29 जून 2017

मधेपुरा में यौन शोषण की शिकार गर्भवती पीड़िता भटक रही न्याय के लिए

मधेपुरा में यौन शोषण की शिकार एक पीड़िता के पेट में पांच माह का गर्भ पल रहा है. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक नेइस बात का खुलासा तो किया है पर पुलिस की शिथिलता से अब तक आरोपी पकड़ से बाहर है.

मामला मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत सिंगियोंन पंचायत की पीड़िता का है. मिली जानकारी के अनुसार शादी का झांसा देकर पिछले एक वर्ष से आरोपी शख्स पीडिता के साथ यौन शोषण कर रहा था और गर्भ ठहर जाने के बाद आरोपी शख्स ने शादी से इंकार कर दिया. थक हार कर पीड़िता के परिजनों ने पंचायत के ग्राम कचहरी का सहारा लिया, लेकिन ग्राम कचहरी में बुलाई गयी पंचायत में आरोपी शख्स हाजिर नहीं हुआ. ग्राम कचहरी के सरपंच समेत स्थानीय पंचों ने भी तब जाकर पीड़ित परिजनों को कहा कि आप पुलिस का सहारा ले सकते हैं. इसके बाद पांच माह पूर्व मधेपुरा जिला मुख्यालय स्थित  महिला थाना में मामला दर्ज करवाया गया. पीडिता और पीडित परिजन न्याय को लेकर एसपी और बिहार के कई आलाधिकारी समेत राज्यपाल से भी पीड़ित परिजन न्याय की गुहार लगा चुके हैं. लेकिन आज तक पीड़िता को कोई न्याय नहीं मिल पा रहा है. 

दरअसल गाँव के मदरसा में पढ़ रही लड़की को मदरसे के एक युवक से प्यार हो गया और जन इश्क परवान चढ़ा तो वे सारी हदें पार कर गए. शादी रचाने के नाम पर युवक पिछले एक वर्षों से युवती का यौन शोषण. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर पीड़िता के पेट में पांच माह का गर्भ पल रहा है पर आरोपी शख्स खुलेआम घूम रहा है. पीड़ित परिजनों ने पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगते कहा कि पुलिस दबंग आरोपी से रुपये लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है. मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर महिला चिकित्सक डॉ अलका रानी भी मान रही भाई कि पीड़िता पांच माह से गर्भवती है. 

हालाँकि एसपी विकास कुमार ने किया परिजनों के द्वारा पुलिस पर लगाए गंभीर आरोपों को ख़ारिज करते कहा कि इस मामले में पुलिस अनुसंधान कर रही है. आरोपी नाबालिग है और मेडिकल जाँच के बाद आरोपी के विरुद्ध ठोस कार्रवाई होगी.

अब देखना है कि आखिर मधेपुरा की इस पीड़िता को कब तक न्याय मिलता है? सरकार और सिस्टम पर एक बड़ा सवाल है. कानून की शब्दावली में कहा गया है कि ‘Justice delayed, justice denied’, यानी न्याय में देरी न्याय नहीं मिलने जैसा है.

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