25 अप्रैल 2017

कृषि समन्वयकों ने किया बैठक का बहिष्कार, कृषि अनुदान में हेराफेरी का आरोप

बिहार सरकार के नियोजन राज में मात्र पंद्रह हजार मासिक मानदेय पर कृषि स्नातक डिग्री धारी होने के बावजूद कार्य कर रहे कृषि समन्वयकों के सब्र का पैमाना अब छलक गया है।

मंगलवार को डी आर डी ए में साप्ताहिक बैठक करने आए समन्वयक अपने पदाधिकारी के रवैये से आजीज आकर बहिष्कार कर बाहर निकाल गए।आक्रोशित समन्वयकों ने जिलाधिकारी को आवेदन देकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है।

क्या है मामला: दरअसल कृषि विभाग द्वारा किसानो को अनुदानित दर पर बीज व कृषि यंत्र मुहैया कराने की योजना जारी है।लेकिन इस वर्ष इसके लिए आवंटित अनुदान की राशि का अधिकांश हिस्सा व्यय नहीं हो सकी और नियमानुसार शेष बची राशि को सरेंडर करना पड़ा। इसके लिए समन्वयकों को जिम्मेदार मानकर इनमें से कई को अब जिले के दूर दूर के प्रखंडों में स्थानांतरित किया जा रहा है।

क्या कहते हैं समन्वयक: आंदोलित समन्वयकों का कहना है कि इस मामले में हमें नाहक दोषी ठहराया जा रहा है। स्थिति यह है कि अनुदान पर दी जानेवाली बीज की गुणवत्ता उपयुक्त नहीं है और किसान अपनी राशि लगा कर उसे खरीदना नहीं चाहते। इसी प्रकार अनुदान पर दी जाने वाली कृषि उपकरणों की एक तो कीमत अधिक है और फिर किसानों को तत्काल अपनी राशि से इसे खरीदना पड़ता है। लेकिन अनुदान जारी करने में किसानों को बार बार कृषि विभाग में चक्कर लगाना पड़ता है और फिर भी समय पर अनुदान की राशि किसानों के खाते में नहीं भेजी जाती है।ऐसे में हमलोग लाख कोशिश कर किसानों को मनाते हैं तो भी वे अनुदान योजना के लाभार्थी बनने से हिचकते हैं। हमलोग विभागीय बैठक में इस सच्चाई को बयान करते हैं तो हमें उल्टे डाट दिया जाता है।
         आक्रोशित कृषि समन्वयकों की यह भी व्यथा है कि उन्हें नियुक्ति काल से ही कृषि स्नातक होने के बावजूद मात्र पंद्रह हजार रू मासिक मानदेय चार चार माह पर भुगतान होता है। हमलोगो को प्रति सप्ताह मंगलवार को जिला में बैठक में बुलाया जाता है।अपने क्षेत्र में गांव गांव घूमना पड़ता है। हमारी सारी मेहनत तब धरी रह जाती है जब किसानों द्वारा अनुदान योजना की वर्तमान स्थिति पर आक्रोश व्यक्त किया जाता है। मतलब कि खेत खाय गदहा, मार खाय जुलाहा का नहीं चलेगा खेल.
        कृषि समन्वयकों ने जिलाधिकारी को संबोधित अपने आवेदन में यह स्पष्ट आरोप लगाया है कि अनुदान योजना में विभागीय पदाधिकारी और आपूर्तिकर्ता  की मिलीभगत के कारण ससमय बीज की उपलब्धता और अनुदान  कि प्राप्ति नहीं हो पाती है और योजना का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है।इसकी जांच अपने स्तर से कराने का आग्रह भी किया गया है। इसकी प्रतिलिपि आवश्यक कार्रवाई हेतु विभागीय मंत्री, निदेशक और संयुक्त कृषि निदेशक को भी दिया गया है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...