02 मई 2017

जीविका के साथ मनरेगा का होगा गठजोड़: बदलेगी रोजगार सृजन की सूरत

सरकार महसूस कर रही है कि मनरेगा को सफल तभी माना जाएगा जब जरूरतमंद गरीब निबंधित मजदूरों को रोजगार मिल सके।
लिहाजा अब काम खोज कर जीविका की स्वंय सहायता समूह की दीदी लाएगी और मजदूरों को प्रोत्साहित कर उन्हें काम पर लगा कर रोजगार सृजन कराएगी।
 
उपरोक्त बातें यहां डी आर डी ए सभागार में एक दिवसीय जीविका, मनरेगा और मलबरी योजना के बीच अभिसरण या समन्वय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए जीविका (बिहार) के योजना प्रबंधक नीरज कुमार सिंह ने मंगलवार को कही।

कार्यशाला में उन्होंने बताया कि मनरेगा का सफल कार्यान्वयन तभी हो सकता है जब इसके लिए योजनाओं का चयन कर उन्हें कार्यान्वित किया जाय। लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा है। इसके लिए अब जीविका की दीदी अपने पंचायत के गरीब निबंधित मजदूरों को रोजगार देने के लिए उनके लिए तालाब निर्माण, मलबरी के लिए पौधारोपण आदि की योजना में उन्हें काम करने के लिए प्रोत्साहित करेंगी। मनरेगा में पर्याप्त राशि उपलब्ध है। लिहाज़ा राशि की कमी नहीं होंगी।जिले में जीविका का जुड़ाव सवा दो लाख परिवारों से है।अभी आमतौर पर मनरेगा में मानव दिवस का सृजन लक्ष्य के मुकाबले 80 प्रतिशत ही हो पाता है।लेकिन जीविका से जुड़ाव के बाद यह शत प्रतिशत तक हो पाएगी।

      कार्यशाला में उपस्थित मलबरी के सहायक निदेशक ने भी जिले के दो प्रखंडों कुमार खंड और मुरलीगंज में शुरू की जा रही मलबरी उत्पादन योजना की जानकारी देकर जीविका दीदी को इससे जोड़कर योजना को सफल बनाने की बात कही।

जीविका के प्रशिक्षण व्यवस्थापक राकेश कुमार नीरज ने इस समन्वय के विभिन्न आयामों की जानकारी दी। डीपी एम आर के निखिल ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता करते हुए उप विकास आयुक्त मिथिलेश कुमार ने जिले में मनरेगा के सफल कार्यान्वयन के लिए जीविका के साथ समन्वय को व्यावहारिक बताते हुए आह्वान किया कि सब मिलकर इस योजना को सफल बनाएं। कार्यशाला में मनरेगा के सभी डीपी ओ सहित जीविका के कर्मी व पदाधिकारी उपस्थित थे।

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