27 दिसंबर 2016

आत्मदाह की धमकी: भाभी के साथ अवैध सम्बन्ध के कारण पति पर प्रताड़ना का आरोप

मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड अंतर्गत रतनपट्टी गांव की एक महिला रूबी देवी न्याय के लिए दर-दर की ठोकर खा रही है पर उसे न्याय नहीं मिल पाने से अब महिला ने बेटी समेत आत्मदाह की धमकी दी है.

    पिछले दिनों 9 दिसंबर को रूबी देवी ने मुरलीगंज थानाध्यक्ष के नाम आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई कि उसका पति विजय चौधरी उसे जहर देकर मारने का प्रयास कर रहा है. साथ ही  साथ आवेदन में आरोप लगाया कि विजय चौधरी, अजय चौधरी, पिता स्वर्गीय लक्ष्मण चौधरी एवं सुनीता देवी पति अजय चौधरी सभी मिलकर उन्हें दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं. हमेशा उनके साथ मारपीट और बदसलूकी क्या करते हैं. कहा करते हैं कि पहले मोटरसाइकिल और टेलीविजन लाओ जबकि पीड़िता रूबी देवी का कहना है कि उसके पिता ने उपहार स्वरूप सभी
 
कुछ जितना संभव बन सका दिया. फिर भी वह नहीं मानते और मारपीट किया करते हैं.
     पीड़िता  ने बताया कि हमारे पति का अवैध संबंध उसकी अपनी भाभी से भी है, जिसका वह बार-बार विरोध करती है. इस कटु सत्य को उसने  ग्रामीणों एवं  पंचायत प्रतिनिधियों की एक एकरारनामे में  स्पष्ट  रूप से स्वीकार किया है.  इसके लिए वहां के सरपंच, मुखिया, पंचायत समिति, वार्ड सदस्य पंच सभी लोगों को बैठाकर एक पंचायत सामाजिक स्तर पर भी हुई. जिसमें उसके पति ने शपथ पत्र बनाकर इस मामले को तत्काल शांत कर दिया, पर पुनः  पति विजय चौधरी द्वारा पंचायत में किए गए वादों से मुकर हमेशा जान से मारने के प्रयास में लगा रहता है.
     पीड़िता ने बताया कि दिनांक 21/ 10/ 2011 को मधेपुरा न्यायालय में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के सामने ही थाना कांड संख्या 139/2011 में विजय चौधरी ने एकरारनामा  बनाकर कहा कि हम लोग एकरारनामे  लिख रहे हैं कि हम अपने पत्नी को ठीक ढंग से रखें.गे उसे किसी प्रकार की मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना नहीं देंगे. रूबी देवी और उसकी लड़की की देखभाल हम विजय चौधरी अपने सामर्थ के अनुसार करेंगे. अब वह न्यायालय में किए एकरारनामे बांड तथा ग्रामीण स्तर पर सरपंच एवं मुखिया द्वारा किए गए एकरारनामा की अनदेखी करते हुए जुल्म और सितम बरसाने लगा. तब लाचार होकर मैनें  पुनः मुरलीगंज थाना में न्याय लिए  9/12/2016 को आवेदन दिया, जिस पर थानाध्यक्ष ने थाना कांड संख्या 327/2016 दर्ज किया. आज तक उस पर पुलिस द्वारा इस दिशा में कोई सार्थक पहल नहीं किया गया. जब इस बात की सुचना हमने अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मधेपुरा के यहां पहुंच कर उनसे न्याय की गुहार लगाई उन्होंने सिर्फ आश्वासन भर दिया आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई.  पुनः  जब अध्यक्ष के पास पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई तो उन्होंने कहा की जब तक वरीय पदाधिकारी का कोई आदेश नहीं होता तब तक हम उसे गिरफ्तार नहीं कर सकते. मेरे पति ने मुझे घर से निकाल दिया है और मैं अपनी 8 वर्षीय पुत्री को लेकर दर-दर की ठोकर खा रही हूं. इस आशय की सूचना हमने पुलिस अधीक्षक महोदय मधेपुरा को भी दिनांक 14 /12 /16 रजिस्टर्ड पत्र द्वारा देकर न्याय की गुहार लगाई.
      पीड़िता ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब पति द्वारा जहर दिया ही जा रहा है तो क्यों ना न्याय के रखवाले के सामने अपनी पुत्री के साथ आत्मदाह कर लूं. कम से कम मेरी  मौत से कोई न्याय के रखवालों की कुम्भकर्णी नींद तो खुलेगी.

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