01 जुलाई 2017

बिहार क्रिकेट का गुमनाम ‘धाकड़’ खिलाड़ी कुंदन सिंह

भारत में क्रिकेट महज एक खेल नहीं है; एक धर्म है, एक उत्सव है और भी ना जाने क्या क्या | अगर पाकिस्तान से मैच हो तो क्रिकेट एक युद्ध में बदल जाता है | देश में ऐसा जुनून किसी और खेल के लिए नहीं दिखता है |

क्रिकेटर यहाँ भगवान की तरह पूजे जाते हैं | इसलिए यहाँ लाखों बच्चे देश के लिए खेलना चाहते हैं | इन लाखों में 600-700 खिलाड़ी रणजी से लेकर आईपीएल तक खप पाते हैं और मुश्किल से 15 खिलाड़ी को इंडिया टीम में खेलने का मौका मिल पाता है | लेकिन इसके बाद जो खिलाड़ी बचते हैं उनकी जिन्दगी बहुत कठिन होती है | उन्होंने अपनी सारी उम्र खेलने में बितायी होती है लेकिन उन्हें अपनी जीविका के लिए खेल छोड़ कर कुछ और करना पड़ता है | 

लेकिन आज 46 साल की उम्र में भी अपने कोशी कमिश्नरी का एक खिलाड़ी है जिसने तमाम संघर्ष
करने के बाद भी खेलना नहीं छोड़ा | पत्नी का ताना हो या समाज की उपेक्षा, उन्हें डिगा नहीं पाया | उन्होंने अपना पहला मैच 1987  ईस्वी में 16 साल की उम्र में खेला | तब से लेकर वे आज तक खेल के मैदान में डटे हुए हैं | इस दौरान उन्होंने बिहार-बंगाल के इलाके में ऊँचे दर्जे की क्रिकेट खेली | शिवशंकर पाल और रिद्धिमान साहा जैसे अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ खेलने का मौका मिला | कुंदन सिंह एक ऐसे इलाके के खिलाड़ी थे जिनको पिछड़ा समझा जाता था | रणजी टीम चयन में पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर जैसे बड़े शहर का दबदबा होता था इसलिए इनको कभी मौका नहीं मिला | 2000 के बाद वैसे भी बिहार की मान्यता ख़तम हो गयी सो कुंदन सिंह के आगे खेलने की उम्मीद भी साथ ही साथ दफ़न हो गयी | उन्होंने बीच के दिनों में बंगाल से खेलने की उम्मीद में सिलीगुड़ी से लीग खेलना शुरू किया क्योंकि सबा करीम के रूप में एक उदहारण सामने था | करीम भी बिहार से थे और बंगाल से खेलते हुए इंडिया टीम तक पहुंचे थे |  

जब हम उनका इंटरव्यू करने पहुंचे तब भी वे अपने गाँव शंकरपुर (बलवा बाजार, सहरसा) के उसी मैदान में क्रिकेट मैच खेल रहे थे जिस मैदान में उन्होंने क्रिकेट का ककहरा सिखा | हमने उनसे उनके बचपन से लेकर अब तक के क्रिकेट जीवन के तमाम पहलुओं पर बात की | उनके बारे में एक किस्सा बहुत मशहूर है कि एक बार एक बैट्समैन उनकी गेंद की तेजी से इतना डर गया कि बैट-पेड सहित नदी में कूद गया | हमने इस किस्से की सच्चाई के बारे में भी उनसे जानने की कोशिश की | आप उनका पूरा इंटरव्यू यहाँ क्लिक करके सुन सकते हैं |


(रिपोर्ट: श्रीमंत जैनेन्द्र)

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