10 जून 2017

मृत बच्चे को जिन्दा कराने के लिए डायन बता कर दो विधवा को ग्रामीणों ने बनाया बंधक

मधेपुरा जिले के पुरैनी थानाक्षेत्र के  दुर्गापुर ग्राम कचहरी के वर्तमान सरपंच चितरंजन ठाकुर के एक वर्षीय पुत्र के आकस्मिक मृत्यु के बाद परिजन व ग्रामीण दो विधवा को बंधक बना लिया.

ग्रामीणों के अंधविश्वास का आलम ये रहा की दोनों विधवा पर डायन का आरोप लगाकर उन्हें पहले बंधक बनाया और फिर उनसे बच्चे को जिन्दा करने को कहने लगे. इसकी सूचना जब पुरैनी पुलिस को मिली तो घटनास्थल पर पहुंचे पुरैनी थानाध्यक्ष ने बंधक को छुड़ाने का प्रयास किया तो अंधविश्वास  परिजन व ग्रामीण पर इस कदर हावी था कि वे मारपीट कर रहे महिला को छुड़ाने गई पुलिस से हाथापाई करने लगे. पुरैनी पुलिस ने काफी मशक्कत कर बंधक दो में से एक महिला को किसी तरह परिजन व ग्रामीणो के चंगुल से मुक्त करा लिया और थाना ले आये। उधर महिला को छुड़ाने से ग्रामीणो व परिजन का आक्रोश और भड़क उठा । थानाध्यक्ष ने घटना की सूचना आलाधिकारियों को दी.

सूचना पाते ही अनुमंडल पदाधिकारी शेख जियाउल हसन, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अरूण कुमार दुबे,  इंस्पेक्टर सुरेश राम, उदाकिशुनगंज थानाध्यक्ष के बी सिंह, चौसा थानाध्यक्ष सुमन सिंह व  आलमनगर थानाध्यक्ष सुनील कुमार अपने पुलिस बल के साथ दुर्गापुर पहुंचे। अधिकारियों ने परिजन व ग्रामीण को समझाने का हर संभव प्रयास किया लेकिन अंधविश्वास मे भड़े ग्रामीण व परिजन का बस यही कहना था कि पुलिस छुड़ाई गई बंधक कथित डायन महिला को यहां ग्रामीण के समक्ष लाये वह बच्चे को जिन्दा कर देगी. पुलिस बंधक एक और महिला को परिजन व ग्रामीण के गिरफ्त से छुड़ाने मे विफल रही  प्रशासन धीरे-धीरे वहां से खिसकने लगे व पुरैनी थाना पर मध्य रात्रि तक जमे रहे।

शुक्रवार की  संध्या बेला से देर रात्रि तक चले अंधविश्वास से लबरेज इस हाई वोल्टेज ड्रामा के आगे प्रशासन मूकदर्शक बनी रही और लगातार समझाने का प्रयास किया गया अंततः बंधक एक और महिला को बिना छुड़ाये बेरंग लौट गयी.

वहीँ परिजन का आक्रोश भी रात ढलने के साथ ही ढल गया. शनिवार की सुबह बच्चे को परिजन ने दफना दिया. वहीं शनिवार को मिली जानकारी के अनुसार ग्रामीण ने बंधक बनाए महिला उत्तमा देवी 61 वर्षीय को भी छोड़ दिया.

क्या है पूरा मामला: ग्रामीणों व परिजनों के अनुसार दुर्गापुर ग्राम कचहरी के वर्तमान सरपंच चितरंजन ठाकुर के एक वर्षीय पुत्र का आकस्मिक मौत हो गई. परिजनों का कहना था कि वे महिलायें उस दिन उसके घर पर आयी और उनके जाने के बाद बच्चे की मृत्यु हो गयी. घटना शुक्रवार के दोपहर की ही है. अंधविश्वास में डूबे ग्रामीण ने दोनो विधवा महिला को डायन बताकर पकड़ लिया और बच्चे को जिन्दा करने को कहा. वही किसी ने इसकी सूचना थानाध्यक्ष पुरैनी को दे दी. थानाध्यक्ष राजेश कुमार रंजन अपने पुलिस बल के साथ सरपंच के घर पहुंचे और बंधक महिला को छोड़ने को कहा तो ग्रामीण पुलिस से भिड गये. पुरैनी थानाध्यक्ष ने काफी मशक्कत कर एक बंधक को ग्रामीण व परिजन के चंगुल से मुक्त कराया.

दूसरी तरफ अंचलाधिकारी अशोक कुमार मंडल की देखरेख मे चिकित्सक डाक्टर विनीत भारती ने बच्चे को जांच की तो मृत पाया. चिकित्सक के समझाने पर भी ग्रामीण नही माने. उनकी बस एक स्वर से यही मांग थी कि एक महिला जिसे पुलिस ले गयी है उसे भी ग्रामीण के हवाले करे, दोनो मिलकर बच्चे को जीवित कर देगी. अंधविश्वास इस कदर हावी था कि सरपंच स्वंय इस बात पर अड़े हुए थे तो ग्रामीण का क्या कहना वही प्रशासन किसी भी परिस्थिति मे बंधक बनी एक और महिला को मुक्त कराने के फिराक मे थी. लेकिन ग्रामीणो की भीड़ व आक्रोश के सामने प्रशासन ने भी सख्ती से पेश आना उचित न समझा. मध्य रात्रि तक समझाने का भरसक प्रयास करने के बाद भी जब ग्रामीण अपने जिद पर ही अड़े रहे तो प्रशासन यह कहकर वहां से खिसक गई कि मृत बच्चे को थाना पर ही लाओ और उस महिला को भी साथ ले आओ और धीरे-धीरे एक एक कर सभी प्रशासनिक अधिकारी वहां से निकलकर थाने पर आकर जम गये. पर ग्रामीणों ने बच्चे व बंधक महिला को लेकर थाना जाना उचित न समझा और देर संध्या से मध्यरात्रि तक चले हाईवोलटेज ड्रामा के बाद परिजन ने जहां बच्चे को शनिवार की सुबह दफना दिया वही बंधक दूसरी महिला को भी मुक्त कर दिया.

इस बाबत थानाध्यक्ष राजेश कुमार रंजन ने बताया कि एक पीड़ित विधवा के द्वारा दिये गये आवेदन पर कारवाई की जा रही है. वहीँ एक विधवा को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल मधेपुरा रेफर कर दिया गया है.
         
पूरे घटनाक्रम में सबसे हैरत की बात यो ये है कि देश की आजादी को 6 दशक से भी अधिक समय हो गए और जहाँ आज देश के सर्वोच्च पदों को महिलाएं सुशोभित कर रही है वहीँ शिक्षा के अभाव के कारण कई जगह अंधविश्वास इस कदर हावी है कि महिलाओ पर जुल्म ढाने वाली कुप्रथाएं बदस्तूर चल रही है, जिसका जीता जागता स्वरूप यह घटनाक्रम है. एक तरफ हम डिजिटल इंडिया की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ आज भी गांवो मे डायन, जादू-टोना जैसे अंधविश्वास लोगों पर हावी है.

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