक्षण हासिल किया.

डॉ. बिनय कारक के बचपन से मेधावी होने की बात मधुबनी के कई लोग बताते हैं. कहते हैं कि पिता श्री रामप्रताप कारक अक्सर कहा करते थे कि बिनय को ईश्वर का खास आशीर्वाद प्राप्त है और शायद ये बचपन में ही उस समय लग गया कि प्रारंभिक शिक्षा के दौरान बिनय को कक्षा 2 से सीधा कक्षा 6 का छात्र बना दिया गया. डिग्री और उपलब्धियों के बीच बिनय ख्याति पाते गए और वर्ष 1990 में इन्होंने BPSC से चयनित होकर बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग में अपना योगदान दिया और नालंदा मेडिकल कॉलेज के साथ-साथ पटना मेडिकल कॉलेज में भी पदस्थापित रहे.

लेकिन समाज सेवा का जुनून ऐसा कि इन्होंने सरकारी सेवा से पद त्याग कर दिया और अधिक से अधिक रोगियों की सेवा निजी तौर पर करने का संकल्प ले लिया. इनकी उपलब्धियों की फेहरिस्त इतनी लंबी है कि यदि हर उपलब्धि की चर्चा की जाए तो कई पन्ने भर जाएंगे. न्यूरोलॉजी संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के संगठनों से जब जुड़कर इन्होने सेवा दी तो इन्हें खूब सराहा गया. वर्ल्ड स्ट्रोक ऑर्गेनाइजेशन, न्यूयार्क एकेडमी ऑफ सायन्सेस, इन्टरनेशनल काउन्सिल ऑफ स्ट्रोक, अमेरिकन स्ट्रोक एसोसिएशन, एसोसिएशन ऑफ न्यूरो साइंटिस्ट ऑफ इस्टर्न इंडिया, इन्डियन एकेडमी ऑफ क्लिनिकल मेडिसिन, इन्डियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी, अमेरिकन एकेडमी और न्यूरोलॉजी, यूरोपियन फेडरेशन ऑफ न्यूरोलॉजिकल सोसायटी, यूरोपियन एकेडमी और न्यूरोलॉजी, इंटरनेशनल पार्किन्संस एंड मूवमेंट डिसऑर्डर सोसायटी और न्यूरोलॉजिकल सोसायटी ऑफ इंडिया जैसे कई संगठनों में डॉ. बिनय कारक की सेवा यादगार रही है.

इसके अलावे डॉ. बिनय कारक के अनुभव और रिसर्च न्यूरोलॉजी से संबंधित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कई पत्र पत्रिकाओं में भी प्रकाशित होते रहे, जिन्हें देश और दुनिया भर के चिकित्सकों ने अपनाया. दुनियाँ के कई प्रसिद्ध लेखकों के साथ मिलकर भी डॉक्टर कारक ने कई आर्टिकल लिखे जिनका प्रकाशन लंदन के पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल जर्नल, ब्रिटिश एपिलेप्सी एसोसिएशन, इंडियन पीडियाट्रिक्स, न्यूरोलॉजी इंडिया, जर्नल ऑफ उत्तर प्रदेश इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बिहार जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन, जर्नल ऑफ इंटरनल मेडिसिन ऑफ इंडिया, क्लीनिकल जर्नल ऑफ हाइपरटेंशन एवं पटना मेडिकल जर्नल ऑफ मेडिसिन में भी बहुत ही प्रमुखता के साथ किया गया.

डॉक्टर कारक के कुपोषित बच्चों में मैग्नेटिक स्टिमुलेशन और माइग्रेन पर किए रिसर्च ने इन्हें पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया. उन्होंने अपने शोध में मिर्गी, माइग्रेन तथा वज्रपात से चोटों को भी अलग तरीके से परिभाषित किया जो एक बड़ा उदाहरण माना जाता है. यही नहीं गरीबों के लिए समर्पित चिकित्सक होने का प्रमाण इन्होंने बिहार के कई जिलों में अपने पिता स्वर्गीय रामप्रताप कारक की याद में ‘रामप्रताप कारक नि:शुल्क चिकित्सा केंद्र’ के बैनर तले नि:शुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित कर साबित किया है. प्रमुख सामाजिक कार्यों में अहम भूमिका निभाने के साथ ही डॉक्टर कारक मंद बुद्धि एवं मानसिक रूप से विकलांग बच्चों की संस्था ‘स्पेशल ओलंपिक्स बिहार’ के अध्यक्ष पद पर भी रहे हैं. नालसा के द्वारा मानसिक रूप से बीमार और मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के लिए विभिन्न योजनाओं का भी मार्गदर्शन उन्होंने किया है और साथ ही देश के कई प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेजों में ऑनरेरी विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में न्यूरोलॉजी संबंधित रोगों पर अपना व्याख्यान देने के लिए भी डॉक्टर विनय कारक सुप्रसिद्ध रहे हैं.

पुस्तकें अपडेट्स इन न्यूरोलॉजी, जिरिएट्रिक मेडिसिन एपिकॉन 2007, 2015, 2016, 2017, मेडीअपडेटेड 1997 और रिसेन्ट एडवांटेज इन पीडियाट्रिक्स वॉल्यूम आठ में भी इनके रिसर्च के अनुभवों को काफी सराहा जा चुका है. डॉ. बिनय कारक ने पूरी दुनिया का दौरा कर कई देशों में आयोजित न्यूरोलॉजी से संबंधित कार्यशाला में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया तथा लोगों की प्रशंसा के पात्र बने. यही नहीं यह लंदन के सेंट जॉर्ज यूनिवर्सिटी के कार्डियोवस्कुलर साइंस विभाग में भी कॉलोबोरेटर के रुप में डॉ. कारक अपनी सेवा दे चुके हैं. वर्ष 2017 के जून में भी डॉ. कारक को यूरोपियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी एम्सटर्डम (नीदरलैंड) के थर्ड वर्ल्ड कांग्रेस में हिस्सा लेने का मौका मिला.

न्यूरो मेडिसिन के क्षेत्र में उनके अद्भुत योगदान को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय जीविनिका संस्थान द्वारा 'अग्रणी पेशेवर चिकित्सक' के रूप में भी डॉ. बिनय कारक को सम्मानित किया जा चुका है. डॉ. कारक की उपलब्धियों के आधार पर इन्हें डायरेक्ट ऑफ साइंस तथा भारतीय चिकित्सा संघ के द्वारा ऑनरेरी स्टेट प्रोफेसर की उपाधि से सम्मानित किया जा चुका है. यही नहीं प्रतिष्ठित ‘इंडिया ज्योति अवार्ड’ तथा अंतर्राष्ट्रीय सक्सेस अवेरनेस संस्थान द्वारा ‘ग्लोरी ऑफ इंडिया’ गोल्ड मेडल की उपाधि ने भी सूबे को चिकित्सा विज्ञान में अलग ख्याति दिलाई है. वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ़ साइंस, आर्ट एन्ड कम्युनिकेशन द्वारा स्नायु रोग पर किए गए उत्कृष्ट कार्यो के लिए इन्हें टाइम अचीवमेंट अवार्ड, Zee News के हेल्थ लिविंग अवार्ड 2016 तथा अंतर्राष्ट्रीय स्वास्थ्य केयर इंडस्ट्री अवार्ड 2017 के द्वारा बेस्ट न्यूरोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया के सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है. जुलाई 2017 की पहली तारीख को राष्ट्रीय चिकित्सा दिवस के अवसर पर डॉ. कारक हो भारतीय चिकित्सा संघ तथा बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के द्वारा न्यूरो मेडिसिन के क्षेत्र में भी असाधारण योगदान के लिए सम्मानित किया जा चुका है.

इतनी उपलब्धियों और सफलताओं के बाद डॉक्टर विनय कारक अपनी पूरी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और समाज के बड़े लोगों के आशीर्वाद, बड़े भाइयों के मार्गदर्शन और छोटों के प्यार को देते हैं. कहते हैं कि अगर सबों का प्यार और सहयोग नहीं मिला होता तो इतना कुछ कर पाना उनके लिए कभी संभव नहीं होता. डॉक्टर विनय कारक ना सिर्फ व्यवहार कुशल तथा सुलझे हुए इंसान हैं बल्कि गरीबों के प्रति इन की सहृदयता भी देखने को मिलती है. यदि ऐसा नहीं होता तो भारत के तत्कालीन महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों मिले ‘डॉ. बी सी रहे राष्ट्रीय अवार्ड, के साथ मिली राशि को यह मुख्यमंत्री राहत कोष में दान ना कर चुके होते.

डॉ. बिनय कारक मधेपुरा टाइम्स को बताते हैं कि सारे अवार्ड का श्रेय वह अपने मरीजों को भी देते हैं जिनके भरोसे ने ही उन्हें इस मुकाम को हासिल करने के लायक बनाया. इस प्रेरणादायक शख्स की इन पंक्तियों से ही आपके अन्दर ऊर्जा का संचार हो सकता है कि “इंसान को ज्ञान की खोज हमेशा जारी रखना चाहिए. कभी ये मान कर आराम नहीं करना चाहिए कि ये आविष्कार या खोज आखिरी है.”

[डॉ. बिनय कारक पर बनी डॉक्यूमेंट्री देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.)
(प्रस्तुति: राकेश सिंह)

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