11 अप्रैल 2017

बेउर जेल में बंद मधेपुरा सांसद ने किया 12 घंटे का भूख हड़ताल

पटना। जन अधिकार पार्टी (लो) के संरक्षक और सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्‍पू यादव आज बेउर जेल में 12 घंटे की भूख हड़ताल की।   इस दौरान जेल में बंद जन अधिकार पार्टी के अन्‍य कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
सांसद ने इस संबंध में एक ज्ञापन भी जेल अधीक्षक को दिया और अपनी मांगों को उनके समक्ष रखा।
     जन अधिकार पार्टी (लो) के राष्‍ट्रीय महासचिव और प्रवक्‍ता प्रेमचंद सिंह एवं राजेश रंजन पप्‍पू ने इस संबंध में जारी बयान में कहा कि सरकार गांधी के चंपारण सत्‍याग्रह शताब्‍दी समारोह मना रही है, जबकि उसी चंपारण की धरती पर किसान आत्‍मदाह करने को विवश हो रहे है। महात्‍मा गांधी के नाम पर सरकार जनता को गुमराह कर रही है और अपनी मांगों के लिए आंदोलन करने वालों पर सरकार लाठी-गोली चलवा रही है। व्‍यवस्‍था के खिलाफ बोलने वालों को यातनाएं दी जा रही हैं।
      श्री सिंह ने कहा कि जन अधिकार पार्टी लोकतांत्रिक मूल्‍यों की रक्षा और जनतंत्र के सम्‍मान के लिए आंदोलन करती रहेगी। पार्टी जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करती रहेगी और जनता के अधिकार के लिए लड़ती रहेगी।  
      दोनों नेताओं के अनुसार, सांसद ने ज्ञापन में विधान सभा घेराव मामले के घटनाक्रम की चर्चा करते हुए सहायक पुलिस अधीक्षक राकेश कुमार दूबे, आरक्षी उपाधीक्षक शिबली नोमानी और कैलाश गुप्‍ता सहित अन्‍य कई पदाधिकारियों पर साजिश के तहत हत्‍या करने का आरोप लगाया। सांसद ने कहा कि उन्‍हें और पार्टी के कई कार्यकर्ताओं को यातना देकर न सिर्फ जेल भेजा गया, बल्कि एक अप्रैल को कोर्ट के समक्ष हथकड़ी एवं रस्‍सी लगा कर पेश किया। तब भी उन्‍हें आशंका थी कि अगर वे हथकड़ी लगाने से मना करेंगे, तब पुलिसकर्मी उन पर भागने का आरोप लगा कर गोली चला देगी। पेशी के दौरान कोर्ट में उन्‍होंने इसकी शिकायत की। तब कोर्ट ने सांसद के साथ बाए पुलिस कर्मियों को हथकड़ी खोलने का आदेश दिया ।
     सांसद ने पत्र में  निलंबित 11 पुलिसकर्मियों का जिक्र करते हुए कहा कि मुझे अखबारों से हथकड़ी लगाने के मामले में निर्दोष पुलिस अधिकारियों व पुलिसकर्मियों के निलंबन का पता चला। जबकि साजिशकर्ता वरीय पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिन्‍होंने निलंबित पुलिसकर्मियों को हथकड़ी लगाने का आदेश दिया था। सांसद ने पत्र के जरिए दोषी वरीय अधिकारियों पर कार्रवाई, निर्दोष  कनीय पुलिस पदाधिकारी एवं पुलिसकर्मियों का निलंबन वापस लेने, झूठे मुकदमे में फंसा कर जेल भेजे गए कार्यकर्ताओं व झूठे मुकदमे में गिरफ्तार वार्ड सदस्‍यों की बिना शर्त रिहाई और मॉल-मिट्टी घोटाले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की।
(ए. सं.) 

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