31 मई 2017

पढ़ाई का जूनून पाली विकलांग चंदा की मदद को बढ़े मधेपुरा डीएम के हाथ

कहते हैं पहले खुद में खुद्दारी और जूनून पालिए, फिर तो ज़माने के हाथ आपकी मदद के लिए उठेंगे ही. मधेपुरा के जिलाधिकारी मो० सोहैल ने समिधा ग्रुप कौशल विकास केंद्र में पढ़ने माँ के साथ आने वाली पायल उर्फ़ चंदा के प्रति आगे बढ़कर संवेदनशीलता दिखाई तो विकलांग चंदा की राहें आसान होती दिख रही है.

हम अपने जागरूक पाठकों को बता दें कि सिर्फ मधेपुरा टाइम्स ने विकलांग चंदा के संघर्ष की पूरी कहानी ‘ए माँ तेरी सूरत से अलग...’: 17 वर्षों से गोद में ढोकर बेटी को शिक्षा दिला रही एक माँ, इसी 27 मई को प्रमुखता से प्रकाशित की थी, जिसके बाद मधेपुरा डीएम ने संज्ञान लेते हुए चंदा के बारे में पूरी जानकारी ली और उनके निर्देश पर मंगलवार को मधेपुरा जिला सामाजिक सुरक्षा कोषांग के कर्मचारी समिधा ग्रुप पहुंचे और चंदा तथा उसे गोद में ढोकर 17 वर्षों से पढ़ाने वाली भान तेकठी निवासी उसकी माँ कंचन देवी से पूरी जानकारी ली और फॉर्म भी भरवाया ताकि उसे अधिकतम सरकारी सहायता दी जा सके.

इसके बाद आज जिलाधिकारी ने चंदा को एक ट्राई-सायकिल भी दिलाई ताकि संघर्ष के रास्ते पर चंदा को आगे बढ़ने में कुछ आसानी हो सके. मौके पर जब समिधा ग्रुप के संचालक संदीप शांडिल्य ने चंदा को मोटर ट्राई-सायकिल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया तो जिलाधिकारी ने मंत्री मद से इसे दिलाने में हर संभव सहायता का आश्वासन दिया.

जाहिर है, बेटियां यदि खुद में शिक्षा का जूनून पाल ले तो समाज को मदद के हाथ बढाने ही चाहिए ताकि समाज में बेटियों को उचित मान-सम्मान हासिल हो सके. उस पर यदि मधेपुरा डीएम जैसे पदाधिकारी अपनी संवेदनशीलता दिखाने आगे आ जाते हैं तो बेटियों का मनोबल ऊँचा होना भी तय है.

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