13 अप्रैल 2017

मधेपुरा में फिर बहेगी दूध की नदी: पचरासी मेला 14 से, 9 पुलिस चौकी 100 जवान तैनात

मधेपुरा जिला के चौसा प्रखंड के लौआलगान पचरासी में स्थित पूर्वोतर बिहार के सबसे चर्चित लोक देवता बाबा विशु मेला की तैयारी पूरी कर ली गई है।

           मालूम हो कि 14 अप्रैल से पचरासी स्थल में चार दिवसीय भव्य मेला का आयोजन हर वर्ष लगाया जाता है। इस बार  श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए बेहतर मेला लगाने का प्रयास किया गया है। इस के लिए पुलिस प्रशासन ने भी अपना अलग सिस्टम तैयार किया है।

क्या है नियंत्रण तथा सुरक्षा व्यवस्था?: चौसा थाना अध्यक्ष सुमन कुमार ने मधेपुरा टाइम्स को जानकारी दी कि मेले में सुरक्षा की दृष्टि से सीमावर्ती इलाका होने तथा मकई के फसल की वजह से कुल 9 पुलिस पोस्ट बना कर पुलिस पदाधिकारी को प्रति नियुक्त किया गया है, जिस में महिला पुलिस समेत लगभग 100 जवान तैनात  रहेंगे। मेले के नियंत्रण केर लिए प्रभारी पुलिस निरीक्षक सुरेश प्रसाद राम तथा प्रखंड विकास पदाधिकारी मिथिलेश बिहारी वर्मा को प्रभारी बनाया गया है तथा मेला पुलिस थाना प्रभारी नकुल कुमार को बनाया गया है यह है. इसमें  कुल 9 पोस्ट, 1 मंदिर परिसर में चौसा थाना सहायक अवर निरीक्षक तेज नारायण सिंह, 2 मंदिर के उत्तरी सहायक अवर निरीक्षक उपेंद्र कुमार सिंह, 3 मेला परिसर में फुलौत ओपी सहायक अवर निरीक्षक बृज बिहारी राय, 4 लौआलगान  बाजार में सहायक अवर निरीक्षक ज्योतिष कुमार भगत, 5 ख़ोपड़िया मोड़ सहायक अवर निरीक्षक हबीब उल्लाह अंसारी, 6 लौआ लगान मुखिया टोला पुरैनी थाना अध्यक्ष राजेश कुमार, 7 पकड़ा बासा मोड़ के पास उदाकिशुनगंज थाना अध्यक्ष , 8 मंदिर से पश्चिम सिरोही रोड में ग्वालपाड़ा थाना अध्यक्ष , 9 मेला मंदिर पर भारी मुकुल कुमार को प्रति नियुक्त किया गया है। सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारी एक दूसरे से ऑनलाइन कनेक्टेड रहेंगे।

क्या सब होगा मेले में?: सुप्रसिद्ध बाबा विशु मेला में हर वर्ग के लोगों की मनपसंद की चीजे आ रही है। महिलाऐं एवं बच्चों के मनोरंजन के लिए सर्कस, सिनेमा, मौत का कुआं, जादूघर, ड्रेगन झूला टावर झूला आदि लग रहे हैं। इस मेले में महिला समेत लाखों से अधिक की संख्या में श्रद्धालु एवं पशुपालक अपने दुधारू पशुओ का दूध लाकर बाबा विशु को चढ़ाते हैं एवं अपने पशुओ के स्वस्थ रहने की मनोकामना पूरी करने की मन्नते मांगते हैं। बाबा विशु के प्रति मान्यता है कि वे पशुओं से इतना प्रेम करते थे कि पशुओं को देखकर उसकी बीमारी को परख लेते थे एवं क्षण भर में चमत्कारी रूप से इलाज कर देते थे। मान्यताऐं हैं कि बाबा को चढ़ाने के लिए निर्मित रखा कच्चा दूध कभी खराब नहीं होता है। यह परम्परा मुगल बादशाह काल से ही चली आ रही है। एक  आकड़े के अनुसार मेले में प्रतिदिन पांच सौ क्विंटल दूध श्रद्धालुओं द्वारा अर्पण किया जाता है। जिससे मंदिर के ठीक उत्तर दिशा में दूध की नदी बहती है। इसके अलावे यहां प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को जौनार में हजारों श्रद्धालु आकर दूधाभिषेक करते हैं और प्रसाद के रूप में दही चूड़ा का प्रसाद खिलाते हैं।
    मेला में सर्कस, सिनेमा, मौत का कुआं, जादूघर, ड्रेगन झूला, टावर झूला आदि लग रहे हैं। शहीद योगेन्द्र तूफान की स्मृति में कुश्ती दंगल का भी आयोजन रखा गया है। मेला में ग्रामीण क्षेत्रों से लुप्त हो रहे सिल्ला लोढ़ी, काठ एवं लोहा के विभिन्न तरह के सामान की दुकाने भी लग रही है।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...