24 अप्रैल 2017

जिले में नीरा बिक्री की कवायद शुरू: जानिए कैसे उत्पाद विभाग देगी लायसेंस ?

राज्य में शराब बंदी के बाद तरस रहे लोगों को अब तार या खजूर का नीरा पीकर संतोष करना पड़ेगा। इसके लिए राज्य सरकार ने सूबे में कुल तेरह नीरा प्रोसेसिंग केंद्र शुरू करने जा रही है।


इन केंद्रों को क्षेत्राधिकार के जिलों से नीरा उतार कर भेजा जाएगा।प्रोसेसिंग प्लांट में तैयार नीरा वापस जिलों में बिक्री के लिए भेजी जाएगी।लेकिन जिलों में पहले पेड़ से नीरा उतारने के लिए उत्पाद विभाग से लायसेंस प्राप्त करना होगा।
         जिलाधिकारी मु सोहैल ने सोमवार को जीविका को निर्देश दिया है कि पेड़ से नीरा उतारने के लिए सक्षम लोगों से आवेदन प्राप्त कर उसे उत्पाद विभाग को उपलब्ध कराएं।

क्या है लायसेंस लेने की प्रक्रिया?: उत्पाद कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार नीरा उतारने के लिए आवेदक को पहले तार या खजूर के पेड़ के मालिकों से नीरा उतारने के लिए लिखित अनुमति लेनी होगी।प्रत्येक प्रखंड में नीरा उतारने वाले अपनी नीरा को केंद्र में जमा करेंगे , जहां से उसे वाहन पर दूध के समान ठंडा रखते हुए सबौर (भागलपुर) में स्थित प्लांट में भेजकर प्रोसेसिंग किया जाएगा ताकि उसे अधिक अवधि तक सुरक्षित रखा जा सके।

जिले में है  13129 तार के पेड़: इसके लिए पहले कृषि विभाग और जीविका के जरिए तार, खजूर और नारियल के पेड़ों की गिनती कराई गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में 13129  तार के, बारह हजार से अधिक खजूर के और लगभग पैंतीस हजार नारियल के पेड़ हैं। लिहाजा यहां नीरा की उपलब्धि के अच्छे आसार हैं।
          तो बस इंतजार करें और शीघ्र ही इन सारी प्रक्रियाओं को पूरा कर आपके जिले के प्रखंडों में भी शीतल नीरा उपलब्ध होगी। ज्ञातव्य है कि मुजफ्फरपुर के सरैया में नीरा प्रोसेसिंग प्लांट खुल चुका है।

गौरतलब है यह नियम: बिहार सरकार के नए उत्पाद कानून के अनुसार नीरा या तारी उतार कर पेड़ के नीचे ही उसे पीया जा सकता हैं। लेकिन संभल कर, क्योंकि ज्योंहि आप उसे पीकर बाजार या गांव की ओर जाएंगे तो आपको उत्पाद विभाग के कारिंदे आपको नशाखोरी के आरोप में पकड़ सकते हैं। इसीलिए बस सरकारी नीरा उपलब्ध होने जा रहा है, उसे पीकर स्वस्थ रहें।

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