05 जून 2017

#justice_for_Nancy: फेसबुक से शुरू हुआ अभियान और कैंडल मार्च रहा अभूतपूर्व

मधुबनी जिले के महादेव मठ की मासूम नैन्सी झा की नृसंश हत्या से सभी मर्माहत हैं. जिस क्रूरता से उस मासूम बच्ची की हत्या हुई है उससे सारा समाज हतप्रभ और विचलित है.

सबके होठों पर एक ही सवाल कि आखिर उस अबोध बच्ची ने किसी का क्या बिगाड़ा था कि उसे किसी ने इस घृणित तरीके से मारा. इस दिल दहला देने वाली घटना से मर्माहत लोगों का आक्रोश अब उबाल लेना शुरू कर दिया है. पुलिस की ढुलमुल कार्यवाही, शिथिल व संदेहास्पद जाँच के कारण संपूर्ण प्रदेश के लोग असंतोष जाहिर कर रहे हैं.

प्रदेश के युवाओं ने प्रतिक्रियास्वरूप सड़क पर आंदोलन करना प्रारंभ कर दिया है. इसकी गूँज अब कोशी में भी गूँजने लगी है. सहरसा में भी युवाओं ने इसके विरोधस्वरूप फेसबुक पर एक मुहीम चलाकर हजारों की संख्या में युवक एवम् युवतियाँ इकट्ठे होकर शहर के वीर कुँवर सिंह चौक से शंकर चौक तक कैंडिल मार्च निकाला.

यहाँ इस अभियान की सबसे अद्भुत बात यह रही कि न कोई नेतृत्व और न ही राजनीतिक हिस्सेदारी, सिर्फ फेसबुक पोस्ट की अपील पर सभी युवा स्वत:स्फूर्त इकट्ठे हुए थे. राजनीतिक और जातिगत भावना से परे होकर इकट्ठे हुए लोगों ये चाह थी कि अब कोई और बेटी नैन्सी न बने. सरकार सबको सुरक्षा की गारंटी दे. अबतक की पुलिसिया कार्यवाही से सभी असंतुष्ट दिखे तथा एक निष्पक्ष न्याय की गुहार लगा रहे थे. इस मुहीम में सबकी भागीदारी थी परंतु फेसबुक पोस्ट के द्वारा विशेष मुहीम चलाकर 'सामाजिक बदलाव' की अपेक्षा प्रबल थी.

फेसबुक पोस्ट के द्वारा अपील की शुरूआत करने वाले सोमू आनंद ने बताया कि लोगों में ऐसी चेतना जागृत हो जिससे देश में हर कोई बेटियों के सुरक्षा के प्रति सजग हो और बदलाव ऐसी हो कि सभी बहू-बेटियों को सम्मान की निगाह से देखें. इसके लिए पिछले कई दिनों से सोमू आनंद और उनके अन्य दोस्त एक विशेष फोटो को तैयार कर रहे थे.. सैकड़ों लोगों ने #justice_for_Nancy का हैशटैग लगाकर अपने वाल पर इस फोटो को साझा किया और कैंपेनिंग का हिस्सा बन गए. सिर्फ सहरसा ही नहीं बल्कि फेसबुक पोस्ट के द्वारा फैलाई गई अपील पर आसपास के जिलों से भी कई युवा जुलूस की शक्ल में पहुँचकर अपनी हिस्सेदारी निभायी. सिर्फ फेसबुक यूजर्स द्वारा आहूत ऐसा आंदोलन सहरसा में पहली बार देखा गया जो नैन्सी के लिए न्याय की मांग कर रहे थे. सोमू आनंद ने बताया कि यहाँ इकट्ठे होकर सभी ने ये प्रण किया है कि जबतक सभी लड़कियां अपने को सुरक्षित नहीं मान लेंगी तबतक ये आंदोलन चलता रहेगा. ये आंदोलन सिर्फ कैंडिल मार्च तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि आंदोलन को अनवरत चलाकर सरकार को लड़कियों के हितों के लिए कड़े कानून बनाने को बाध्य भी किया जाएगा.  
                    
आयोजन में राहुल बनगाँव, मनीष कुमार, साकेत आनंद, अमित आनंद आदि की महती भूमिका रही जबकि जाति-धर्म-पार्टी से ऊपर उठकर कई सौ लोगों का इस अभियान का हिस्सा बनना एक बार फिर ये दर्शा गया कि बेटियों की सुरक्षा के लिए कोसी में सोशल मीडिया के संवेदनशील यूजर्स भी किसी से कम नहीं हैं.

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