03 मार्च 2017

'कोसी क्षेत्र ने विश्व को सन्देश दिया है': सिंहेश्वर में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ

बहुप्रतीक्षित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का शुभारंभ मधेपुरा जिले के सिंहेश्वर में शुक्रवार को हो गया। तथ्यों के साथ सेमिनार में वक्ताओं ने कोसी के धार्मिक और दार्शनिक महत्वों पर चर्चा कर इसे अंतर्राष्ट्रीय पहचान देने के समर्थन में महत्वपूर्ण चर्चा की.

    सेमिनार में देश के नामचीन हस्तियों की उपस्थिति और उनके वक्तव्य कोसी और मिथिला की नई पीढी को नया संदेश देने में सफल रहा। सेमिनार का शुभारंभ बीएन मंडल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विनोद कुमार, भारतीय दर्शन परिषद् के अध्यक्ष सह पूर्व कुलपति डॉ. आर. पी. श्रीवास्तव, पूर्व कुलपति डॉ. अमरनाथ सिन्हा, डीएम मो. सोहैल ने संयुक्त रुप से किया।

    कुलपति डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि श्री कृष्ण सेना द्वारा धार्मिक और दार्शनिक महत्व कोसी क्षेत्र बिहार के परिपेक्ष्य में सिंहेश्वर मंदिर के विशेष संदर्भ में आयोजित करना बड़ी बात है। उन्होंने कहा कि कोसी क्षेत्र की चर्चा रामायण और महाभारत में भी की गई है। उन्होंने भगवान शिव पर बडे स्तर पर शोध करने की बात कही। कुलपति ने कहा कि शिव हमें स्वार्थ को छोड़ने की प्रेरणा देता है। शिव नाम से दुनिया को प्रेरणा मिलती रही है। उन्होंने लोगों से क्षमा को जिंदगी में आत्मसात करने की बात कही। उन्होंने कहा कि जिंदगी में किसी का बुरा नहीं करने के संकल्प को लेकर हम शिव के समीप पहुंच सकते हैं।
          पूर्व कुलपति डॉ. अमरनाथ सिन्हा ने कहा कि आर्य भारत में कहीं से आये नहीं बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। शिव कोई व्यक्ति नहीं शिव एक अवधारणा है,  जिसमें शाश्वत उर्जा और पदार्थ भरा हुआ है। उन्होंने दीपक को शिव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि शिव ही संपूर्ण सृष्टि और ब्रहृमांड के रचियता हैं। डॉ. सिन्हा ने कहा कि कोसी क्षेत्र में इस तरह का सेमिनार युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

        पूर्व कुलपति डॉ. आर. पी. श्रीवास्तव ने कोसी क्षेत्र को भारतीय दर्शन का परिक्षेत्र बताया। उन्होंने दुःख व्यक्त करते कहा कि आज के लोग यहां की समृद्ध विरासत को जान नहीं पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मिथक और दर्शन अलग-अलग चीजें हैं। मिथक इतिहास नहीं होता, लेकिन कथाओं में भी अर्थ होते हैं । डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में धर्म और दर्शन साथ-साथ चलते हैं  दूसरे का भला करना ही धर्म है। उन्होंने कोसी के कई स्वरुपों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में दर्शन पर जितना काम होना चाहिए उतना नहीं हो पा रहा है। ज्ञान और सांस्कृतिक धरोहरों को बढ़ाने के लिए उन्होंने छात्रों से अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज हम पढ़ना छोड दिये हैं। पश्चिम के विचाराकों का मानना है कि भारतीय अपनी विरासत को नहीं जान पाते हैं। आज जरुरत है अपनी विरासत को समझने की। उन्होंने श्रृंगी ऋषि पर शोध करने की बात कही। डॉ.  श्रीवास्तव ने कुछ लोगों पर शिव को व्यवसाय के रुप में लेने पर दुःख जताया। उन्होंने कहा कि धर्म से जितना युद्ध हुआ है उतना किसी और से नहीं, जबकि धर्म हमारी रक्षा करती है। उन्होंने धर्म को संप्रदाय से नहीं जोड़ने की बात कही।

    मधेपुरा के डीएम मो. सोहैल ने कोसी और मिथिला के महत्व को बताते कहा कि इस क्षेत्र ने विश्व को संदेश देने का काम किया है। उन्होंने विश्वविद्यालय को ऐसे सेमिनार कराने की बात कही। उन्होंने कहा कि जब तक हमारा स्वाभिमान जाग्रृत नहीं होगा तब तक हम अपनी मिटटी और उसके अतीत को नहीं जान सकते। अतीत को छोड़कर भविष्य का निर्माण नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि हमने दर्शन और धर्म को बांटने का काम किया है। संप्रदाय को टोले मोहल्ले में बांट कर अपनी विरासत को कम करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि स्मृति को भुलाकर श्रुति को अपनाने लगे हैं जो कि अशांति का द्योतक है।

       इससे पहले सेमिनार के संयोजक बीएनएमयू के डीआर एकेडमी डॉ. नरेंद्र श्रीवास्तव ने सेमिनार के उद्येश्यों पर विस्तृत रुप से चर्चा की। समारोह में प्रतिकुलपति डॉ. जे. पी. एन. झा, पूर्व मंत्री डॉ. रविंद्र चरण यादव, कोसी और सिंहेश्वर पर दर्जनों पुस्तक लिख चुके साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव शलभ, प्रो. पूर्व कुलसचिव सचींद्र महतो आदि ने भी अपनी बात कही।      

     समारोह की अध्यक्षता स्वागत समिति के अध्यक्ष दिलीप खंडेलवाल ने की। आयोजन समिति के सचिव राहुल यादव सहित सदस्यों ने अतिथियों का स्वागत किया। मौके पर डॉ.  विश्वनाथ विवेका, इंद्रदेव भगत, रविंद्र नारायण ठाकुर, महानंद झा, हरि प्रसाद टेकरीवाल, दिनेश यादव, अशोक भगत, अरविंद प्राणसुका, राजेश झा, इश्तियाक आलम, अनुराग अक्षय, प्रकाश चंद्र, विजय भगत, मिलन कुमार, मुकेश यादव, डॉ. अमिताभ, मनीष वत्स, डॉ. आई. सी. भगत, रवि शर्मा, रवि संत, ब्रजेश सिंह, संदीप शांडिल्य, डॉ. रेणु सिंह, डॉ. भूपेंद्र मधेपुरी, डॉ. सिद्धेश्वर काश्यप, संजय परमार, चतुरानंद सिंह, नरेश श्रीवास्तव, विश्वनाथ टेकरीवाल, मदन सिंह आदि मौजूद थे।

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...