14 अप्रैल 2017

बाबा विशु का दूधाभिषेक: उमड़ी 4 लाख की भीड़, बही दूध की नदी (देखें वीडियो)

पूर्वोतर बिहार के मधेपुरा जिला के चौसा प्रखंड के लौआलगान पचरासी में स्थित सबसे चर्चित लोक देवता बाबा विशु मेला शरू मेला बाबा विशु की जय घोष के साथ प्रारंभ  हो गया ।

     पहले दिन के मेला में करीब 4 लाख लोगों ने बाबा विशु का दूधाभिषेक किया। विभिन्न राज्यों से आए लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा बिशु की समाधि स्थल पर अपने साथ लाए दूध का अभिषेक कर अपनी सुख शांति और पशु की रक्षा की कामना की। प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी मेला समिति एवं चरवाहा संघ द्वारा भव्य  मेला का आयोजन किया गया। मेला में सर्कस, सिनेमा, मौत का कुआं, रामझूला झूला, मिनी ट्रेन, जादूघर समेत विभिन्न प्रकार की दुकानें आकर्षण का केंद्र है । शहीद योगेंद्र तूफान की स्मृति में कुश्ती दंगल का भी आयोजन किया गया।

जानिए बाबा बिशु को:  विभिन स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार मुगल बादशाह मोहम्मद शाह रंगीला के शासनकाल में 1719 ईसवी में बाबा बिशु का उद्भव हुआ था । कोसी एवं अंग प्रदेश समेत पूर्वोत्तर बिहार में बाबा बिशु ने काफी प्रसिद्धि पाई और इनके प्रताप की वजह से ही पशुपालक अपने पशु के पहले दूध से बाबा का अभिषेक करते हैं । बाबा बिशु की वीरगाथा एवं पशु प्रेम को चरवाहों ने अपनी भाषा में लोकगीत को पिरोकर 349 वर्षों से पीढ़ी दर पीढ़ी लगातार गा कर रखा है । लेकिन लोक आस्था का केंद्र विकास से कोसों दूर है । राज्य सरकार की घोषणा के बाद भी इस के पर्यटन स्थल के रुप में विकसित करने में उदासीनता एवं लापरवाही बरती जा रही है । बस राजकीय स्थल को पर्यटनस्थल बनाए जाने की बात कमोबेश सभी राजनेताओं ने की है पर आज तक इस दिशा में सच्चे प्रयास का अभाव देखा जा रहा है ।
    मालूम हो कि संपूर्ण बिहार में खुलने वाले चरवाहा विद्यालय का प्रेरणा स्रोत इसी पर्वतीय स्थल को दिया जाता है भले की चरवाहा विद्यालय बंदी के कगार पर है । बाबा विशु राउत लोक देवता है जो पशुपालक एवं पशुओं के हितार्थ देवता माने जाते हैं । यहां बड़ी संख्या में पैदल चलकर अपने लिए मन्नत मांगते हैं । ऐसी मान्यता है कि समाधि स्थल पर कच्चा दूध चढ़ाया जाता है और दिन गुजर जाने के बाद भी यह दूध खराब नहीं होता है । आज भी महिला समेत लाखों श्रद्धालु एवं पशुपालन दिन के मेले में दुधारू पशुओं का दूध चढ़ाया एवं स्वस्थ रहने की मनोकामना पूरी करने की प्रार्थना की पूजा अर्चना में सैकड़ो मन दूध चढ़ाया जिसे मेला में दूध की धारा बहने लगी।
      मालूम हो कि बाबा विशु राउत  स्थान में सप्ताह में 2 दिन सोमवार और शुक्रवार को  बैरागी (जोनर) लगता है। इस दिन दूर दराज से  लोग  अपने पशुओं के दूध को लेकर  बाबा बिशु को  दूध अर्पित करते हैं  और प्रसाद के रूप में दही चूड़ा ग्रहण करते हैं। आज शुक्रवार होने के वजह से काफी भीड़ देखने को मिली । यहाँ तक कि लोगों का मेले में पैदल चलना भी दुश्वार था। प्रशासन को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
   इस मेला में उदाकिशुनगंज अनुमंडल पदाधिकरी शेख जियाउल हसन, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी अरुण कुमार दुबे प्रसाशनिक व्यवस्था पर नजर गड़ाए हुए थे। मधेपुरा पुलिस अधीक्षक विकास कुमार भी मेले का निरीक्षण करने आए थे लेकिन भीड़ की वजह से मेला से करीब 5 किलो मीटर पहले उनके काफिले को वापिस होना पड़ा।                     

     उधर शहीद योगेंद्र तूफान की स्मृति में भाग्य कुश्ती दंगल का आयोजन किया गया जिसमें राज्य स्तरीय पहलवानों ने बाजी लगाया । मेला में किसी प्रकार की कोई घटना ना हो इसके लिए मंदिर परिसर में विशेष पुलिस कैंप की व्यवस्था की गई है । मेला में मेला आयोजन समिति के राम देव सिंह, कैलाश यादव, मुर्शीद आलम, अर्जुन यादव, प्रशांत यादव, सुधीर सिंह, पूर्व सरपंच मुन्ना यादव, विश्वनाथ यादव, छोटेलाल शर्मा, सदानंद यादव, जागेश्वर यादव, विलास मंडल. राजू सिंह, पूर्व मुखिया नीरज सिंह उमाकांत सिंह, बेचन यादव, प्रमोद यादव आदि व्यवस्थापक एवं श्रद्धालुओं की सेवा में लगे दिखे । प्रशासन को भी जाम हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ी ।
(देखें मेले और दूधाभिषेक का वीडियो, यहाँ क्लिक करें.)

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...