17 मई 2017

एसबीआई की शाखा से ग्राहक के खाते से फर्जी दस्तखत कर की गई निकासी !

आज तक आपने बैंक खाते के एटीएम व इंटरनेट से रूपये उड़ाने की बात सुनी होगी, लेकिन जिले में एक चौकाने वाली घटना में निकासी फॉर्म पर खाताधारक के फर्जी दस्तखत कर रुपये की अवैध निकासी के आरोप का मामला सामने आया है.


जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत रामपुर भारतीय स्टेट बैंक शाखा में हुई फर्जी निकासी का मामला प्रकाश में आया है। मिली जानकारी अनुसार रामपुर स्टेट बैंक शाखा के खाता धारक दिलीप यादव पिता चंदेश्वरी यादव ग्राम खुशरूपट्टी मैलवाड़ा टोला , थाना मुरलीगंज, जिला मधेपुरा निवासी ने बैंक शाखा पर आरोप लगाया है कि उनके खाता संख्या 30987738532 से विभिन्न तारीखों को फर्जी तरीके से रुपये की निकासी की गई है। इस फर्जी निकासी के सम्बन्ध में खाता धारक दिलीप यादव ने बताया कि मेरे खाते से दिनांक 16/1/2017 को 22000 (बाईस हजार ), 2/3/2017 को 24000 ( चौबीस हजार ) और 4/3/2017 को 24000 ( चौबीस हजार ) कुल 68000 रुपये की फर्जी निकासी की गई है। उन्होंने आगे बताया कि जब हमने अपना पासबुक उपडेट करवाया तो मैं हैरान हो गया कि कैसे मेरे बिना अनुमति के रुपया खाते से निकासी हुई। इस फर्जी निकासी की शिकायत की लिखित आवेदन दे कर न्याय की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि शाखा प्रबन्धक के द्वारा आश्वासन भी दिया गया कि कुछ दिन समय लगेगा, जांच कर अवश्य न्याय मिलेगा आप निश्चिन्त रहे। कई दिनों के बाद जब पुनः मैं बैंक शाखा पहुंचा तो न्याय के बदले मुझे ही फटकार लगा कर मेरे ऊपर ही फर्जीवाड़े का आरोप लगाने लगे ।

बेचारा पीड़ित दिलीप यादव को जब कहीं न्याय नही मिला तो थक हार कर मधेपुरा टाइम्स के पास अपने लिखित आवेदन और पासबुक ले कर पहुंचा और आप बीती सुनाई. मधेपुरा टाइम्स की टीम ने रामपुर भारतीय स्टेट बैंक शाखा पहुँच कर शाखा प्रबंधक राधा कृष्ण राम से पूछताछ की तो उन्होंने कहा कि ऐसा नही हो सकता उनके खाते से स्व निकासी की गई है आप चाहे तो निकासी फॉर्म देख सकते हैं। पर निकासी फॉर्म में तीनो दस्तखत अलग अलग प्रतीत होने पर शाखा प्रबंधक ने कहा कि इसमें कैश काउंटर के कर्मचारी की गलती भी हो सकती है, इस मामले की बारीकी से जांच करने पर सच्चाई सामने आएगी.
बैंक की विश्वसनीयता पर लगा प्रश्नचिन्ह: ‌गौरतलब हो कि लोग दिन रात के मेहनत से पाई पाई जोड़कर जमा किये गए रुपये की सुरक्षा के लिए बैंकों में अपनी धनराशि जमा करते हैं और विश्वस्त रहते है कि उनका रुपया सुरक्षित रखा है। लेकिन यदि बैंक की लापरवाही के कारण फर्जी दस्तखत कर रुपये की निकासी हो जाती है और गरीब खाताधारक को जल्द न्याय नही मिलता है तब बैंकों के ग्राहक के प्रति विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगता है। खैर जो भी हो, ताजा मामला काफी संवेदनशील है और अब देखना है कि क्या इस मामले के गहन जांच में क्या सामने उभर कर आता है.

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