03 अप्रैल 2017

बदहाली के आंसू रो रहा है दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन, यात्री सुविधा नदारद

मधेपुरा में एशिया का सबसे बड़ा विद्युत् रेल इंजन कारखाना खुलने जा रहा है। आलस्टोम जैसी बड़ी कंपनी यहाँ आकर निर्माण कार्य भी शुरू कर चुकी है। लेकिन दौरम मधेपुरा रेलवे स्टेशन की बदहाली लगातार बढती ही जा रही है।

        इस रेलवे स्टेशन पर कुल जमा छह जोड़ी ट्रेन चलती है। लेकिन किसी का भी टाइम टेबल
सभी फोटो: मुरारी सिंह
सही नहीं है। कहने के लिए तीन जोड़ी एक्सप्रेस ट्रेन चलती है। लेकिन ये ट्रेन एक्सप्रेस बस नाम की है। कोसी एक्सप्रेस पटना तक जाती है। सुबह चार बजे यहाँ से चलकर सामान्यतया एक बजे पटना पहुचती है। लौटती है रात के बारह बजे। इंटर सिटी मधेपुरा आकर यहीं से लौट कर पटना जाती है लेकिन पटना से चलकर सहरसा में ही समाप्त हो जाती है। जानकी एक्सप्रेस की समय सारिणी ऐसी है कि यात्री इसका उपयोगो नहीं कर पाते  हैं।

    यहाँ हाटे बाजारे एक्सप्रेस ट्रेन के लिए 1 अप्रैल से की तिथि निर्धारित थी। लेकिन रेलवे की हाजीपुर मुख्यालय ने इसकी स्वीकृति नहीं दी। गरीब रथ, पुरबिया और अन्य सहरसा तक आनेवाली ट्रेनों की तो अब यात्रियों ने मांग करना भी छोड़ दिया है।
    यहाँ के स्टेशन की भी बुरी स्थिति है। स्टेशन पर पेय जल तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। डेढ़ वर्ष से शुद्ध जल के लिए लगाई गयी वाटर प्लांट बंद पड़ी है। डी आर एम् भी निरीक्षण कर चले गए लेकिन शुद्ध पेय जल प्लांट बंद ही पड़ा रहा। स्टेशन पर तीन चापाकल गड़े हैं। लेकिन इनमे से एक ख़राब पड़ा है और दो जो चल रहे हैं वहां गंदगी के कारण पानी पीना दुश्वार है।
    यत्र तत्र गंधाती गंदगी का जमावड़ा यात्रियों पर भारी पर रही है।यदा कदा यात्री ही इस प्लेट फॉर्म या वेटिंग रूम में समय बिता पाते हैं। स्टेशन अधीक्षक बताते हैं कि यहाँ सफाई के लिए 15 हजार रु0 माह खर्च का प्रावधान है। इसमें तीन सफाई कर्मी दैनिक वेतन चार हजार रु0 मासिक पर रखे गए हैं। शेष तीन हजार झाड़ू, फीनाएल, हार्पिक आदि में खर्च होते हैं। यहाँ सफाई का जिम्मा किसी एन जी ओ को देने की कार्रवाई की जा रही है। शुद्ध जल के लिए भी उच्च स्तरीय कारवाई जारी है। संभवतः अब इसके लिए संवेदक का चयन कर शीघ्र ही नयी बोरिंग गाड़ कर काम शुरू किया जायेगा।

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