23 फ़रवरी 2017

एक्सक्लूसिव: मधेपुरा में अधिकारियों की नाक के नीचे स्टांप पेपर की कालाबाजारी

मधेपुरा जिला निबंधन कार्यालय परिसर में धड़ल्ले से स्टांप पेपर की कालाबाजारी जारी है और अंतर्जिला सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर का स्टांप पेपर अधिकारियों की नाक के नीचे अवैध तरीके बेचा जा रहा है.

      सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस गोरखधंधे में कई स्टांप वेंडर और स्थानीय विभागीय अधिकारी भी शामिल हो सकते हैं. स्टांप वेंडर और बिचौलियों के मिली भगत से जहाँ मधेपुरा के सरकारी राजस्व को लगाया जा रहा है, वहीँ एक सौ रुपये के स्टांप पेपर को दो सौ से ढाई सौ रुपये लेकर स्टांप वेंडर और बिचौलियों के मिली भगत से ग्राहकों को बेचा जाता है स्टांप पेपर. ग्राहकों के शिकायत पर डीएम मो. सोहैल ने दिए निबंधन पदाधिकारी को जांचकर कार्रवाई का आदेश. डीएम ने खुद कहा कि एक सौ के स्टांप पेपर के बदले लिए जाते हैं 150 रुपये. डीएम ने कहा जांचकर ऐसे स्टांप वेंडर पर प्राथमिकी दर्ज होगी और लाइसेंस रद्द किया जाएगा.
जाहिर है ये रजिस्ट्री कचहरी के स्थानीय विभागीय अधिकारी और स्टांप वेंडर व बिचौलियो के माध्यम से सरकारी राजस्व में भारी सेंधमारी की जा रही है. कचहरी परिसर में अंतर जिला सहरसा के सिमरी बख्तियारपुर का अवैध तरीकों से बेचा जा रहा है स्टांप पेपर. एक सौ के स्टांप पेपर के लिए 150 और 250 रुपये लेकर ग्राहकों को चूना लगाया जा रहा है. एक सौ का स्टांप पेपर जरुरत मंद ग्राहकों को आसानी से प्राप्त नहीं हो पा रहा है. मोटी रकम खर्च कर बड़ी मशक्कत के बाद ग्राहकों के हाथ लग पाता है स्टांप पेपर. एक तरफ ग्राहक हैं खासे परेशान तो स्टांप वेंडर व विचौलिये काट रहे हैं चांदी तथा मधेपुरा जिला के राजस्व को भी लगा रहे हैं चूना.
     वहीँ जिला निबंधन पदाधिकारी कुमलेस कुमार सिंह की माने तो कार्यालय परिसर से बाहर का है मामला. जिला निबंधन पदाधिकारी ने मधेपुरा टाइम्स को बताया कि डीएम के आदेश पर जाँच किया जा रहा है और जाँच कर जल्द जिलाधिकारी को जाँच प्रतिवेदन भेजा जाएगा. एक सवाल के जबाब में निबंधन पदाधिकारी ने कहा कि फर्जी तरीके से सहरसा के बख्तियारपुर का स्टांप पेपर बैचे जाने का मामला सामने आया है जो सिर्फ मधेपुरा में शपथ पत्र इत्यादि के रूप में ही उपयोग हो सकता है, अन्यथा किसी काम के नहीं है यह स्टांप पेपर. रजिस्ट्री कचहरी में स्टांप पेपर की कालाबाजारी पर खड़े हो रहे हैं कई अहम् बड़ा सवाल? इन सवालों के कटघरे में खड़े हो सकते हैं अधिकारी. हालाँकि सघन जाँच के बाद ही हो सकता है बड़ा खुलासा. 

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