17 जून 2017

मधेपुरा में 'आरक्षण बचाओ-रोजगार बचाओ' को लेकर निकाला सामाजिक न्याय मार्च

रोजगार और आरक्षण पर मोदी सरकार के हमले के विरुद्ध मधेपुरा में मंडल सेना के तत्वाधान में आज शनिवार की शाम को 'आरक्षण बचाओ रोजगार बचाओ'  सामाजिक न्याय मार्च निकाला गया।

मौके पर सैकड़ों नौजवानों ने हाथ में मशाल लेकर, प्रो अरुण कुमार यादव, प्रो सूरज मंडल, प्रो जवाहर पासवान, प्रो ललन साहनी के नेतृत्व में सुव्यवस्थित तरीके से टीपी कॉलेज के दक्षिणी नवनिर्मित महावीर गेट पर एकत्रित होकर, फिर भूपेंद्र बाबू प्रतिमा से शुरू होकर, थाना चौक, नेताजी सुभाष चंद्र बोस प्रतिमा होते हुए कर्पूरी चौक तक जूलूस में निकले।

युवाओं की माँग है कि: 1. सरकारी रोजगार के अवसर कम करने या समाप्त करने के सभी कदम केंद्र व राज्य सरकार तुरंत वापस लें। रेलवे के निजीकरण पर तुरंत रोक लगे। एयर इण्डिया की बिक्री का आदेश वापस लिया जाय।
2. आरक्षण व्यवस्था को  संविधान सम्मत एवं अक्षुण्ण रखा जाए तथा आरक्षण में मोदी सरकार द्वारा की गई गैरकानूनी छेड़छाड़ को तुरंत रोका जाय।
3. सुप्रीम कोर्ट द्वारा आरक्षित वर्ग में नौकरी के संबंध में दिए गए गैरकानूनी आदेश कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों, को तुरंत निरस्त करते हुए, पहले से लागू आरक्षण की सही परिभाषा पुनः बहाल किया जाय। प्रोमोशन में आरक्षण लागू हो।

4.  मंडल आयोग को पूर्ण रूपसे लागू किये बगैर, तथा मंडल कमीशन की अनुशंसाओं को लागू किये जाने पर एक 'एक्शन टेकन रिपोर्ट' प्रस्तुत किये बगैर मोदी सरकार द्वारा नए पिछड़े वर्ग आयोग का गठन को तुरंत रोका जाए। 
5. राष्ट्रीय स्तर पर निजी मेडिकल कॉलेजों के परास्नातक कोर्स में से एससी, एसटी और ओबीसी का कोटा को अविलम्ब बहाल किया जाए।
6. न्यायपालिका में आरक्षण लागू किया जाए।
7. निजी क्षेत्र और ठेकेदारी व्यवस्था में आरक्षण लागू किया जाए।
8. OBC आरक्षण से गैर संवैधानिक क्रीमी लेयर (Creamy Layer) हटाया जाय ।
बताया गया कि इस बाबत सैकड़ों युवाओं का हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन प्रधान मंत्री को ही भेजा जा रहा है।
जूलूस में शामिल नौजवानों को सम्बोधित करते हुए विभिन्न वक्ताओं ने कहा कि, " संविधान के अनुच्छेद 340,341,342, 312 तथा अनुच्छेद 15(4),के अनुसार विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका तथा मीडिया तथा अन्य संस्थाओं में जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व होना चाहिए।
कहना था कि मोदी सरकार का रोजगार पर हमला हो रहा है. अनुसूचित जाति/जनजाति/OBCआरक्षण को निरस्त करने के लिए काँग्रेस समय से सरकारी नौकरियां ख़त्म की जा रही हैं। यह बड़ी साज़िश है। इस साज़िश के तहत केंद्र सरकार की नौकरियों में कमी करते हुए उन्हें निजी क्षेत्र या ठेकेदारी व्यवस्था में धकेला जा रहा है। रोजगार के सन्दर्भ में  74 मंत्रालयों और विभागों ने सरकार को बताया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ी जातियों की 2013 में 92,928 भर्तियां हुई थीं। 2014 में 72,077 भर्तियां हुईं। मगर 2015 में घटकर 8,436 रह गईं। नब्बे फीसदी गिरावट आई है।

मोदी सरकार का वादा था कि हर साल 2 करोड़ नौकरियां दी जाएंगी। लेकिन 13 लाख की मानव क्षमता रखने वाले रेलवे में अब मानव क्षमता 11 लाख है,  यानी रेलवे से भी 2 लाख नौकरियों की कटौती कर दी गई है। रेलवे जैसे ही हालात है सैन्य सेवा के है । यूपीएससी के पदों में भी कटौती हुई है।  2017 की यूपीएससी की परीक्षा के लिए 980 पद तय हुए हैं। पिछले पाँच साल में यह सबसे कम है।
सरकारी उच्च शिक्षा पर हमला है और सीटें कम करते हुए इन्हें "निजीकरण" करके कॉरपोरेट को सौंप दिया जायेगा।
1. मंडल आयोग को पूर्ण रूपसे लागू किये बगैर मोदी सरकार द्वारा नए पिछड़े वर्ग आयोग का गठन किया जा रहा है, यह आरक्षण हटाने की तैयारी है।
2.  उत्तर प्रदेश में ईवीएम गड़बड़ी कर सत्ता में आई आदित्यनाथ योगी सरकार ने आते ही बड़ा फैसला लेते हुए निजी मेडिकल कॉलेजों के परास्नातक कोर्स में से एससी, एसटी और ओबीसी का कोटा समाप्त कर दिया है। यह आरक्षण पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने अपनी सरकार के दौरान वर्ष 2006 में लागू किया था।
3. हाल में 120 पिछड़े वर्ग के सिविल सेवा में कम्पीट किये हुए अभ्यर्थियों को मोदी सरकार ने "क्रीमी लेयर" की नई परिभाषा लागू कर लिस्ट से हटा दिया । अनुसूचित जाति/जनजाति/OBC बैकलोग भरने का कोई ईरादा नहीं हैँ।
4. सुप्रीम कोर्ट ने आरक्षित वर्ग में नौकरी के संबंध में कहा है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवार को आरक्षित वर्ग में ही नौकरी मिलेगी, चाहे उसने सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा अंक क्यों न हासिल किए हों।
यह मोदी योगी सरकारों का अनुसूचित जाति/जनजाति/OBC आरक्षण हटाने के कदम का ट्रेलर है। असल सिनेमा नए पिछड़े वर्ग आयोग के गठन के बाद आएगा। ओबीसी में नई जातियों को शामिल करने के लिए संसद की इजाजत नहीं लेनी होगी, सिर्फ राष्ट्रपति का अनुमोदन लेना होगा। सामाजिक न्याय मुद्दे पर जनता से वोट लेने वाले तमाम राजनैतिक दल चुप हैं। मोदी सरकार उन्हें ब्लैकमेल कर चुप करा दिए हैं। भाजपा में शामिल अनुसूचित जाति/जनजाति/OBC के अधिकांश नेता अपने स्वार्थ में डूबे हुए हैं और समाज की हितों की रक्षा करने में असमर्थ हैं। संघर्ष हमें स्वयं करना होगा। हमें फिर से अपनी आज़ादी की लड़ाई लड़नी होगी। आरक्षण हम मूल निवासी बहुजन लेकर रहेगें।"

मंडल सेना के प्रवक्ता आर एन विद्रोही ने बताया कि मंडल सेना के तत्वाधान में रोजगार और आरक्षण के समर्थन में कई कार्यक्रम देश भर में किये जाने का भी आह्वान किया गया है ।

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