09 अप्रैल 2017

सिंहेश्वर और श्रीनगर के बाद मधेपुरा में शिव की एक और नगरी होने के संकेत

मधेपुरा के घैलाढ़ प्रखंड अंतर्गत झिटकिया पंचायत के झिटकिया गांव में रविवार को इतिहासकार व अंचलाधिकारी सतीश कुमार मौजूद ऐतिहासिक धरोहर के निरीक्षण को पहुंचे.

     इतिहासकार व अंचलाधिकारी सतीश कुमार ने घैलाढ़ प्रखंड के झिटकिया गांव जाकर 3000 वर्ष पुराने धरोहर होने के संकेत दिए. उन्होंने मधेपुरा टाइम्स को बताया कि श्रीनगर से 7 किलोमीटर दूर इस झिटकिया गांव में भी एक शिव मंदिर स्थित है. यह शिव मंदिर श्रीनगर के अनुसार ही 9 फीट ऊंचा टीला पर स्थित है. टीला प्राचीन ईंट से बना हुआ है. ईंट कुषाणकालीन है जो 18 इंच लंबा 9 इंच चौड़ा सवा 2 इंच मोटा है. यहां भी श्रीनगर के भांति बेसाल्ट पत्थर बने शिलाखंड बिखरे हुए हैं जो किसी प्राचीन मंदिर के अवशेष हैं. यहां भी कालामृदभान  मिल रहे हैं जो वैदिक कालीन 3000 साल पुरानी है. यहां सबसे विशेष चीज जो मिल रही है वह टेराकोटा टाइल्स हैं. इस टेराकोटा टाइल्स में पांच प्रकार की मूर्तियां देखने को मिल रहे हैं. जिसमें सबसे महत्वपूर्ण मातृ देवी के मूर्ति हैं जो दांये हाँथ से आशीर्वाद मुद्रा में है.  इससे प्रतीत होता है कि सिंधु सभ्यता में मूर्तियां पाई जाती थी जो कुषाणकालीन व वैदिक कालीन की प्रत्वत्विक अवशेष मिलने और भी मिलने की संकेत कर रही है. 
    बता दें कि मधेपुरा में शिव की नगरी बाबा सिंहेश्वर नाथ के अलावे घैलाढ़ प्रखंड के ही श्रीनगर में ढेर सारे पुरातात्विक अवशेष मिलने के बाद शिव की एक और नगरी के संकेत मिलने लगे थे और अब झिटकिया गांव में मिले पुरातात्विक अवशेष मिलने के बाद यदि पुरातात्विक विभाग की जांच में ये बात सत्य निकलती है तो निश्चित रूप में मधेपुरा का नाम भी इतिहास की पुस्तकों के पन्नों पर पढ़ाई के लिए दर्ज होगा.

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