18 अप्रैल 2017

सुखासन पेंटून पुल में विलम्ब के आसार, ग्रामीणों का त्राहिमाम

मधेपुरा को दक्षिण दिशा से जोड़ने वाला सुखासन स्क्रू पाइल पुल का भारी वाहनों के दवाब से क्षतिग्रस्त हो जाने और यातायात के लिए बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों को बड़ी असुविधा हो रही है।
जिलाधिकारी मु सोहैल ने यहाँ संवेदक से वार्ता कर 20 अप्रेल तक पेन्टून पुल का निर्माण का डेड लाइन तय किया था, लेकिन यहाँ कार्य की रफ़्तार इतनी धीमी है कि अप्रेल माह तक पूर्ण हो जाना भी संभव नहीं लग रहा है।

सुखासन स्क्रू पाइल पुल हुआ था क्षतिग्रस्त: 1985 में निर्मित स्क्रू पाईल पुल का तत्कालीन मुख्य मंत्री चंद्रशेखर सिंह द्वारा उद्घाटन किया गया था। इस पुल के पायों से स्थानीय असामाजिक तत्वों ने कुछ लोहे के कनेक्टिंग राडो को चुरा लिया था। इसके कारण पाया असंतुलित हो गया था। लेकिन इसकी मरम्मत नहीं की गयी। यहाँ एक नया हाई लेवल पुल का निर्माण शुरू हुआ है। लेकिन पुराने स्क्रू पाईल पुल पर रोक के बावजूद भारी वाहन रफ़्तार से चलती रही। लिहाजा पुल का पाया धंस गया तो पुल पर दीवाल बनाकर इसे यातायात के लिए बंद कर दिया गया। लेकिन विवश लोग अब भी दीवाल के बगल से अपनी साइकिल और मोटर साइकिल लेकर गुजड़ते हैं। अन्य वाहनों को पुल के इस पार और उस पार रख कर पुल को पैदल पार कर आने जाने के लिए लोग विवश हैं।

यहाँ डायवर्शन् पर बनना था ह्यूम पाइप पुल: यहाँ निर्माणाधीन पुल से पहले ही डायवरशन ह्यूम पाइप पुल बनाने का प्रावधान था। लेकिन इसे नहीं बनाया गया। जब स्क्रू पाईल पुल क्षतिग्रस्त हो गया तो जिलाधिकारी ने मौके पर आकर निरीक्षण किया। हाई लेवल पुल का निर्माण 2019 के अंत में पूर्ण होने का लक्ष्य था। आगामी बरसात को लेकर उन्होंने निर्देश दिया कि पीपा पुल ही बना जाय। इसे 20 अप्रेल तक पूर्ण करने का निर्देश भी दिया गया था। लेकिन अभी तक न तो डायवरशन पर पूरी मिट्टी डाली जा सकी है और न पीपा को नदी में डाल कर उसे कनेक्ट किया गया है। इन सब कामों में न्यूनतम एक माह का समय लग सकता है।

परेशान हैं लोग: पुल पर वाहनों की आवाजाही बंद होने से आम लोगो को भारी परेशानी हो रही है। वाहनों को 15 किमी घूम कर आने के कारण आमतौर पर जिंसों की कीमत बढ़ गयी है। मरीजो को तो और भी परेशानी हो रही है। मधेपुरा का एक व्यवसायी संग्राम कुमार बताता है कि उसका तो व्यवसाय चौपट हो गया है क्योकि उसके अधिकांश ग्राहक सुखासन, पतरघट, मंगुआर आदि के हैं। मधेपुरा आकर काम काज करनेवाले कई लोग भी इसके कारण भारी कष्ट में है। एक युवक मुरारी बताते हैं कि उन्हें अपने ससुराल जाने में भी कई बार सोचना पड़ता हैं।

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