22 मार्च 2017

कोल्ड स्टोरेज के मालिक और व्यापारी कर रहे आलू उत्पादक किसानों का आर्थिक शोषण

मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत मुरलीगंज प्रखंड से 3 किलोमीटर की दूरी पर बसा गांव कोल्हायपट्टी डुमरिया आलू उत्पादन में भले ही सबसे अव्वल रहा हो पर  यहाँ आलू की रिकॉर्ड पैदावार ने किसानों के सामने आलू भंडारण की समस्या खड़ी कर दी है.

 इस कारण किसानों की कमर पूरी तरह से टूट गई है। वहीं दूसरी ओर आलू उत्पादक किसानों के लिए भंडारण की भारी समस्या उत्पन्न हो गई है।
    आलू एक नगदी फसल है तथा यह अल्प अवधि 90 से 105 दिनों में तैयार हो जाती है। इस प्रकार आलू फसल से अन्य फसलों की तुलना में कम समय में अच्छी आमदनी प्राप्त होती है। मुरलीगंज प्रखंड़आलू का उत्पादन काफी मात्रा में होता है। परन्तु इसके भंडारण हेतु शीतगृह एवं प्रसंस्करण आदि की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों द्वारा खुदाई के तुरंत बाद ही आलू स्थानीय बाजार में काफी कम कीमत में बेच दिया जाता है, जिससे उन्हें आलू के उत्पादन का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पा रहा है और वह अपना आलू लागत से भी कम कीमत पर बेचने को मजबूर हैं। लेकिन उत्पादन के अनुरूप भंडारण व विपणन की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इस वजह से किसानों को इसकी खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है।
   ज्ञातव्य हो कि इस क्षेत्र एक भी न तो सरकारी और न ही निजी शीतगृह व कोल्ड स्टोरेज है। इस कारण क्षेत्र के किसानों को भंडारण में काफी कठिनाई हो रही है। मुरलीगंज प्रखंड के आलू उत्पादित किसान काफी परेशानी और घाटे में आलू को ओने पौने दामों में व्यापारियों के हाथ बेच रहे हैं उनकी सबसे बड़ी समस्या है भंडारण की भंडारण के लिए उन्हें गुलाब बाग पर ही निर्भर रहना पड़ता है और गुलाब बाग में सभी व्यापारियों ने पहले से शीतगृह को बुक कर रखा है जिससे किसान वह किसानों से अपने मनचाहे दर पर आलू खरीद कर स्टोर कर सकें. इस तरह अवैध ढंग से इस शीतगृह को भरा हुआ दिखाकर किसानों के आर्थिक दोहन के लिए व्यापारी और शीतगृह मालिक तैयार खड़े हैं. अब शीतगृह में किसान अपना आलू नहीं रख पा रहे हैं और उन्हें मजबूरन व्यापारियों के हाथ अपना आलू ₹275 क्विंटल और ₹300 क्विंटल के भाव में बेचना पड़ रहा है.
     किसान हताश और निराश हैं. मुरलीगंज प्रखंड से 25 किलोमीटर की दूरी पर उदाकिशुनगंज में एक शीतगृह है पर वहां भी निजी शीतगृह वाले किसानों के आलू को रखने के लिए तैयार नहीं हैं. जयप्रकाश यादव, प्रदीप यादव, हीरालाल यादव, शिव कुमार यादव, धर्मेन्द्र यादव आदि किसानों ने बताया कि जब उनके पास गए तो उन्होंने खाली होने के बावजूद यह कहकर वहां से लौटा दिया कि उनके पास जगह नहीं है वह व्यापारियों ने पहले से ही बुक कर रखा है. किसानों की इस समस्या को देखने वाला कोई नहीं है और किसानों की हताशा कुछ और ही संकेत कर रही है.

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