10 फ़रवरी 2017

“हमरा ले ते साक्षात भगवान के दोसर रूप छै डीएम साहेब”: लौटी ख़ुशी की ख़ुशी

“हमरा ले ते साक्षात् भगवान के दोसर रूप छै डीएम साहेब” बस इतना कह कर बस इतना कहकर फफककर रो पड़े पान की दूकान चलाने वाले अमर कुमार सिंह.

    आज के समय जहाँ बेटी को गर्भ मे ही मारने की खबर आती हैं वही एक बाप अपनी छह वर्षीया बेटी के इलाज मे अपनी लगभग सभी संपत्ति को बेचकर भी इलाज नहीं करवा पा रहे थे. बता दें कि मधेपुरा जिला मुख्यालय के पास स्थित सुखासन गाँव के चौक पर ही पान दुकान चला कर अपना जीविकोपार्जन कर रहे थे अमर कुमार सिंह की छह वर्षीय बेटी ख़ुशी जब तीन साल की थी तो अचानक पेट मे दर्द के बाद इन्होने उसे डॉक्टर से दिखाया. शुरुआत में ही पता चल गया की ख़ुशी के लीवर मे 34 मिलीमीटर का एक ट्यूमर है.  फिर क्या था अपने बेटी ख़ुशी के इलाज मे सहरसा, पटना, दिल्ली आदि जगह जाकर अमर ने बेटी के इलाज के लिए अपना सबकुछ बेच तक दिया. पूरी जमा पूंजी समेत चार कट्ठा जमीन तक बिक गए मगर जानकारी के भाव मे इधर से उधर भटकते रह गए. डॉक्टर ने ऑपरेशन करने को कहा मगर रूपए तब तक समाप्त हो चुके थे. रूपए के भाव मे ख़ुशी का इलाज नीम-हकीम से करवाने लगे. मगर स्थिति दिन प्रति दिन और ख़राब होती चली गयी.
    समय बीतने के साथ अमर की ख़ुशी कोभी ग्रहण लगने लगे और बेटी की जिन्दगी के दिन भी गिनने लायक ही बचे थे. इसी बीच उनकी मुलाकात अनमोल नाम के एक युवक से हुई और वे उन्हें मधेपुरा जिला स्थित समिधा ग्रुप ले कर आ गए. समिधा ग्रुप के सचिव संदीप शाण्डिल्य ने मधेपुरा यूथ एसोसिएशन के संरक्षक तुरबसु से सम्पर्क किया और पीड़ित को लेते हुए सीधे जिलाधिकारी के पास पहुँच गए.
      अत्यंत व्यस्तता के बावजूद जिलाधिकारी मो. सोहैल ने जैसे ही आवेदन देखा उन्होंने आश्वस्त किया कि घबराएं नहीं, बिहार सरकार भी आपके साथ हैं. मुख्यमंत्री कोष से आपको जरुर मदद मिलेगी. समाहरणालय के सामान्य शाखा से बिना देर किये पत्र भी निर्गत हुआ और जिलाधिकारी ने उसे तुरंत सिविल सर्जन को फॉरवर्ड कर दिया.
   कक्ष से बाहर निकलते ही अमर सिंह की आँखों के आंसूओं का सैलाब निकल पड़ा. बस इतना कहकर फफककर रो पड़े कि “हमरा ले ते साक्षात भगवान के दोसर रूप छै डीएम साहेब” 
       विभागीय कारवाही शुरू चुकी हैं, उम्मीद है जल्द ही अमर के घर की ख़ुशी वापस लौटेगी. 
 (ब्यूरो रिपोर्ट)

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