04 अप्रैल 2017

सिंहेश्वर बाजार में एनएच विभाग की मार्किंग का विरोध: आन्दोलन करेंगे बाजारवासी

मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर बाजार में एक सप्ताह पूर्व एनएच विभाग के द्वारा मापी करा कर एनएच 106 के किनारे बसे लोगों की जमीन को कथित तौर पर सड़क की जमीन बताने से बाजारवासियों में घोर असंतोष का माहौल है ।

   खास तौर से निर्माण कार्य एजेंसी के द्वारा सड़क किनारे बसे लोगों के घरों पर मार्किंग किये जाने के बाद प्रभावित होने वालों का आक्रोश अब आंदोलन का रूप लेते जा रहा है। आंदोलन की दिशा को निर्धारित करने के लिए मंगलवार को रामजानकी ठाकुरबाड़ी में बाजारवासियों की एक महत्वपूर्ण बैठक भी की गई। लोगों ने कहा कि सिंहेश्वर के विकासात्मक कार्य का सभी स्वागत करते हैं. लेकिन ऐसा लगता है कि डीपीरआर बनाने वाली कंपनी को पूर्व में कुछ कन्फ्यूजन हुआ होगा, जिस कारण से आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है।
     लोगों ने डीएम से उम्मीद जताया कि वे सभी साक्ष्यों को स्वयं अवलोकन करने के बाद ही आगे का कोई निर्णय लें और सड़क निर्माण कंपनी को उसी आधार पर कार्यवाही करने का आदेश दें। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि गुरुवार को एक शिष्टमंडल साक्ष्यों के साथ डीएम से भेंटकर उन्हें बाजारवासियों की पीड़ा से अवगत कराएगा।
    बैठक की अध्यक्षता व्यवसायी गणपत राज शर्मा ने की। मौके पर रमेशचंद्र भगत, जगदीश चौधरी, भरतचंद्र भगत, अरुण प्राणसुखका, अरुण भगत, ओंकार मादी, पवन भगत, अनिल भगत, चांद आलम, राजीव कुमार बबलू, अशोक भगत, संजय पाठक, चंद्रशेखर चौधरी, सचिदानंद चौधरी, प्रमोद जयसवाल, मनोज चौधरी, अजीत सिंह, प्रकाश जयसवाल, शशि भगत, अशोक साह, मुकेश दास, राजेश भगत, दीपक अग्रवाल, सूरज दास समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

 क्या कहते हैं बाजारवासी?: एक सप्ताह पूर्व जब एनएच निर्माण कार्य एजेंसी के द्वारा लोगों के घरों पर मार्किंग आरम्भ की गई तो प्रभावित होने वाले लोगों ने भी अपने स्तर से अपनी जमीन की भौतिक स्थिति की छानबीन शुरू कर दी। छानबीन के बाद लोगों का कहना है कि विभिन्न नक्शा के आधार पर अलग-अलग जगहों पर सड़क की चौड़ाई  अलग-अलग है। लोगों का कहना है कि जो मार्किंग किया गया है, वह सरासर गलत है। इस मार्किग के कारण बाजार के कई बड़े-बुजुर्ग सदमे में हैं और कुछ लोगों को गंभीर स्थिति में इलाज भी कराया जा रहा है। ऐसे ही बड़े-बुजुर्गों का कहना है कि सड़क की जमीन जहां कहीं भी है, उस पर सरकार का हक बनता है. लेकिन जिस प्रकार से लोगों की निजी जमीन को गलत तरीके से एनएच निर्माण कार्य में जुटे लोग सरकारी बता रहे हैं, उसका बाजारवासी शान्तिपूर्ण तरीके से विरोध करेंगे। 

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