18 दिसंबर 2016

‘जनमत तैयार करने का सक्षम माध्यम है सोशल मीडिया’: पुष्यमित्र

सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है. जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम है. समाज का हर वर्ग इस पर क्रेंदित है. यह समाज का दिशा सूचक है.
इससे समाज और देश सशक्त मजबूत बन सकता है. यह बातें झल्लू बाबू सभागार में साहित्यकार पत्रकार क्लब के बैनर तले रविवार को आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उदघाटन करते हुए बिहार राष्ट्रभाषा परिषद के निदेशक सह बीएनएमयू के सीनेट सदस्य डा जयकृष्ण मेहता ने कही.
      उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू से समाज के युवा वर्ग नई-नई जानकारियों को हासिल करते है. लेकिन इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी है जो कभी कभी समाज में आपसी द्वेष को बढावा भी देते हैं. जरूरत है ऐसे नकारात्मक पहलू को दरकनिार करने की. डा मेहता ने कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वालों को पूरी निष्ठा, तन्मयता और लगन से काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके उभय पक्ष को रख कर काम करना चाहिए. ऐसे सेमिनार से समाज में एक नयी दिशा का संचार होगा जो युवाओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा. साथ ही यह कार्यक्रम ऐतिहासिक बनेगा.
    इससे पहले समारोह विधिवत उदघाटन राष्ट्र भाष परिषद के निदेशक डा. जयकृष्ण मेहता, पटना से आए बिहार के वरीय पत्रकार पुष्यमित्र, प्राचार्य डा सत्यजीत यादव, विभागाध्यक्ष डा इंद्र नारायण यादव, वरीय पत्रकार रूपेश कुमार, राकेश सिंह सहित अन्य ने संयुक्त रूप से किया. मौके पर क्लब के सचिव सह पत्रकार संजय परमार एवं सचिव सह पत्रकार रवि कुमार संत ने अतिथियों का स्वागत किया. इस अवसर पर जनसंचार प्रभा पत्रिका का भी अतिथियों ने विमोचन किया. समारोह की अध्यक्षता डा इंद्र नारायण यादव ने की. संचालन मिथिलेश वत्स ने किया. क्लब के साहित्य सचिव डा सिद्धेश्वर काश्यप ने विषय प्रवेश किया.
     मौके पर मुख्य वक्ता सह वरीय पत्रकार पुष्यमित्र ने मधेपुरा में सोशल मीडिया पर आयोजित ऐसे सेमिनार की सराहना करते कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब सुदूर देहात में भी इसकी खनक से लोगों में जनचेतना का संचार होगा. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एवं साहित्य का समन्वित माध्यम है सोशल मीडिया. उन्होंने मानवाधिकार और मानवीय न्याय के लिए सोशल मीडिया की सराहना करते कहा कि यह जनमत तैयार करने का सक्षम माध्यम है. श्री पुष्यमित्र ने कहा पिछले पांच सौ सालों से पूरी दुनियां में संवाद के लिए साहित्यकार और पत्रकार विभिन्न रूपों से जुड़े है. सोशल मीडिया की ताकत असीमित है. यह एक सराहनीय भी है. उन्होंने कहा कि कई ऐसी बातें है जो प्रिंट या इलेक्ट्रोनिक मीडिया नहीं कर पाती है वह सोशल मीडिया आसानी से कर लेती है. क्योंकि यह आम जनता की अपनी आवाज होती है. उन्होंने शहाबुद्दीन, चंदा बाबू, रॉकी यादव सहित कई ऐसे प्रकरणों की चर्चा करते कहा कि आज जो स्थिति वह सोशल मीडिया के कारण है. सहरसा के आरण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि सहरसा के एक व्यवसायी विपिन कुमार सिंह के आरण मोर पर फोटोग्राफी सोशल मीडिया के माध्यम से ही चर्चित हुई और मुख्यमंत्री तक ने आरण का दौरा किया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आदिवासी क्षेत्रों में भी अपनी धाक जमा रही है. साथ ही उन्होंने इसके नकारात्मक पहलूओं की चर्चा करते कहा कि कुछ गलत मानसिकता के लोग सोशल मीडिया पर नकारात्मक पक्ष रख कर समाज को कमजोर करती है. जरूरत है ऐसे तत्वों से बच निकलने की.
     विशिष्ट वक्ता चंद्रशेखरम ने दुनियां में संवाद की पौराणिक पद्धति की चर्चा करते हुए आज की नयी तकनीक तक की बात कही. उन्होंने कहा अभी भी इस क्षेत्र में बहुत आगे बढने की जरूरत है. भारत में उदारीकरण और वैश्वीकरण के विकास के साथ ही पत्रकारिकता में नैतिकता और मानवीय मूल्य धुंधली हुई है. ऐसे में सोशल मीडिया आम लोगों की आवाज बन कर उभरी है. इसके माध्यम से समाजिक सांस्कृतिक गतिविधियां भी तेज हुई है.
     विशिष्ट अतिथि सह एसपीएम लॉ कॉलेज के प्राचार्य प्रो सत्यजीत यादव ने कहा कि सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का एक व्यापक पैमाना बन चुका है. हर व्यक्ति इससे प्रभावित हो रहे है. लेकिन इसके नकारात्मक पक्ष से बचने के लिए बच्चों को बताने की जरूरत है. श्री यादव ने कहा साहित्यकार पत्रकार क्लब ने मधेपुरा में एक नयी संस्कृति को जन्म दिया जो यहां की ख्याति को दूर दूर तक फैलाने का काम करेगी.
    सेमिनार में राकेश सिंह ने कहा लोग सोशल मीडिया के निगेटिव पक्ष को ज्यादा ग्रहण कर रहे है. अवैधानिक और अमानवीय चीज बचाना चाहिए. क्योंकि इससे मानसिक परेशानी बढती है. उन्होंने कहा कि ऐसी चीजों को नियंत्रित करने के लिए साहित्यकारों को बढ चढ कर भागीदारी सुनिश्चित करना चाहिए. 
    डा आलोक कुमार, रंधीर कुमार, चंदन कुमार, संदीप शांडिल्य, तुरबशु, गौरव कुमार, राहुल यादव, अमन कुमार सिंह ने सोशल मीडिया के वर्तमान परिवेश पर अपने अपने विचार रखें. इस अवसर पर डा ललन कुमार अद्री, डा नीलाकांत, दीपक सिंह, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, रजीउररहमान, प्रभात कुमार मिस्टर, निशांत यादव, गरिमा उर्विशा, विकास कुमार, मानस चंद्र सेतु, ओम प्रकाश, राज कुमार, सुभाष चंद्र, कुमार शंभू शरण सिंह, निशांत कुमार, अभिषेक कुमार अनंत, शिवजी शिरण सिंह, इं हिमांशु विक्की, सारंग तनय, कृष्ण मुरारी, अशोक कुमार सहित दर्जनों की संख्या में साहित्यकार पत्रकार मौजूद थे. अंत में धन्यवाद ज्ञापन क्लब के सचिव संजय परमार ने किया.
(नि.सं.)

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