28 मार्च 2017

'शायद फिर इस जनम में मुलाक़ात हो न हो': कृतिका और राजीव का कोसी महोत्सव में जलवा

मधेपुरा टाइम्स के स्टूडियो की पिछले दिनों शोभा बढ़ा चुके सिंगर मधेपुरा के राजीव तोमर और सहरसा की कृतिका गौतम कोसी की शान बन चुके हैं.
सहरसा में आयोजित कोसी महोत्सव में इन दो कलाकारों ने दर्शकों और श्रोताओं को सुध-बुध खोने पर मजबूर कर दिया और इस बार का कोसी महोत्सव भी इलाके के कला और संगीत प्रेमियों के लिए यादगार साबित हुआ.
    24 और 25 मार्च को आयोजित भव्य कोसी महोत्सव में जहाँ कत्थक नृत्यांगना लावण्या राज, शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान के रोहित एवं अनुष्का, कोसी महोत्सव से ही सगीत के क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय हो चुकी रंजना झा आदि की प्रस्तुति लोगों को तालियाँ बजाने पर मजबूर करती रही, वहीँ लगातार दो घंटे अपनी गायकी से महोत्सव को यादगार बनाने वाले उम्दा गजल गायक राजीव तोमर और सुर की मलिका  कृतिका गौतम के गाने अब तक लोगों के जेहन में तैर रहे हैं. राजीव तोमर के गए गजल ‘ऐसी लागी लगन, मीरा हो गई मगन’, ‘तेरे मन में राम’, ‘लज्जते गम
बढ़ा दीजिये’, ‘जब आँचल रात का लहराए’ और ‘दमा दम मस्त कलंदर’ पर श्रोता हैरत में थे. बता दें कि अद्भुत प्रतिभा और भजन सम्राट अनूप जलोटा के गाने हूबहू गाने वाले राजीव तोमर अपने ही इलाके में पहचान के संकट से गुजर रहे थे, जब मधेपुरा टाइम्स ने इसी गणतंत्र दिवस पर उन्हें अपने स्टूडियो में आमंत्रित कर उनकी प्रतिभा दुनियां के सामने रखी थी. राजीव तोमर बताते हैं कि मधेपुरा टाइम्स पर आने के बाद उन्हें देश भर से मान-सम्मान मिल रहा है जो अत्यंत सुखद है. (राजीव तोमर को विस्तार से जानने के लिए इस रिपोर्ट को पढ़ें: राजीव तोमर या भोला नहीं राजीव जलोटा कहिये भाई साहब...)   
   
    पर कोसी महोत्सव में गायकी की अपनी अद्भुत प्रतिभा सबसे चर्चा में रहने वाली गायिका कृतिका गौतम के सुर जब फिजां में लहराए तो कोसी एक बार फिर से खुद को गौरवान्वित महसूस करने लगा. कृतिका के गाये कुल आठ गानों की छाप महोत्सव पर काफी दिनों तक रहने की उम्मीद है. ‘भोर भये पनघट पे मोहे नटखट श्याम सताए’ से शुरू हुई तालियों की गडगडाहट ‘बाहों में चली आ, हमसे सनम क्या पर्दा’, ‘चुरा लिया तुमने जो दिल को’, ‘प्यार का पहला ख़त लिखने में वक्त तो लगता है’, ‘गुलाबी आँखें’, मैं हूँ खुश रंग हिना’ तक गूंजती रही. कृतिका के गाये चैती गीत भी खूब सराहे गए.
   
जानें कृतिका गौतम को विस्तार से: अपने पाठकों को हम याद दिला दें कि महज एक महीने पहले मधेपुरा टाइम्स के स्टूडियो में आमंत्रित कृतिका गौतम के गाने हमने रिकॉर्ड कर अपने लाखों पाठकों तक पहुँचाया था. गायन और कत्थक नृत्य में अपनी अलग पहचान बनाने वाली कृतिका
गौतम सहरसा के सर्वनारायण सिंह कॉलेज के संगीत विभाग के जाने माने प्राध्यापक गौतम सिंह और मधेपुरा कॉलेज मधेपुरा के संगीत विभाग की प्राध्यापिका भारती सिंह की पुत्री हैं. कृतिका ने नृत्य और संगीत की प्रारंभिक शिक्षा सहरसा जिला मुख्यालय के वार्ड नं. 3, नया बाजार के ‘स्वरांजलि’ यानी अपने ही घर से संगीत में खुद को समर्पित कर देने वाले पिता और माँ से लेनी शुरू की और महज दो वर्ष की छोटी सी उम्र से मंचो पर अपने गायन एवं कत्थक नृत्य का प्रर्दशन शुरू कर दिया.
       कृतिका ने कत्थक नृत्य की शिक्षा अपने पिता प्रो० गौतम कुमार सिंह एवं गायन की शिक्षा अपनी माता प्रो० भारती सिंह से ली. संगीत का सफ़र एक बार जो प्रारंभ हुआ तो फिर कृतिका ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा. कत्थक नृत्य में वर्ष 2005 में कृतिका को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. गायन में कृतिका की प्रतिभा का लोहा जब लोगों ने माना तो फिर कृतिका ने कोशी महोत्सव, उग्रतारा महोत्सव, बिहार दिवस, पटना, दरभंगा,
कोलकाता, द्विल्ली और मुम्बई तक अपनी प्रस्तुति से सुर्खियाँ और तालियाँ बटोर चुकी है. कला संस्कृति एवं युवा विमाग बिहार सरकार, भारत सरकार, संगीत नाटक अकादमी आदि से भी इन्हें पुरस्कार मिल चुका है. यही नहीं, कृतिका देश के प्रसिद्ध रियलिटी शो ये इंडियन आईडल तथा इंडिया गॉट टैलेन्ट में भी गायन कर चुकी है. इसके अलावे मैथिली फिल्म तथा भोजपुरी फिल्म में भी गायन कर चुकी है और कई एलबम में भी कृतिका गौतम की आवाज का जादू सुना जा सकता है. फिलवक्त कृतिका गौतम पटना विश्वविद्यालय से संगीत में एम० ए० कर रही है. (इसे भी पढ़ें: कृतिका गौतम: कोसी की बुलंदियों के आसमान का एक सितारा, जिसके सुर में बसती है सरस्वती)
    कोसी महोत्सव में भी एक बार फिर कृतिका गौतम और राजीव तोमर को प्रतीक चिन्ह देकर प्रमण्डलीय आयुक्त, डी० एम०, एस० पी० ने सम्मानित किया.
    समारोह में अल्पसंख्यक कल्याण मत्री डा० अब्दुल गफुर, आयुक्त ललन जी, डी० एम० बिनोद सिंह गुन्जियाल, एस० पी० अश्विनी कुमार ने  जहाँ प्रो० गौतम सिहं एवं उनकी छात्राओं को आकर्षक प्रदर्शन के लिए प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया वहीँ इस अवसर पर एक स्मारिका कोसी दर्पण का भी विमोचन हुआ जिसका सम्पादन मुक्तेश्वर सिंह मुकेश ने किया. महोत्सव में उच्च स्तरीय मंच संचालन भी मुक्तेश्वर सिंह मुकेश के द्वारा ही किया गया.
     कुल मिलाकर यादगार रहा कोसी महोत्सव एक बार फिर यह प्रदर्शित करने में पूरी तरह सफल रहा कि कोसी के इलाके की प्रतिभाओं का कोई जोड़ नहीं है और प्रशासन द्वारा इस बड़े मंच कोसी के कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शन का अवसर देना कोसी को देश-विदेश में प्रसिद्धि दिलाने का एक बेहतर और प्रशंसनीय कदम माना जा सकता है.
कोसी महोत्सव का वीडियो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें.
(Reoprt: R. K. Singh)

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