02 दिसंबर 2016

बैंकों में जद्दोजहद करती भीड़ दे रही हादसे को आमंत्रण (देखें वीडियो)

मधेपुरा जिले भर में आज भी नोटों के लिए मारामारी होती रही और कई बैंकों ने फिर से हाथ खड़े कर दिए. ग्रामीण क्षेत्रों में हालात लगातार बाद से बदतर होते जा रहे हैं.

जानकारी तो यहाँ तक मिल रही है कि आलमनगर प्रखंड के कुछ बैंक में खगड़िया जिले के बेलदौर आदि जगहों के लोगों का भी खाता है और वे रूपये नहीं मिलने की स्थिति में बैंकों के परिसर में ही रात गुजार कर अगले दिन का इन्तजार करते हैं.
     उधर मुरलीगंज के दो बैंकों में भारी भीड़ निकासी के लिए सुबह छ: बजे सवेरे से ही लाइन में खड़ी थी और जैसे ही बैंक की ग्रिल खुली लोगों का हुजूम एक दूसरे को धकेलते हुए भीतर घुसने की जद्दोजहद करने लगे. जाहिर है, ऐसे भगदड़ में किसी बड़े हादसे के होने का अंदेशा बना रहता है. एक महिला को सर में चोट भी लगी फिर भी वह अपने दर्द को नजरअंदाज करते हुए भीड़ में अपना नंबर पहले पाने के लिए घुसने की जद्दोजहद करती नजर रही थी.
 मुरलीगंज भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा मैं पिछले दो दिनों से ही पैसे नहीं हैं. शाखा प्रबंधक रामलखन रजक ने बताया कि ऐसी संभावना व्यक्त की कि अब सोमवार या मंगलवार को ही पैसे पाएंगे. क्योंकि हमारे चेस्ट बैंक मधेपुरा में भी पैसे उपलब्ध नहीं है. मुरलीगंज में भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा में इक्के दुक्के लोग अपने पुराने नोट जमा कर रहे थे, दूसरी तरफ गोल बाजार स्थित भारतीय स्टेट बैंक के शाखा प्रबंधक योगी पासवान माइक से बार बार निवेदन कर रहे थे कि बैंक में निकासी का काम नही हो पा रहा है, पैसे का अभाव है.
     जाहिर सी बात है, ऐसे में लोग पैसे के लिए कर्ज के रूप में इधर उधर हाथ फैलाते नजर रहे थे. किसान खाद और बीज के लिए मुंह बाए खड़े थे. मजदूर दवाई के लिए और कोई आज 2 दिनों से घर में राशननहीं पहुंचा पाने के कारण परेशान थे. किसी तरह जब बैंक के अंदर पहुंचकर स्थिति को देखा तो ऐसा लगता था कि कहीं भगदड़ मच गया तो निश्चित रूप से  बड़ी दुर्घटना होने से  इनकार नहीं किया जा सकता है. बैंक के अंदर जगह बहुत कम थी और भीड़ इतनी ज्यादा थी कि तिल रखने की जगह नहीं थी. सभी चेहरे परेशान नजर रहे थे. क्या महिला, क्या बूढ़े, क्या युवा सब एक दूसरे को धक्का देने में व्यस्त हैं. दिनोदिन बैंक की स्थिति बिगड़ती जा रही है. शाखा प्रबंधकों  का कहना है कि अजीब सी स्थिति उत्पन्न हो गई है. ऐसा कभी हमने सोचा भी नहीं था. ठीक से आराम कर पाते हैं. ऐसा प्रतीत होता है कि हम चौबीसों घंटे काम ही कर रहे हैं.
    केनरा बैंक में भी आज की स्थिति काफी अच्छी नहीं थी. कल वहां पैसे की किल्लत थी, बैंक में एक भी ग्राहक नहीं था. पर आज कुछ पैसे आए थे तो बैंक में भीड़ बहुत ही ज्यादा थी. ऐसे में शाखा प्रबंधक पुलिस प्रशासन को बुलाकर टाइगर मोबाइल द्वारा ग्राहकों को प्रतिनियुक्त करवाना पड़ा. तत्पश्चात भुगतान शुरू करवा़या गया. लेकिन कुछ ही पलों बाद स्थिति पुनः वही हो गई.  
    सेंट्रल बैंक में भी स्थिति कुछ अच्छी नहीं दिखी. लोग अपना नंबर पाने के लिए एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की करके बैंक के अंदर प्रवेश कर रहे थे. एक चौकीदार भला अकेले कैसे इतनी बड़ी भीड़ को संभाल सकता है. ऐसे में शाखा प्रबंधक आनंद कुमार ने बताया कि हम क्या कर सकते हैं सरकार को खुद सोचना चाहिए. हर बैंक में पुलिस की समुचित व्यवस्था कर इस नए नियम को लागू करवाना चाहिए. लगभग सारे बैंक कर्मी पिछले 23 दिनों से भारी तनाव का सामना कर रहे हैं. सभी बैंकों में कर्मियों की स्थिति लगभग यही होगी. उन्होंने पैसे के विषय में बताया कि जितनी देर चल जाए, फिर किसी व्यापारी के सामने हम ही गिड़गिड़ाएंगे कि भैया कुछ भेजो जो कुछ लोगों को पेमेंट हो और बैंक लोगों के हंगामे से बचा रहे.
**देखें इस वीडियो में कैसी भगदड़ की स्थिति है. यहाँ क्लिक करें.

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